बीकानेर सं./ में हुआ था हत्याकांड, ट्रायल कोर्ट ने सुनाया था मृत्युदंड, हाईकोर्ट ने मरते दम तक जेल में रहने की सजा में बदला - Khulasa Online

बीकानेर सं./ में हुआ था हत्याकांड, ट्रायल कोर्ट ने सुनाया था मृत्युदंड, हाईकोर्ट ने मरते दम तक जेल में रहने की सजा में बदला

खुलासा न्यूज, बीकानेर।  राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में नौ वर्ष पूर्व हनुमानगढ़ जिले के भादरा क्षेत्र में चार लोगों की हत्या के चार आरोपियों को ट्रायल कोर्ट की तरफ से दिए गए मृत्य दंड को आजीवन कारावास की सजा में बदल दिया। साथ ही हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि इन चारों को मरते दम तक जेल में रहना होगा। इन चारों को न तो स्थाई पैरोल मिल सकेगा और न ही समय पूर्व रिहा किया जा सकेगा।

यह था मामला भादरा थाना क्षेत्र के अनूपशहर निवासी सोलह वर्षीय कैलाशचंद्र अपने पिता भंवरलाल व भाई पंकट के साथ ग्वार की बुवाई कर रहा था। उसी समय ट्रैक्टर में हथियार के साथ आए आत्माराम, ओमप्रकाश, पवन, लीलाधर व श्रवण सहित कुछ अन्य वहां आए। आते ही उन्होंने तीनों पर हमला बोल दिया। इस हमले में भंवरलाल व पंकज की घटना स्थल पर ही मौत हो गई। जबकि कैलाशचंद्र गंभीर रूप से घायल हो गया। हमलावरों ने उसकी आंखों में केमिकल डाल दिया। जिससे उसकी आंखों की रोशनी हमेशा के लिए चली गई। खेत पर हमला करने के बाद हमलावर उसके घर पहुंचे। वहां उन्होंने कैलाश के दादा मोमन राम, बहन चंद्रकला व मां सुशीला पर हमला बोला। मां के हाथ-पांव तोड़ दिए गए। उसने स्वयं को एक कमरे में बंद कर अपनी जान बचाई। जबकि मोमन राम व चंद्रकला गंभीर रूप से घायल हो गए। जिनकी बाद में इलाज के दौरान मौत हो गई। ट्रायल कोर्ट ने हमलावरों में से आत्माराम, ओमप्रकाश, श्रवण कुमार व लीलाधर को दोषी करार देते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। इन चारों ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी।

यह कहा हाईकोर्ट ने हाईकोर्ट में न्यायाधीश संदीप मेहता व न्यायाधीश विनोद कुमार भैरवानी की खंडपीठ ने कहा कि इन चारों ने जघन्य अपराध किया है। हमलावरों का मुख्य उद्देश्य बरसों पुराने जमीन विवाद में मोमन राम के पूरे परिवार की हत्या करना था। वे पूरी तैयारी से सभी को मारने के लिए आए थे। हाईकोर्ट ने मृत्यदंड को पलटते हुए चारों को मरते दम तक जेल में रहने की सजा सुनाई। खंडपीठ ने कहा कि आजीवन कारावास की सजा काट ये लोग बाहर आते ही मोमन राम के परिवार के शेष रहे सदस्यों पर फिर से हमला कर सकते है। ऐसे में इन लोगों को मरते दम तक जेल में रहना होगा। साथ ही इन्हें स्थाई पैरोल या समय पूर्व रिहा नहीं किया जा सकेगा।

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