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स्कूली शिक्षक पढ़ा रहे है बीएड, एमएड के विद्यार्थियों को

बीकानेर। प्रदेश के दो राजकीय बीएड कॉलेजों मे नियम के विरुद्व स्कूली शिक्षकों के पढ़ाने के आरोप लगाए गए है। इन दो कॉलेजों में एक राजकीय अध्ययन शिक्षा संस्थान अजमेर और दूसरा कॉलेज राजकीय अध्ययन शिक्षा संस्थान बीकानेर शामिल है। इस संबंध में एक याचिकाकर्ता ने जोधपुर हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। कोर्ट ने इस याचिका पर दोनों संस्थानों के साथ ही राज्य सरकार एनसीटीई और दोनों यूनिवर्सिटी को नोटिस जारी किए है। कोर्ट ने एनसीटीई से पूछा है कि इस मामले में अब तक क्या कार्रवाई की है। याचिकाकर्ता जितेंद्र शर्मा ने बताया कि राजकीय अध्ययन शिक्षा संस्था अजमेर और बीकानेर में स्कूुली शिक्षकों को बीएड, एमएड पढ़ाने का जिम्मा दे रखा है। यहां तक कि इन शिक्षकों को पीएचडी कराने के लिए गाइड तक बना दिया गया है। जितेंद्र शर्मा ने कोर्ट में तर्क दिया कि इन कॉलेजों में यूजीसी और एनसीटीई के नियमों के खिलाफ ही शिक्षकों लगाया गया है। उच्च शिक्षा पढ़ाने और पीएचडी कराने के लिए कम से कम असिस्टेंट प्रोफेसर होना जरुरी है लेकिन इन दोनों कॉलेजों में स्कूल के रीडर रैंक के शिक्षक ही पीएचडी तक करा रहे है। शर्मा ने बताया कि पीएचडी कराने के लिए प्रोफेसर एसोसिएट प्रोफेसर  के साथ ही कुछ अन्य नियम और शर्तें भी पूरी करना जरुरी है लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं करते हुए यूजीसी और एनसीटीई के नियमों के खिलाफ ही यह संस्थाएं संचालित हो रही है।
कोर्ट ने दिया नोटिस
राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रवीन्द्र भट और अशोक कुमार गौड़ की खंडपीठ ने इस याचिका को मंजूर करते हुए राजकीय अध्ययन शिक्षा संस्था बीकानेर के अलावा राज्य सरकार के प्रमुख शासन सचिव स्कुल शिक्षा प्रमुख शासन सचिव, आयुक्त कॉलेज शिक्षा, निदेश माध्यमिक शिक्षा, एमडीएस यूनिवर्सिटी अजमेर, महाराजा गंगा सिंह यूनिवसिटी और एनसीटीई के क्षेत्रीय निदेशक को भी नोटिस भेजा है।
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