
महिलाओं-लड़कियों पर स्मार्टफोन पाबंदी का मामला मानवाधिकार आयोग तक पहुंचा, कलक्टर को नोटिस




महिलाओं-लड़कियों पर स्मार्टफोन पाबंदी का मामला मानवाधिकार आयोग तक पहुंचा, कलक्टर को नोटिस
जालोर। जसवंतपुरा क्षेत्र के गजीपुरा गांव में सामाजिक पंचायत द्वारा महिलाओं और बेटियों पर स्मार्टफोन उपयोग पर लगाए गए प्रतिबंध को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने गंभीरता से लिया है। आयोग ने इस मामले में जिला कलक्टर जालोर को नोटिस जारी करते हुए प्रकरण की जांच कर 14 दिन के भीतर तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
नोटिस में आयोग ने कहा है कि महिलाओं पर इस तरह का प्रतिबंध सीधे तौर पर लैंगिक भेदभाव को दर्शाता है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी पंचायत या सामाजिक समूह को महिलाओं के संचार साधनों या तकनीक के उपयोग को नियंत्रित करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। यह कदम न केवल महिलाओं की स्वतंत्रता का हनन करता है, बल्कि उनकी शिक्षा और आवाजाही की आजादी को भी प्रभावित कर सकता है।
इस तरह सुर्खियों में आया मामला
विवाद की शुरुआत 21 दिसंबर 2025 को हुई, जब जालोर के जसवंतपुरा क्षेत्र के गजीपुरा गांव में चौधरी समाज की बैठक आयोजित की गई। बैठक में समाज की 14 पट्टियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि 15 गांवों की बहू-बेटियां स्मार्टफोन का उपयोग नहीं करेंगी।
पंचायत ने निर्देश दिए कि महिलाएं केवल कीपैड वाले मोबाइल फोन ही इस्तेमाल करेंगी। साथ ही सार्वजनिक कार्यक्रमों या पड़ोसियों के घर जाते समय स्मार्टफोन ले जाने पर भी पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई थी।
इस निर्णय के पीछे तर्क दिया गया कि स्मार्टफोन के अधिक उपयोग से बच्चों की आंखों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और सामाजिक व्यवस्था प्रभावित होती है। हालांकि यह नियम केवल महिलाओं के लिए लागू किया गया, जिससे विवाद गहरा गया और इसे भेदभावपूर्ण माना गया।
पंचायत ने दो दिन बाद लिया यू-टर्न
मामला सामने आने के बाद इसका विरोध शुरू हो गया। इसके बाद समाज के अध्यक्ष सुजानाराम चौधरी ने सफाई देते हुए कहा कि यह फैसला बच्चों की भलाई को ध्यान में रखकर लिया गया था। हालांकि विरोध को देखते हुए दो दिन बाद ही यह निर्णय वापस ले लिया गया। समाज की ओर से कहा गया कि उनका उद्देश्य किसी की स्वतंत्रता का हनन करना नहीं था।




