पीबीएम अस्पताल के ठेकेदारों पर अफसर मेहरबान

बीकानेर। एक ओर तो राज्य सरकार आमजन को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के दावे कर रही है। वहीं दूसरी ओर संभाग के सबसे बड़े पीबीएम अस्पातल में सरकार के दावे खोखले साबित हो रहे है। जिसका बड़ा कारण पीबीएम अस्पताल प्रशासन की ठेकेदार पर मेहरबानी है। अस्पताल में ठेकेदारों की लचर प्रणाली का कारण न तो निशुल्क दवा योजनाओं में पर्याप्त दवाएं नहीं मिल रही है और न ही राजलक्ष्मी योजना का प्रसूताओं का लाभ। बताया जा रहा है कि निशुल्क दवा योजना में बारह लाख से ज्यादा ऑनलाईन पर्चियों के नहीं चढऩे से सरकार की ओर से मिलने वाले दवाईयों का स्टॉक की रिपोर्ट भेजी नहीं जा रही है। यहीं नहीं जो पर्चियां ऑनलाईन चढ़ रही है,उनका इन्द्राच सही नहीं होने से स्टॉक मिल नहीं रहा है। जिसके चलते अस्पताल में दवाईयों की उपलब्धता नहीं है। मजबूरन रोगियों के परिजनों को बाहर से मंहगी दवाईयां मंगवानी पड़ रही है। इतना ही नहीं ठेका एक जगह का लगाएं जगह जगह टेंट हालात ये है कि पीबीएम अधीक्षक की मेहरबानी के चलते अस्पताल की एक कैंटीन का ठेका लेने वाले को मुनाफा दिलाने के लिए जगह-जगह खोखे और टेंट लगाकर दुकानें लगाने की छूट दे रखी है। पार्किंग से लेकर सड़क किनारे रखे खोखों और टेंट में खाद्य पदार्थ बेचने की लगी दुकानों को देखकर सब हैरान है। पीबीएम परिसर में जनाना अस्पताल, हॉर्ट हॉस्पिटल, आपातकालीन एवं यूरोलॉजी साइंसेज सेंटर के पास खोखे लगाकर खाद्य सामग्री बेची जा रही है। जब अस्पताल प्रशासन से इनके बारे में पूछा गया तो जवाब मिला यह खोखे (ठेले) अनाधिकृत नहीं है। अस्पताल प्रशासन ने ठेकेदार को स्वीकृति दी है। इसके पीछे तर्क दिया कि मुख्य कैंटीन में ग्राहक कम पहुंच रहे हैं। जिससे कैंटीन संचालन को घाटा हो रहा है। कैंटीन संचालन को फायदा दिलाने के लिए उसे सब कैंटीनें खोलने, ठेले लगवाने के लिए छूट दे रखी है। ठेकेदार की चिंता, मरीजों की नही अस्पताल प्रशासन को मरीजों से ज्यादा चिंता ठेकेदार की है। नियमानुसार कैंटीन पर बिकने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, दरें तय होती है। अब जगह-जगह ठेले लगाने से उन पर बेचे जा रहे सामान और दरों की निगरानी नहीं रहती। साथ ही अस्पताल परिसर में अव्यवस्था फैल रही है वह अलग। ब्लैक लिस्टेड की चेतावनी के बाद भी बढ़ाई कार्य अवधि मजे की बात ये है कि निशुल्क दवा योजना की ऑनलाईन पर्चियां चढ़ाने का काम देख रही फर्म को पांच माह ब्लैक लिस्टेड करने की चेतावनी दी पीबीएम अधीक्षक डॉ पी के बेरवाल ने दी थी। उसी ठेकेदार का ठेका दो माह की अवधि के लिये बढ़ा दिया गया। ठेके की अवधि को बढा़ए एक माह होने को है फिर भी हालात जस के तस बने हुए है। आज भी लाखों की संख्या में पर्चियां ऑनलाईन नहीं हो सकी है। फिर भी अस्पताल इस फर्म के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की है। जानकारी मिली है कि अधीक्षक ने अपने एक चहेते ठेकेदार को वेलफेयर सोसायटी के माध्यम से ऑनलाईन पर्चियां चढ़ाने का काम दे दिया। जिससे सरकार को दोहरा राजस्व का नुकसान हुआ है। ठेके पर लगे कार्मिकों को भुगतान नहीं जानकारी मिली है कि अलग अलग ठेके कार्यों में लगे कार्मिकों को नियमित रूप से वेतन भी नहीं मिल रहा है। जिसकी अनेक बार शिकायत करने के बाद भी अधीक्षक के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। बल्कि अस्पताल प्रशासन को तो इन ठेके दारों के नुकसान नहीं होने की चिंता सताती रहती है।
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