कक्षा 1 से 5वीं तक सोमवार को स्कूल खोलने को लेकर आ रही है नई गाइडलाइन - Khulasa Online

कक्षा 1 से 5वीं तक सोमवार को स्कूल खोलने को लेकर आ रही है नई गाइडलाइन

बीकानेर। राज्य सरकार के निर्देश के बाद शिक्षा विभाग छोटे बच्चों के लिए स्कूल खोलने की तैयारी में जुट गया है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक सौरभ स्वामी की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए विभागीय अधिकारियों की बैठक होगी जिसमें स्कूल फिर से खोले जाने की गाइडलाइन तय की जाएगी। कोरोना के कारण घर में बंद पहली से पांचवीं कक्षा तक के बच्चे भी एक बार फिर स्कूल का रुख करेंगे। 27 सितंबर से इन बच्चों के लिए स्कूल खुल जाएंगे। छोटे बच्चों के लिए स्कूल खोलने की तैयारी में जुट गया है। शुक्रवार को की अध्यक्षता में तय की जाएगी, साथ ही अगले कुछ माह में किए जाने वाले कार्यों को लेकर चर्चा होगी। बैठक में ना केवल स्कूल फिर से खोले जाने की कार्ययोजना बनाई जाएगी बल्कि स्माइल 3.0 और साप्ताहिक क्विज की प्रगति, प्रथम परख की प्रगति, पाठ्यपुस्तक और वर्कबुक वितरण, 2 अक्टूबर 2021 को महात्मा गांधी संस्कार विचार परीक्षा 2019 के पुरस्कार वितरण की तैयारी को लेकर भी निर्णय जाएगा। इसके साथ ही शाला सम्बलन अभियान के तहत विभागीय अधिकारियों को स्कूलों का निरीक्षण करने के निर्देश भी दिए जाएंगे और वर्तमान में नामांकन अभिवृद्धि पर चर्चा होगी। बैठक में समसा से जुड़े अधिकारियों के साथ ही सभी संभागीय संयुक्त निदेशक स्कूल शिक्षा, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी, पीईईओ और यूसीईईओ शामिल होंगे। गौरतलब है कि कोविड के कारण राज्य सरकार ने 22 मार्च 2020 को प्रदेश में लॉकडाउन करने का निर्णय लिया था। जिसके बाद से पहली से पांचवीं तक के बच्चों के स्कूल बंद थे।हालांकि बड़ी कक्षा के विद्यार्थियों को स्कूल बुलाया गया था लेकिन छोटे बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उनके स्कूल नहीं खोले गए लेकिन अब कोविड को लेकर स्थिति में सुधार आने के बाद सरकार ने इनके स्कूल भी एक बार फिर से खुले किए जाने का निर्णय लिया है। विरोध में अभिभावक हालांकि सरकार के इस निर्णय का अभिभावक विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि कोविड की तीसरी लहर आने की संभावनाएं लगातार जताई जा रही हैं ऐसे में सरकार स्कूल खोलने का फैसला ले रही है जो बच्चों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है। अभिभावकों का यह भी कहना है कि सरकार ने छठीं से 12वीं तक के बच्चों के लिए स्कूल खोले हैं लेकिन उनमें भी विद्यार्थियों की उपस्थिति 50 फीसदी तकभ् भी नहीं पहुंच पाई ऐसे में हम अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे।

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