
महिला से मारपीट के सात साल पुराने मामले में पुलिस की लापरवाही पर न्यायालय ने सख्त रुख दिखाया





महिला से मारपीट के सात साल पुराने मामले में पुलिस की लापरवाही पर न्यायालय ने सख्त रुख दिखाया
बीकानेर। कोटगेट थाने में महिला से मारपीट के सात साल पुराने मामले में न्यायालय ने पुलिस की लापरवाही पर सख्त रुखदिखाया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रमेश ढालिया ने कोटगेट पुलिस को अग्रिम अनुसंधान कर 3 नवंबर, 2025 को न्यायालय मेंनतीजा रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं।मामला यह है वर्ष 2017 में कोटगेट थाने में रेखा कुमारी की मर्ग दर्ज हुई थी। जांच एएसआई महेशदान कर रहे थे। रेखा ने लव मैरिज की थी औरउनके दो बच्चे थे।रेखा के पीहर वाले सरोज व उसकी बहन के घर पर बच्चों के बारे में पता कर रहे थे, जो नहीं मिले। तब रेखा के पीहर वाले नितिनगोयल नामक व्यक्ति के साथ थाने आ गए और सरोज को फोन कर थाने बुला लिया। परिवादी सरोज ने आरोप लगाया कि उसे एएसआई ने नितिन गोयल के माध्यम से फोन कर पूछताछ के लिए थाने बुलाया।यह लगाया आरोपथाने में एएसआई महेशदान व तीन अन्य महिला पुलिस कर्मचारियों ने पूछताछ के नाम पर उसके साथ फट्टे व डंडे से मारपीट की।उसे हवालात में बंद कर दिया। बाद में उसे अधमरी हालत में बाहर निकाल दिया।पीडि़ता ने एएसआई व तीन महिला पुलिस कर्मचारियों एवं द्वारकाप्रसाद अग्रवाल के खिलाफ कोटगेट थाने में शिकायत दी, लेकिनपुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया। ऐसे में पीडि़ता को न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।
पुलिस ने मान ली झूठी रिपोर्टपीडि़ता की शिकायत पर मामला दर्ज करने की बजाय कोटगेट पुलिस ने इसे झूठा मानते हुए न्यायालय में अंतिम प्रतिवेदन (एफआर) पेश कर दिया। इसमें न तो यह स्पष्ट किया गया कि महिला को थाने किसने बुलाया, न ही मारपीट करने वाली महिलापुलिसकर्मियों की पहचान कराई गई।कोर्ट की टिप्पणीन्यायालय ने माना कि पुलिस ने आधी-अधूरी जांच कर एफआर पेश की है। अदालत ने साफ कहा कि द्वारकाप्रसाद पर लगे मारपीटके आरोपों की भी जांच नहीं की गई, न ही चोटों की पुष्टि हुई। इसलिए पुलिस को नए सिरे से अनुसंधान कर रिपोर्ट पेश करनी होगी।

