गहलोत सरकार की नौकरशाही में बड़े बदलाव की तैयारी,आधा दर्जन से ज्यादा कलेक्टर को भी किया जाएगा इधर- उधर - Khulasa Online

गहलोत सरकार की नौकरशाही में बड़े बदलाव की तैयारी,आधा दर्जन से ज्यादा कलेक्टर को भी किया जाएगा इधर- उधर

जयपुर। अपनी सरकार की तीसरी वर्षगांठ से पहले राज्य की गहलोत सरकार नौकरशाही में बड़े स्तर पर तबादला करने की तैयारी में है। शीर्ष स्तर पर आईएएस-आईपीएस और आरएएस अधिकारी की तबादला सूची को लेकर मंथन चल रहा है। सूत्रों का कहना है कि इस महीने के अंत तक आईएएस-आईपीएस और आरएएस अधिकारियों की जगह तबादला सूची जारी हो सकती है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपने विश्वस्त शीर्ष अधिकारियों के साथ तबादला सूची में शामिल किए जाने वाले नामों को लेकर मंथन कर रहे हैं और जल्द ही सूची को अंतिम रूप भी दिया जा सकता है। जानकारों की मान तो बड़े स्तर पर नौकरशाही को तबादलों के जरिए सरकार उन्हें सख्त संदेश भी देना चाहेगी कि सरकार के तीन साल के कार्यकाल के बाद भी प्रदेश में सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर जनता में नहीं है। निकाय चुनावों, पंचायतों और उपचुनाव में जनता ने सरकार के कामकाज पर मुहर लगाई है। ऐसे में अधिकारियों के पास जनता के काम से आने वाले कांग्रेस के जनप्रतिनिधियों को महत्व देना कम नहीं करें। 17 दिसंबर को होंगे सरकार के 3 साल पूरे गहलोत सरकार के 17 दिसंबर 2021 को 3 साल पूरे हो जाएंगे। चर्चा यह भी है कि अपनी सरकार के 3 साल पूरे होने के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल फेरबदल और विस्तार कर सकते हैं। ऐसे में मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले नए मंत्रियों के लिहाज से भी अधिकारियों को इधर-उधर किया जाएगा। मिशन 2023 पर फोकस सूत्रों की माने तो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का पूरा फोकस अब मिशन 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर है। ऐसे में सरकार अपने फ्लैगशिप योजनाओं, सरकार की उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाने की तैयारियों में जुटी हुई है । यही वजह है कि तमाम अधिकारियों को भी फील्ड में उतरने का निर्देश दिए गए। आधा दर्जन से ज्यादा कलेक्टर भी होंगे इधर-उधर बताया जाता है कि तबादला सूची में आधा दर्जन से ज्यादा कलेक्टर्स भी इधर-उधर किए जा सकते हैं। दरअसल इसकी एक वजह यह भी है कि सरकार की ओर से शुरू किए गए प्रशासन गांवों के संग और शहरों के संग अभियान के तहत कई जिलों की प्रगति रिपोर्ट से मुख्यमंत्री खुश नहीं है और समीक्षा बैठकों में भी मुख्यमंत्री इसे लेकर अपनी नाराजगी भी जाहिर कर चुके हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री की नाराजगी का खमियाजा कई जिला कलेक्टर्स को उठाना पड़ सकता है।

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