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खुलासा न्यूज, बीकानेर।  शिक्षा का अधिकार (RTE) के तहत राज्य के करीब 38 हजार स्कूलों में पढ़ रहे आठ लाख बच्चों की फीस सरकार देती है। शिक्षा विभाग ने उन बच्चों की कोरोनाकाल में हुई ऑनलाइन पढ़ाई का रिकाॅर्ड मांगा है। हर स्कूल से पूछा जा रहा है कि उन्होंने ऑनलाइन में क्या पढ़ाया? इसी सवाल पर निजी स्कूल संचालक भड़क गए हैं। प्राइवेट स्कूल्स ने शिक्षा विभाग के पोर्टल पर आवेदन करने से ही इनकार कर दिया है। उधर, शिक्षा विभाग ने शनिवार शाम एक आदेश जारी कर अंतिम तिथि को 15 मई से बढ़ाकर 22 मई कर दिया है। इसी आदेश में स्पष्ट कर दिया है कि अब किसी ने रिपोर्ट नहीं किया तो भौतिक सत्यापन नहीं होगा, फीस का भुगतान भी नहीं होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को भुगतान के आदेश दिए थे, लेकिन अब यह नई व्यवस्था लागू होने से स्कूल संचालक नाराज है। साथ ही प्रदेश के कई विधायकों ने भी खुलकर प्राइवेट स्कूल्स के समर्थन में मुख्यमंत्री को पत्र लिखे हैं। उधर, शिक्षा विभाग ने कहा है कि ऑनलाइन पढ़ाई की जानकारी नहीं देने वाले स्कूल को सेशन 2020-21 का फीस पेमेंट नहीं होगा। आज आवेदन की लास्ट डेट को 22 मई तक के लिए बढ़ा दिया गया है। यह अंतिम अवसर है।

ये पूछा है शिक्षा विभाग ने?
शिक्षा विभाग प्राइवेट स्कूल्स से सिर्फ ये पूछ रहा है कि आपने बच्चों को ऑनलाइन कैसे पढ़ाया? किसी ऐप के माध्यम से लाइव क्लासेज ली या फिर किसी सोशल नेटवर्किंग का उपयोग किया है। स्कूल्स से सभी बच्चों के ई-मेल आईडी व मोबाइल नम्बर भी मांगे गए हैं, ताकि स्कूल के दावे का सत्यापन हो सकें।

ये है विरोध
प्राइवेट स्कूल संचालकों का कहना है कि कोरोना काल में सक्षम स्कूलों ने ऑनलाइन क्लास लगाई है। वो हिसाब भी दे सकते हैं लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में स्थित जिन स्कूलों में नेट सुविधा ही नहीं है, वो कैसे ऑनलाइन क्लास चलाते? इन स्कूल शिक्षकों को भुगतान भी अब तक बकाया है। जब तक सरकार फीस नहीं देगी, टीचर्स को भुगतान कैसे मिलेगा।