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जिम्मेदारों जरा इनकी भी सुनों, हर बार यहीं समस्या, आखिर इसका समाधान होगा भी या नहीं, देखें वीडियो

-कुशाल सिंह मेडतियां

बीकानेर। पिछले कई दिनों से उमस ने आमजन का हाल बेहाल कर रखा था। बुधवार दोपहर बाद गांवों से लेकर शहर तक हुई झमाझम बारिश से गर्मीं और उमस से राहत मिल गई। मौसम केंद्र के अनुसार बीकानेर शहर में बुधवार को 22.7 मिमी बरसात दर्ज की गई। लेकिन हुई इतनी बारिश ने ही मानों एक बार फिर नगर निगम के दावों की पोल खोलकर रख दी। हर साल बारिश होती है हर साल दावें किए जाते है। नालों की सफाई के दावें होते है। लेकिन जैसे ही बारिश आती है हालात जस के तस नजर ही आते है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए बारिश आने के बाद मानों समस्या ओर बढ़ जाती है। तेज बारिश के बाद जूनागढ़ से नगर निगम की ओर जाने वाली सड़क पर इतना पानी भर जाता है की आवागमन लगभग बंद सा हो जाता है।

पुरानी गिन्नाणी क्षेत्र में तो स्थिति यह है की पहले कई दिन पानी निकलता नहीं ओर बाद में कई दिनों तक कीचड़ इतना जमा हो जाता है की निकलना भी मुश्किल हो जाता है। स्थिति यह हो जाती है की वहां मौजूद दुकानदारों को भी मजबूरन दुकान बंद रखनी पड़ती है। कारण कीचड़ की बदबू इतनी की ग्राहक वहां पहुंचते ही नहीं है। आखिर इस हालात से कब छुटकारा मिलेगा? क्या केवल कागजों में ही समस्या के हल होने के दावे होंगे?

बारिश के दौरान सीवर चैंबर जाम होने के कारण चैंबर मेनहोल से पानी लगातार निकलता रहा। कई नाले कचरे व गंदगी के कारण अटे होने से उफान पर रहे। पानी के साथ कचरा व गंदगी सड़कों पर फैलती रही। पानी निकासी के लिए निगम ने अपने संसाधन झोंके। सूरसागर के पास जेसीबी की मदद से नाले के जाली गेट को खोलकर पानी की निकासी की गई। वहीं निगम की ओर से पुलिस लाइन, सेटेलाइट अस्पताल के पास, गंगाशहर भीनासर सहित कई जगहों पर जेसीबी मशीनें भेजी गईं।

तीन मंत्रियों के बावजूद यह हालात
राजस्थान सरकार में बीकानेर से तीन-तीन मंत्री है। इसके बावजूद शहर में इस तरह के हालात देखने को मिल रहे है। डॉ. बी.डी कल्ला, भंवर सिंह भाटी और गोविंदराम मेघवाल मंत्री है लेकिन इसके बाद भी कोई सुध नहीं ली जा रही है। अपने अपने विधानसभा क्षेत्रों काम करवाए जा रहे। लेकिन बीकानेर पूर्व विधानसभा क्षेत्रों में कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इतना ही नहीं विधायक और महापौर भी इस तरफ की समस्या की ओर ध्यान नहीं दे रहे है। पूर्व विधानसभा क्षेत्र के मुख्य मार्ग जूनागढ़ के आगे की स्थिति किसी से भी नहीं छुपी है। हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक आते है। फोर्ट डिस्पेंसरी के आगे की सड़क पिछले कई समय से टूटी है जो आज तक ही वापस नहीं बनी है। जबकि इस डिस्पेंसरी में दिखाने के लिए मरीज बड़ी संख्या में यहां आते है।

न अधिकारी न नेता आखिर कौन सुनेगा समस्या
थोड़ी हो या फिर ज्यादा बारिश निचले इलाकों में पानी भरने की समस्या रहती है। यहां के कमजोर ड्रेनज सिस्टम के कारण परेशानी लोगों को होती है। इस तफ न ही कोई नेता ध्यान देता और न ही कोई अधिकारी इसकी सुध लेते है। क्योंकि उनके घर के पास ऐसी समस्या देखने को नहीं मिलती है। इसलिए इस तरफ ध्यान कोई नहीं देता है। जबकि जिम्मेदार इन रास्तों से दिन में कई बार निकलते भी है। लेकिन न अधिकारी न नेता इस ओर ध्यान दे रहे है।

निगम के आगे ही पानी
जिस नगर निगम के पास इसकी जिम्मेदारी है, उसके आगे ही बारिश के दौरान पानी-पानी हो जाता है। इस वजह से इस रोड पर आवागमन ही लगभग बंद सा हो जाता है। हालात यह है की पिछली बार आई बारिश के दौरान नगर निगम आयुक्त की ही गाडी फंस गई थी। इसके बाद भी निगम नहीं चेता ओर आज हालात जस के तस बने हुए है।

जगह-जगह गड्ढे
शहर में कई सड़कों की स्थिति यह है कि यहां पर बड़े-बड़े गड्ढ़े बन गए। सड़कें टूटी पड़ी है। बारिश के दौरान रात को अंधेरा होने से गड्ढ़े दिखते नहीं है। इस वजह से हादसा होने का डर रहता है।

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