रामनिवास कूकणा सबसे बेस्ट ! संघर्ष पर लगी मुहर

- कूकणा का नेतृत्व लाया रंग, एनएसयूआई ने जिले में फहराया पचरम - संघर्ष के कारण विश्वास बढ़ा -छात्र राजनीति का कुशल सारथी - रामनिवास कूकणा बीकानेर। बीकानेर छात्रसंघ चुनाव 2019-20 में एनएसयूआई ने जीत का परचम फहराया है। एनएसयूआई जिलाध्यक्ष रामनिवास कूकणा के नेतृत्व में एनएसयूआई ने श्रीडूंगर महाविद्यालय, एम.एस.कॉलेज सहित कई कॉलेज में अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की है। कूकणा के संघर्ष पर विधार्थियों ने पूरे जिले में भर के महाविद्यालयों में मुहर लगाई है। ऐसे में यह कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि जिले में छात्र राजनीति में रामनिवास कूकणा सबसे बेस्ट है। कूकणा ने 2017 में अशोक बुडिय़ा, 2018 में रामनिवास बेनीवाल, और अब 2019 में कृष्ण कुमार गोदारा डूंगर महाविधालय छात्रसंघ अध्यक्ष का चुनाव जीताया है। राजनीतिज्ञों का कहना है कि कूकणा के संघर्ष के कारण ही विद्यार्थियों का विश्वास बढ़ा है और एनएसयूआई को विजयी बनाया है।  2014 में डूंगर कॉलेज के छात्रसंघ उपाध्यक्ष के रूप में अपनी छात्र राजनीति को शुरु करने वाले कूकणा ने 2019 के छात्र संघ चुनाव में अपने पुराने साथियों की खिलाफत के बावजूद भी मैदान में बिना हथियार डटा रहा।  बतया जा रहा है कि लगातार तीन सालों से जिले में एनएसयूआई का परचम फहराने वाले जिलाध्यक्ष रामनिवास कूकणा का कद बढ़ेगा, जल्द ही कूकणा को बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।

विरोधी भी है इसके कायल

एनएसयूआई का जिलाध्यक्ष रामनिवास कूकणा ने हर-पल , हर परिस्थिति में छात्र हितों के लिए संघर्ष कर समस्याओं का समाधान करवाया है। चाहे शालू दुष्कर्म हत्याकाण्ड प्रकरण हो या अन्य प्रकरण हो हमेशा रामनिवास कूकणा लड़ाई लडऩे में आगे रहते है। कूकणा सब के दर्द को ना केवल समझते है बल्कि निस्तारण करवाने तक पीछे भी नहीं हटते है, चाहे किसी भी हद को पार करना पड़े। वो लड़ाई लडऩे के लिए ना पिस्तौल रखते है ना तलवार और ना ही डण्डा फिर भी लड़ाई लड़कर समस्याओं का समाधान करवाते है। कहीं ना कहीं इसी कारण विरोधी भी कायल है। जमीन से जुड़े रामनिवास कूकणा संघर्ष के दूसरा प्रयाय कहे तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।

कूकणा पर लगी मुहर, तमाम विरोधी को दिया करारा जवाब : : सारस्वत संभाग की छात्र राजनीति की पाठशाला डूंगर कॉलेज में तीन साल से एनएसयूआई जीत रही है । इस सारी कहानी का कोई शिल्पकार है तो वो है एनएयूआई के जिलाध्यक्ष रामनिवास कूकणा। अपने पुराने साथियों की खिलाफत के बावजूद विजयी पताका फहरा ये साबित कर दिया कि छात्र राजनीति का सिरमौर कौन है और इसके साथ ही कूकणा के संघर्ष पर विधार्थियों ने पूरे जिले में भर के महाविद्यालयों में मुहर लगा उनके तमाम विरोधियों को करारा जवाब भी दिया है । - महिपाल सारस्वत, युवा नेता, कांग्रेस

  संघर्ष की गाथा बीकानेर के एक छोटे से गांव पेमासर में एक किसान परिवार मे कूकणा का जन्म हुआ । इनके पिता कृषि कार्य करते है। अनेक विपत्तियों के बाद भी कूकणा ने उच्च शिक्षा में अच्छे अंक प्राप्त कर राजकीय डूंगर महाविद्यालय बीकानेर मे प्रवेश लिया।  कॉलेज जाने पर पता चला कि जहां पैर रखो वहीं समस्या ही समस्या नजर आई। इस पर अमल करते हुए उक्त समस्याओं का समाधान करने का प्रयास किया।  साथ ही महाविद्यालय मे व्याप्त बुराईयों के खिलाफ अपनी अवाज बुलंद करते रहे। संघर्ष को अपने जीवन का सिद्धांत बना लिया।   महाविद्यालय मे सीटे बढाने, विषय परिवर्तन के लिए तारिख बढाने को लेकर लगातार आन्दोलन करते रहे है ओर इनके प्रयासो के कारण छात्रो को बेहतर सुविधाऐ भी मिलने लगी है। आज दिनांक तक कूकणा डूंगर महाविद्यालय सहित बीकानेर की तमाम कॉलेजों मे सक्रिय रहकर संघर्ष कर रहे है।  कई आरोप लगे, लेकिन जांच में हुए थे बेदाग साबित   बता दें कि पिछले दिनों रामनिवास कूकणा पर कुछ लोगों ने तीसरे मोर्चे में शामिल होने सहित कई गंभीर का आरोप लगाए थे। इन आरोपों के बीच एनएसयूआई संगठन ने इस मामले की गंभीर रूप से जांच कराई। इस जांच में संगठन के पदाधिकारियों ने कुकणा पर लगे आरोपों को गलत पाया गया। बेदाग साबित होने पर पदाधिकारियों ने रामनिवास कूकणा को फिर से एनएसयूआई के जिलाध्यक्ष का कार्यभार सौंपा। छात्रों के हित में जा चुके है जेल फीस वृद्धि के मामले को लेकर कूकणा ने काफी प्रयास किया, लेकिन एमजीएसयू प्रशासन ने कोई सुनवाई नहीं की। सुनवाई न होने पर कूकणा के नेतृत्व में छात्र-छात्राओं ने उग्र प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज करते हुए छात्र नेता कूकणा को गिरफ्तार कर जेसी करवा दिया। चार दिन तक कूकणा जेल में रहे। इस दौरान जेल में कूकणा के साथ देशद्रोहियों जैसा बर्ताव किया गया। इसके बाद भी कूकणा आज भी छात्र हितों की लड़ाई लड़ रहे है। कूकणा का कहना है कि हम छात्र हित के लिए यूं ही संघर्ष करते रहेंगे। चाहे सरकार लाठीचार्ज कराए या फिर गिरफ्तारी । हितों के लिए मरते दम तक लड़ाई करते रहेंगे।    
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