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बीकानेर ट्रोमा हॉस्पिटल में मंगलवार से शुरू होगी प्रदेश की पहली ऑर्थो बायोलॉजिकल रिजनरेटिव केयर लैब

बीकानेर ट्रोमा हॉस्पिटल में मंगलवार से शुरू होगी प्रदेश की पहली ऑर्थो बायोलॉजिकल रिजनरेटिव केयर लैब
बिना किसी ऑपरेशन और चीर-फाड़ के उपचार होगा संभव
स्पोर्ट्स इंजरी समेत विभिन्न बीमारियों का किया जाएगा उपचार
शरीर में प्राकृतिक रूप से हीलिंग एवं टिशू को किया जाएगा रिपेयर
ओबीआरसी लैब हड्डी एवं मस्क्यूलोस्केलेटल बीमारियों के उपचार में नई क्रांति सिद्ध होगी- डॉ खजोटिया , प्रभारी, ट्रोमा हृॉस्पिटल
बीकानेर। पीबीएम अस्पताल से संबद्ध ट्रोमा हॉस्पिटल में प्रदेश की पहली अत्याधुनिक ऑर्थो बायोलॉजिकल रिजनरेटिव केयर लैब का ट्रायल मंगलवार से शुरू होने जा रहा है। ट्रोमा हॉस्पिटल प्रभारी और वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ बी.एल,खजोटिया ने बताया कि यह अत्याधुनिक ओआरबीसी लैब हड्डी एवं मस्क्यूलोस्केलेटल बीमारियों के उपचार में नई क्रांति सिद्ध होगी और पीबीएम अस्पताल को चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में एक नई पहचान दिलाएगी।

शरीर में प्राकृतिक रूप से हीलिंग एवं टिशू रिपेयर किया जाएगा : डॉ. खजोटिया ने बताया कि ओबीआरसी एक आधुनिक ऑर्थो बायोलॉजिकल रीजेनरेटिव उपचार पद्धति है, जिसके माध्यम से शरीर में प्राकृतिक रूप से हीलिंग एवं टिशू रिपेयर को प्रोत्साहित किया जाता है। खास बात ये कि यह उपचार मरीज के स्वयं के रक्त एवं बोन मैरो से प्राप्त ब्लड कंपोनेंट्स को संकेंद्रित कर किया जाता है। इस पद्धति में मरीज के खून से ही उपचार टीका तैयार किया जाएगा। इस ट्रायल क्लीनिक/लैब में रेजिडेंट डॉक्टर्स द्वारा विभिन्न शोधात्मक कार्य भी प्रारंभ किए जाएंगे।
डॉ खजोटिया ने बताया कि यह पद्धति पिछले 10 वर्षों से रेजिडेंट डॉक्टर्स द्वारा अपनी थीसिस के अंतर्गत प्रयोग की जा रही है। जिसमें अत्यंत उत्कृष्ट एवं उल्लेखनीय परिणाम सामने आए हैं। ओबीआरसी तकनीक रोगी कल्याण के क्षेत्र में एक नई दिशा और क्रांतिकारी बदलाव स्थापित करेगी। इस रिसर्च क्लीनिक को क्लिनिकल रिसर्च कमेटी से स्वीकृति प्रदान की गई है।

बिना किसी ऑपरेशन और चीर-फाड़ के उपचार होगा संभव : ट्रोमा हॉस्टिपल के वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ अजय कपूर ने बताया कि ओआरबीसी उपचार एक मिनिमम इनवेसिव तकनीक है, जिसमें बिना किसी ऑपरेशन, चीर-फाड़ अथवा बाहरी रसायनों (जैसे स्टेरॉइड) के उपचार संभव है। यह एक ओपीडी आधारित डे-केयर प्रक्रिया है, जिसमें रोगी लगभग 1 घंटे में उपचार लेकर घर जा सकता है।

स्पोर्ट्स इंजरी समेत विभिन्न बीमारियों में होगा नई तकनीक का इस्तेमाल : डॉ कपूर ने बताया कि इस नवाचार का उपयोग चिकित्सा विशेषज्ञों द्वारा स्पोर्ट्स इंजरी, शोल्डर (रोटेटर कफ, आर्थराइटिस, फ्रोजन शोल्डर),टेनिस एल्बो (टेंडोनाइटिस), गोल्फर एल्बो,हिप, घुटना (कार्टिलेज, मेनिस्कस इंजरी, ओए ग्रेड 1, 2, 3), एंकल, प्लांटर फेशियाइटिस, हड्डियों का डिलेड/नॉन यूनियन,डिस्क प्रोलैप्स इत्यादि में किया जाएगा।
डॉ कपूर ने बताया कि लैब की स्थापना हेतु नोखा के भामाशाह श्री मघाराम कुलरिया द्वारा सहयोग किया गया है। संपूर्ण सहयोग का आश्वासन भी प्रदान किया गया है।एमएलए और एमपी लैड से भी सहयोग मांगा गया है । डॉ कपूर ने बताया कि ओआरबीसी की स्थापना के पश्चात शीघ्र ही ऑर्थोपेडिक मेडिकल रिसर्स सेंटर की स्थापना भी की जाएगी। विदित है कि पिछले चार-पांच वर्षों से ट्रॉमा सेंटर प्रभारी डॉ. बी. एल. खजोटिया और वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय कपूर (पीएस) इस लैब की स्थापना को लेकर प्रयासरत थे।

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