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सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी भर्ती में एससी-एसटी-ओबीसी उम्मीदवार को जनरल सीट पर चयन के विवाद को लेकर सुनाया बड़ा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी भर्ती में एससी-एसटी-ओबीसी उम्मीदवार को जनरल सीट पर चयन के विवाद को लेकर सुनाया बड़ा फैसला

सुप्रीम कोर्ट की बैंच ने सरकारी भर्ती में SC-ST-OBC उम्मीदवार को जनरल सीट पर चयन के विवाद को लेकर बड़ा फैसला लिया। सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि SC-ST-OBC को ज्यादा नंबर आए तो भी जनरल की सीट नहीं मिलेगी। सुप्रीम कोर्ट ने यह फेसला राजस्थान की सरकारी भर्ती के मामले में फैसला देते हुए दी। फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ओपन या जनरल का कोई कोटा नहीं होता। इस कैटेगरी की सीटें सभी के लिए खुली होती हैं और किसी भी जाति, वर्ग और लिंग के लिए आरक्षित नहीं हो सकते। लेकिन इसी महीने में सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी नौकरी के एक दूसरे मामले में यह भी साफ किया है कि कुछ मामलों में आरक्षित वर्ग वाले जनरल सीट के लिए दावा नहीं कर सकते, भले ही ज्यादा नंबर आए हों।

ओपन या जनरल कैटेगरी को कोई कोटा नहीं होता

जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने ओपन या जनरल सीट्स पर आरक्षित वर्ग के दावों को लेकर बड़ा फैसला दिया था। उस फैसले को आरक्षित वर्ग के मेधावी उम्मीदवारों की बड़ी जीत माना जा रहा है। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की बेंच ने कहा था कि ‘ओपन या जनरल कैटेगरी का कोई कोटा नहीं होता, ऐसी सीटें सभी के लिए खुली हों और किसी भी जाति, वर्ग या लिंग के लिए आरक्षित न हो।’

कोर्ट ने कहा था कि कोई भर्ती अथॉरिटी किसी उम्मीदवार को सिर्फ इसलिए ओपन कैटेगरी की पोस्ट के लिए विचार से बाहर नहीं कर सकती, क्योंकि वह रिजर्व कैटेगरी का है, अगर उसने जनरल कट-ऑफ से ज्यादा नंबर हासिल किए हैं। ऐसे बाहर करना संविधान के आर्टिकल 14 और 16 के तहत समानता की गारंटी का उल्लंघन करता है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि सबसे पहले शॉर्टलिस्ट पूरी तरह से मेरिट के आधार पर तैयार की जानी चाहिए, जिसमें आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवार भी शामिल हों जो जनरल कट-ऑफ क्लियर करते हैं।

ज्यादा नंबर लाने पर भी नहीं मिलेगी जनरल की सीट

अब ताजा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एससी कैटेगरी के एक उम्मीदवार को जनरल कैटेगरी की सीट के लिए दावे को गलत ठहराया है। कोर्ट ने भारतीय वन सेवा (IFS) के जनरल कैडर में एससी वर्ग के उम्मीदवार की नियुक्ति पर विचार करने से इनकार कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट के दोनों टिप्पणी अपनी-अपनी जगह बिल्कुल सही है। ज्यादा नंबर लाने वाले आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार जनरल सीट के हकदार होते हैं, बशर्ते उन्होंने आरक्षित वर्ग को कट-ऑफ, उम्र, फीस या फिजिकल में मिलने वाली छूट का फायदा न लिया हो। अगर रिजर्व कैटेगरी का लाभ लिया जाता है तो वह जनरल सीट के लिए दावा नहीं कर सकते, भले ही मार्क्स जनरल कट-ऑफ से ज्यादा हों।

IFS उम्मीदवार के मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक बार जब किसी आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी ने छूट ले ली, तो वह जनरल या ओपन कैटेगरी की रिक्तियों के लिए योग्य नहीं माना जा सकता। उम्मीदवार ने साल 2013 की IFS की प्रारंभिक परीक्षा में एससी वर्ग कम कट-ऑफ का लाभ उठाया था। तब जनरल कैटेगरी की कट-ऑफ 267 मार्क्स और एससी की कट-ऑफ 233 मार्क्स थी। एससी वर्ग से उम्मीदवार ने 247.18 कट-ऑफ मार्क्स के आधार पर पात्रता हासिल की थी। अब उम्मीदवार जनरल कैडर की मांग कर रहा था।

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