मौसम अपडेट : राजस्थान में 3 दिन बाद चलेगी बर्फीली हवा:

जयपुर। आधा दिसंबर बीत चुका है, लेकिन राजस्थान में अब तक सर्दी ने जोर नहीं पकड़ा है। पिछले तीन साल में यह पहला मौका है, जब प्रदेश के एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू में बर्फ देखने को नहीं मिली है। सबसे ठंडा रहने वाला चूरू और सीकर में भी इस बार तापमान सामान्य के आसपास रहा है। हमेशा इन दिनों में कोहरे से लिपटे रहने वाले बीकानेर, हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर जैसे शहरों में मौसम साफ है। मौसम विभाग के अनुसार, अभी कड़ाके की सर्दी के लिए थोड़ा और इंतजार करना पड़ेगा। अनुमान है कि 18 से 20 दिसंबर के बाद मौसम सर्द हो सकता है। कुछ स्थानों पर बर्फ जम सकती है।   जयपुर में पिछले 10 साल में सबसे सर्द रात 30 दिसंबर 2019 की थी। तब मिनिमम टेंपरेचर 1 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ था। अन्य सालों में न्यूनतम तापमान 8 से 4 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा है, लेकिन ये ज्यादातर 20 से 31 दिसंबर के बीच रहा है। हालांकि इस बार जयपुर में अब तक मिनीमम टेंपरेचर 9.2 डिग्री सेल्सियस तक ही पहुंचा है।     फतेहपुर में पहुंचा माइनस में पारा इस साल अब तक शहर का एकमात्र कस्बा सीकर का फतेहपुर है, जहां एक दिन पारा माइनस में गया है। 11 दिसंबर को न्यूनतम तापमान -1.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा 12 दिसंबर को 0 और तीन ऐसे दिन रहे है, जब मिनिमम टेंपरेचर 1 से 0 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा है।   गेहूं, सरसों, जौ के लिए सबसे अच्छा मौसम राजस्थान में वर्तमान में जो मौसम चल रहा है, वह रबी की फसल के लिए सबसे अच्छा माना जा रहा है। वर्तमान में 10 हजार 80 हेक्टेयर में बुवाई का लक्ष्य है, जिसमें से 9699 हेक्टेयर जमीन पर बुवाई हो चुकी है। यह लक्ष्य का 96 फीसदी है। फतेहपुर एग्रीकल्चर कॉलेज के डीन प्रो. शीशराम ढाका ने बताया कि गेहूं, सरसों, चना, जौ आदि के लिए अगर न्यूनतम तापमान 12 से 5 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है तो यह सबसे अच्छा है। तापमान में अगर इससे ज्यादा गिरावट आती है तो यह फसलाें की ग्रोथ के लिए ठीक नहीं है। ज्यादा सब्जी की फसलों जैसे गोभी, गाजर, मटर, बैंगन आदि में पाला पड़ने जैसी स्थिति हो जाती है।   18 दिसंबर से शीतलहर की चपेट में आ सकता है उत्तरी राजस्थान जयपुर मौसम केन्द्र के अनुसार, 18 दिसंबर से उत्तर भारत में ठंडी हवाएं मध्य भारत की तरफ आएंगी। इस कारण उत्तरी राजस्थान के हनुमानगढ़, चूरू, झुंझुनूं, बीकानेर, अलवर, सीकर और जयपुर में शीतलहर का प्रकोप रहेगा। इससे न्यूनतम तापमान में गिरावट होगी और गलन भरी सर्दी पड़ेगी। विशेषज्ञों की मानें तो सीकर, चूरू में अगले कुछ दिनों तक तापमान 5 डिग्री सेल्सियस से भी नीचे बना रह सकता है। फतेहपुर, माउंट आबू समेत अन्य स्थानों पर तापमान जमाव बिंदु या उससे भी नीचे यानी माइनस में जा सकता है।   डॉक्टर्स की मानें तो आगामी दिनों में जो शीतलहर चलने की आशंका है, उससे सबसे ज्यादा नुकसान बुजुर्ग और बच्चों को होता है। ऐसे में बच्चे और बुजुर्ग सुबह-शाम घरों में ही रहें तो ज्यादा बेहतर होगा। दमा के मरीजों को भी सर्दियों में थोड़ा ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत होती है। तेज सर्दी में दमा रोगियों को सांस लेने में तकलीफ सामान्य दिनों के मुकाबले ज्यादा रहती है। बच्चों और बुजुर्गो को ठंड में जुकाम, बुखार की चपेट में आने की आशंका बढ़ जाती है।
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