बीकानेर के डॉ.प्रमोद कुमार चमोली को व्यंग्यधारा हेमलता देवी जैन साहित्य सम्मान अर्पित

बीकानेर।वरिष्ठ व्यंग्यकार प्रेम जनमेजय ने कहा है कि रचनाकार को यह समझ होनी चाहिए कि क्या लिखना है और क्या नहीं लिखना। इसके साथ ही हर लेखक को चाहिए कि वह अपने समय और समय से पहले के रचनाकारों को पढ़ें और फिर लिखना शुरू करे और खुद को री-राइट करता रहे।
शनिवार को बीकानेर के रचनाकार डॉ.प्रमोद कुमार चमोली को व्यंग्यधारा समूह के हेमलता देवी जैन साहित्य सम्मान-2020 को अर्पित करते हुए प्रेम जनमेजय ने यह कहा। व्यंग्यधारा समूह के इस ऑनलाइन आयोजन की अध्यक्षता करते हुए जनमेजय ने कहा कि डॉ.चमोली का व्यग्य लेखन संभावना भरा है और वे जो लिखते हैं, सोच-समझकर लिखते हैं।

कार्यक्रम के मुख्यअतिथि वरिष्ठ रंगकर्मी, साहित्यकार व पत्रकार मधु आचार्य ‘आशावादी’ ने देश की व्यंग्य विधा को छद्म व्यंग्यों से मुक्त करने की जरूरत जताते हुए कहा कि ऐसा होने से ही शरद जोशी और हरिशंकर परसाई की परंपरा को जीवित रखा जा सकेगा। उन्होंने कहा कि व्यंग्य के प्रति गंभीरता जरूरी है, क्योंकि व्यंग्य लेखन के लिए जिम्मेदार होना पड़ता है। उन्होंने कहा कि प्रमोद चमोली इसलिए अच्छे व्यंग्य लिख रहे हैं, क्योंकि वे रंगकर्मी भी हैं। प्रारंभ में जबलपुर के वरिष्ठ व्यंग्यकार रमेश सैनी ने कहा कि इस तरह के आयोजनों से देशभर में नये व्यंग्यकारों को भी पहचान मिल रही है। हर क्षेत्र से व्यंग्यकार निकल रहे हैं, लेकिन व्यंग्य के प्रति अभी अधिक गंभीर होने की जरूरत है। व्यंग्यधारा के संयोजक डॉ.रमेश तिवारी ने व्यंग्यधारा समूह की गतिविधियों  के संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि इस आयोजन से कोरोना काल में सृजनात्मक लेखन को नई दिशा मिली है। स्वागत भाषण में  सुनील जैन ‘राही’ ने व्यंग्यधारा हेमलता देवी जैन साहित्य सम्मान की रूपरेखा बताते हुए कहा कि इस पुरस्कार के लिए बनी हुई ज्यूरी को अंत तक घोषित नहीं किया जाता है। इस रूप में यह पुरस्कार अपने आप में एक अनूठी योजना है।
वरिष्ठ व्यंग्यकार बुलाकी शर्मा ने कहा कि एक अच्छे व्यंग्यकार के लिए बहुत जरूरी है कि वह कहते हुए डरे नहीं। प्रमोद कुमार चमोली ऐसे ही व्यंग्यकार हैं, जो निर्भीक होकर लिखते हैं, लेकिन समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी समझते हैं। वरिष्ठ कवि-कथाकार राजेंद्र जोशी ने इस अवसर पर कहा कि व्यंग्यधारा जैसे आयोजनों को होते रहने से न सिर्फ देश के साहित्यकार आपस में करीब आए हैं बल्कि रचनात्मक आदान-प्रदान का रास्ता भी खुला है। इस अवसर पर कथाकार नदीम अहमद ‘नदीम’ने डॉ.प्रमोद कुमार चमोली के कृतित्व पर वक्तव्य में कहा कि प्रमोद चमोली बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी हैं।
सम्मान के प्रत्युत्तर में प्रमोद कुमार चमोली ने कहा कि नाटक लिखते हुए मुझे व्यंग्य लेखन के लिए अपने आसपास के परिवेश से प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि मेरे लिए व्यंग्य-लेखन का यह राष्ट्रीय पुरस्कार बहुत अहमियत रखता है और हमेशा प्रेरित करता रहेगा। बीकानेर में आयोजित सम्मान समारोह में
समारोह के मुख्य अतिथि श्री मधु आचार्य जी ने डॉ.प्रमोद कुमार चमोली को शॉल, श्रीफल, प्रतीक चिह्न, नकद राशि का चैक भेंट किया। इसके पूर्व वरिष्ठ रंगकर्मी रामसहाय हर्ष, शायर इरशाद अजीज, राहुल सक्सैना ने माल्यार्पण कर सम्मानित किया ।
व्यंग्यधारा की आन लाइन आँफ लाइन कार्यक्रम में डाँ. कुंदन सिंह परिहार, जयप्रकाश पाण्डेय, राकेश सोहम, अनूप शुक्ल, अल्का अग्रवाल सिगतिया, वीना सिंह, हनुमान मुक्त, मदन गोपाल लढ्ढा,अरविंद दुबे, नवीन जैन, संजय पुरोहित, प्रभाशंकर उपाध्याय, अभिजीत दुबे, हनुमान प्रसाद मिश्र, टीका राम साहू, स्नेहलता पाठक, दिलीप तेतरबे महेंद्र सिंह ठाकुर, आदि देश के विभिन्न क्षेत्रों से आन लाइन उपस्थित रहे।सभी अतिथियों का आभार प्रदर्शन राजशेखर चौबे और सम्मान सत्र का संचालन हरीश बी शर्मा. ने किया.