बीकानेर जेल में बंद बंदी ने लगाई हाईकोर्ट से गुहार, कोर्ट ने कलक्टर व जेल अधीक्षक के जवाब पर जताया असंतोष - Khulasa Online

बीकानेर जेल में बंद बंदी ने लगाई हाईकोर्ट से गुहार, कोर्ट ने कलक्टर व जेल अधीक्षक के जवाब पर जताया असंतोष

बीकानेर. राजस्थान हाईकोर्ट ने जेल बंदियों को आकस्मिक परिस्थितियों में दिए जाने वाले पैरोल आवेदनों को एक तय समय सीमा में निस्तारित करने को कहा है। राज्य के गृह सचिव से कहा गया है कि वे यह सुनिश्चित करे कि प्रदेश के सभी जिला कलेक्टर व जेल अधीक्षक आकस्मिक पैरोल आवेदनों को लंबित नहीं रखे। बीकानेर जेल में बंद एक बंदी की मां के निधन के बावजूद उसके पैरोल आवेदन पर फैसला नहीं लेने पर हाईकोर्ट ने बीकानेर कलेक्टर व जेल अधीक्षक के खिलाफ एक्शन लेने के लिए राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है। बीकानेर जेल में बंद बंदी गिरधारी सिंह की मां का 9 मार्च को निधन हो गया था। उसकी तरफ से 10 मार्च को जेल अधीक्षक के समक्ष आकस्मिक पैरोल का आवेदन किया गया। इस आवेदन पर जेल अधीक्षक ने करीब एक माह तक कोई फैसला नहीं किया। इसके बाद 8 अप्रैल को बंदी की तरफ से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर पैरोल देने की गुहार लगाई गई। हाईकोर्ट ने अतिरिक्त महाधिवक्ता को मौखिक आदेश दिया कि बीकानेर जिला कलेक्टर व जेल अधीक्षक चार दिन के भीतर इस आवेदन का निस्तारण करे। इसके बावजूद कोई फैसला नहीं लिए जाने पर हाईकोर्ट ने बीकानेर जिला कलेक्टर व जेल अधीक्षक को कोर्ट में उपस्थित होकर अपना जवाब पेश करने का आदेश देते हुए कहा कि क्यों न उनके खिलाफ एक्शन लिया जाए। हाईकोर्ट के न्यायाधीश संदीप मेहता व न्यायाधीश विनोद कुमार भारवानी की खंडपीठ के समक्ष बीकानेर के जिला कलेक्टर व जेल अधीक्षक ने अपना जवाब पेश किया। खंडपीठ ने इस जवाब से नाराजगी जताते हुए इस पर असंतोष जाहिर किया। खंडपीठ ने इस पूरे मामले की पत्रावली के साथ दोनों के जवाब को राज्य के मुख्य सचिव को भेजने के निर्देश दिए। ताकि वे दोनों के खिलाफ एक्शन ले सकें। वहीं राज्य के गृह सचिव को कहा गया है कि वे सभी जिला कलेक्टर व जेल अधीक्षकों को पत्र भेज यह सुनिश्चित करें कि किसी भी आकस्मिक पैरोल आवेदन का समय पर निस्तारण कर दिया जाए।
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