दर्दनाक मामला : मां ने पापा को मार दिया, डॉक्टर ने 10 साल के बच्चे को नौकर बनाया, मारा पीटा - Khulasa Online

दर्दनाक मामला : मां ने पापा को मार दिया, डॉक्टर ने 10 साल के बच्चे को नौकर बनाया, मारा पीटा

10 साल के एक मासूम को डॉक्टर ने बंधक बनाकर घर में रखा था। उसे नौकर की तरह दिन में 12-12 घंटे काम कराया जाता। मना करने पर भद्दी-भद्दी गालियां भी देते। कभी-कभी गुस्सा आने पर डॉक्टर उससे मारपीट भी करते थे। इससे भी दर्दनाक बात यह है कि मासूम को उसकी दादी से यह कहकर लाया गया था कि उसकी जिंदगी संवार देंगे और उसे अच्छे स्कूल में पढ़ाएंगे। मामला जयपुर के सांगानेर सदर इलाके का है।

मंगलवार सुबह पुलिस और बचपन बचाओ की टीम जब डॉक्टर के घर बच्चे को आजाद कराने पहुंची तो वह चिल्ला उठा- आंटी प्लीज मुझे यहां से ले जाओ। इस कार्रवाई के बाद पड़ोसी भी दंग हैं कि डॉक्टर ने बच्चे को घर में बंधक बनाकर रखा था। उससे मारपीट और गाली-गलौज करता था।

मां ने पापा को मार दिया, पुलिस ले गई सांगानेर सदर थानाधिकारी बृजमोहन कविया ने बताया कि आजाद कराया गया मासूम बिहार के पटना जिले का रहने वाला है। पुलिस ने बताया कि 2 साल पहले बच्चे की मां ने पिता की हत्या कर दी थी। इस मामले में उसकी मां को जेल हो गई। अब दादी और बच्चा ही घर में बचा था। पटना जिले में ही रहने वाला एक बुजुर्ग दंपती उसे गत मार्च में जयपुर लेकर आया था। उसकी दादी से वादा किया कि उसे पढ़ाएंगे और बेटे की तरह रखेंगे।

यहां लाकर दंपती ने उसे अपने डॉक्टर बेटे के घर छोड़ दिया। बेटे ने उसे पढ़ाना -लिखाना तो दूर, घर का नौकर बना लिया। अल सुबह से देर रात तक उससे घर का काम कराया जाने लगा। एक महीने में कई बार डॉक्टर ने गाली-गलौज और मारपीट की। इस पूरे घटनाक्रम की सूचना किसी तरह 'बचपन बचाओ अभियान' की टीम को मिली। टीम पुलिस के साथ पहुंची और बच्चे को मुक्त कराया।

बच्चा बोला- मुझे ले चलो आंटी बचपन बचाओ की जया शशि और पार्वती कंवर ने बताया कि बच्चे को लगा कि हम पर भरोसा किया जा सकता है तो वह खूब रोया। बोला मुझे दादी के पास भेज दो, यहां नहीं रहना। ये लोग काम कराते हैं, खाना नहीं देते। पढ़ाई नहीं कराते। बच्चे ने पुलिस को बताया कि एक महीने में एक बार भी दादी से बात तक नहीं कराई।

पुलिस ने बच्चे को अवैध तरीके से रखने और घरेलू काम कराने के आरोप में महात्मा गांधी हॉस्पिटल के डॉक्टर पुष्कर मणि के खिलाफ बाल श्रम अधिनियम की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। आरोपी डॉक्टर को कभी भी गिरफ्तार किया जा सकता है। वहीं, डॉक्टर का पक्ष जानने के लिए शाम 5 बजे के करीब 3 बार फोन किया, लेकिन उन्होंने रिसीव नहीं किया। फिलहाल बच्चे को शेल्टर होम में रखा गया है, जिसे कानूनी प्रक्रिया के बाद दादी के सुपुर्द किया जाएगा।

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