आत्मदाह से पहले बोला था- करो या मरो, वीडियो सरकार ने लिमिट क्रॉस कर दी, अब एक ही रास्ता बचा - Khulasa Online

आत्मदाह से पहले बोला था- करो या मरो, वीडियो सरकार ने लिमिट क्रॉस कर दी, अब एक ही रास्ता बचा

भरतपुर। भरतपुर के पसोपा में 20 जुलाई को आत्मदाह करने से पहले बाबा विजय दास ने एक इंटरव्यू दिया था। वीडियो अब सामने आया है। वीडियो 17-18 जुलाई का बताया जा रहा है। वीडियो में संत ने कहा कि सरकार ने सारी सीमाएं पार कर दी हैं, अब एक ही रास्ता बचा है। करो या मरो। बाबा विजय दास का एक और वीडियो सामने आया है। जिसमें संतों के साथ वे नारे लगा रहे हैं, कह रहे हैं- देश की रक्षा कौन करेगा, हम करेंगे। बाबा विजय दास पसोपा के पशुपतिनाथ मंदिर के महंत थे। 16 जनवरी 2021 से आदिबद्री और कनकांचल पर्वत पर खनन रोकने के लिए पसोपा में चल रहे आंदोलन में बाबा विजय दास शामिल थे। बाबा विजय दास ने 20 जुलाई को आत्मदाह किया था। 23 जुलाई को उनका निधन हो गया था। इससे पहले उन्होंने कहा था कि सरकार आश्वासन पर आश्वासन दे रही है। अब सीमाएं क्रॉस हो गई हैं। अब करो या मरो के हालात पैदा हो गए हैं। बाबा विजय दास ने 20 जुलाई को आत्मदाह किया था। 23 जुलाई को उनका निधन हो गया था। इससे पहले उन्होंने कहा था कि सरकार आश्वासन पर आश्वासन दे रही है। अब सीमाएं क्रॉस हो गई हैं। अब करो या मरो के हालात पैदा हो गए हैं। बार-बार आश्वासन से परेशान थे 4 जुलाई को बाबा हरिबोल दास ने सीएम आवास के बाहर आत्मदाह की चेतावनी दी थी। इस पर 18 जुलाई को मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने हरिबोल दास को आश्वासन देकर आत्मदाह स्थगित करवा दिया था। माना जा रहा है कि बार बार मिल रहे आश्वासन से बाबा विजय दास परेशान और विचलित थे। वीडियो में उन्होंने कहा था- एक संत आंधी तूफान बारिश सब कुछ झेल सकता है, लेकिन पहाड़ों को टूटते नहीं देख सकता। वीडियो में कहा कहा बाबा विजय दास ने शनिवार को सामने आए वीडियो में बाबा विजय दास ने कहा था- हम ये कहना चाहते हैं कि इन्होंने सारी सीमाएं क्रॉस कर दीं...अब बस एक ही रास्ता बचा है...डू ओर डाई...करो या मरो...इसके आगे न कुछ कहना है न सुनना है। ये सरकार ने बखेड़ा खड़ा कर दिया। सिर्फ बाबा हरिबोल ही नहीं, सभी साधु-संत, यहां के लोग भी तैयार हैं। जब बाबा ही नहीं रहेंगे तो पसोपा क्या रहेगा... बाबा विजय दास के शनिवार को दो वीडियो सामने आए जो आत्मदाह से पहले के हैं। वीडियो में वे संतों के साथ नारा लगा रहे हैं- देश की रक्षा कौन करेगा, हम करेंगे। बाबा विजय दास के शनिवार को दो वीडियो सामने आए जो आत्मदाह से पहले के हैं। वीडियो में वे संतों के साथ नारा लगा रहे हैं- देश की रक्षा कौन करेगा, हम करेंगे। बाबा ने गुस्से में सरकार पर आरोप लगाया, आगे कहा- इन्होंने सीमा क्रॉस कर दी, हद कर दी। आश्वासन पर आश्वासन दिया...और कुछ है ही नहीं। एक महीना, कोरोना, आचार संहिता सब हम पर ही लागू है...16 जनवरी 2021 से आंदोलन कर रहे हैं...आंधी तूफान बारिश सहना संत का काम है, लेकिन पहाड़ टूटते देखना संत का काम नही हैं..हम अब किसी से कुछ नहीं कहता चाहते, अब तो करेंगे और प्रशासन खड़ा तमाशा देखेगा...अब एक ही रास्ता बचा है, सब रास्ते प्रशासन ने बंद कर दिए...करो या मरो..जय श्री राधे। बाबा विजय दास ने 20 जुलाई को खुद को पसोपा में आग लगाई। 23 जुलाई को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में उनका निधन हो गया। बरसाना के मान मंदिर की गोशाला में उनका अंतिम संस्कार हुआ। 16 साल की पोती दुर्गा ने अंतिम दर्शन किए। बाबा विजय दास ने 20 जुलाई को खुद को पसोपा में आग लगाई। 23 जुलाई को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में उनका निधन हो गया। बरसाना के मान मंदिर की गोशाला में उनका अंतिम संस्कार हुआ। 16 साल की पोती दुर्गा ने अंतिम दर्शन किए। चेतावनी को हल्के में लिया बाबा विजय दास ने आत्मदाह की चेतावनी दी थी। प्रशासन और सरकार से वार्ता के बाद बाबा हरिबोल ने आत्मदाह को स्थगित कर दिया। वार्ता को 12 घंटे भी नहीं हुए थे कि बाबा नारायण दास 19 जुलाई की सुबह टावर पर चढ़ गए। प्रशासन तब भी नहीं चेता। लॉ-एन-ऑर्डर को देखते हुए मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात था। बाबा नारायण दास के टावर पर चढऩे के बाद भी अधिकारियों ने मौके पर जाकर वार्ता नहीं की, 20 जुलाई की दोपहर बाबा विजय दास ने आत्मदाह कर लिया। 23 जुलाई की रात करीब 2 बजे बाबा विजय दास ने दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में आखिरी सांस ली। वीडियो सामने आने के बाद बरसाना के संतों की धमकी बाबा विजय दास का वीडियो सामने आने के बाद बरसाना के संत गोपेश बाबा का बयान आया है। गोपेश बाबा ने आत्मदाह के बाद खनन मामले की जांच पर सवाल उठाए। कहा- जांच के नाम पर मजाक चल रहा है...जांचकर्ता कहां आ रहा है, क्या कर रहा है, इसकी संतों को कोई जानकारी नहीं..हमें सभी आरोपियों के नाम बता रहे हैं...लेकिन जांच करने वाले कहां जा रहे हैं..पता नहीं। बरसाना के संत गोपेश बाबा ने राजस्थान सरकार को धमकी दी है। कहा कि अगर मामले की सीबीआई जांच नहीं हुई और आदिबद्री व कनकांचल से तुरंत क्रेशर नहीं हटाए तो परिणाम बहुत गंभीर होंगे। यह आग आप झेल नहीं पाएंगे। बरसाना के संत गोपेश बाबा ने राजस्थान सरकार को धमकी दी है। कहा कि अगर मामले की सीबीआई जांच नहीं हुई और आदिबद्री व कनकांचल से तुरंत क्रेशर नहीं हटाए तो परिणाम बहुत गंभीर होंगे। यह आग आप झेल नहीं पाएंगे। गोपेश बाबा ने कहा कि बाबा विजय दास के अंदर एक ज्वालामुखी था, जो फट पड़ा। गोपेश बाबा ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर आरोप लगाया, कहा- आप आरोपियों का संरक्षण कर रहे हैं, सीबीआई की जांच बिठाएं, उन लोगों का संरक्षण मत दीजिए, जांचकर्ता अपने बॉस की जांच नहीं करेगा, वे तो उन्हीं के इशारों पर नाचते हैं। गोपेश बाबा ने चेतावनी दी कि मामले की सीबीआई जांच नहीं हुई और खनन रोक कर तुरंत वनक्षेत्र घोषित नहीं किया तो परिणाम बहुत बुरा होगा। 21 जुलाई को सरकार ने वनक्षेत्र घोषित करके सिर्फ खाना पूर्ति की है। खनन कर्ता सरकार व कोर्ट को मैनेज कर रहे हैं, स्टे लगा तो दोबारा वही स्थिति हो जाएगी, वे लोग पैसों के बल पर सब खरीद लेंगे। क्रेशर दोबारा शुरु हो जाएंगे। क्रेशर हटाइये, संरक्षित वन क्षेत्र घोषित कीजिए, वरना परिणाम ठीक नहीं होंगे..ये आग आप झेल नहीं पाएंगे। बीजेपी बोली- जिला प्रशासन, मंत्रियों पर सख्त कार्रवाई हो भरतपुर जिला के बीजेपी अध्यक्ष शैलेश सिंह ने कहा कि बाबा विजय दास ने मजबूर होकर आत्मदाह किया था। उन्होंने साफ कहा कि हालत करो या मरो की आ गई है। सरकार आश्वासन पर आश्वासन देती रही। इसमें मंत्री व जिला प्रसासन की लापरवाही है। इतनी बड़ी चेतावनी के बाद भी प्रशासन ने कोई एक्शन नहीं लिया, बल्कि आत्मदाह के बाद उस जगह पर सबूतों को नष्ट कर दिया। उस स्थल को जोत दिया। जांच से पहले सबूत नष्ट क्यों किए गए। सीएम जिला प्रसासन और मंत्रियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें। आदिबद्री और कनकांचल में खनन खत्म करने के लिए संत समाज 550 दिन से धरना दे रहा था। 21 जुलाई को मुख्यमंत्री ने दोनों इलाकों में खनन पूरी तरह बंद करने और वनक्षेत्र घोषित करने का आदेश जारी कर दिया। संत कह रहे हैं कि यह आदेश सिर्फ खाना पूर्ति है। आदिबद्री और कनकांचल में खनन खत्म करने के लिए संत समाज 550 दिन से धरना दे रहा था। 21 जुलाई को मुख्यमंत्री ने दोनों इलाकों में खनन पूरी तरह बंद करने और वनक्षेत्र घोषित करने का आदेश जारी कर दिया। संत कह रहे हैं कि यह आदेश सिर्फ खाना पूर्ति है। किसी अधिकारी पर नहीं हुई कोई कार्रवाई बता दें कि बाबा विजय दास के निधन के बाद न तो लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के नाम सामने आए और न ही किसी अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई। हालांकि सीएम की तरफ से एक जांच कमेटी बनाई गई है। लेकिन संत समाज ने इस पर भी सवाल उठाए हैं।
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