अवैध होर्डिंस मामला:बिना लेखे जोखे के हवा में तीर चला रहा निगम - Khulasa Online

अवैध होर्डिंस मामला:बिना लेखे जोखे के हवा में तीर चला रहा निगम

खुलासा न्यूज,बीकानेर। पिछले दो साल से विवादों में उलझे नगर निगम में विवाद खत्म होने का नाम तक नहीं ले रहे है। कभी गौशालाओं के अनुदान को लेकर तो कभी महापौर के पति द्वारा गौसेवक को धमकाने के मामले से सुर्खियों में बने नगर निगम में फिर अवैध होर्डिंग तोडऩे का मामला गर्मा गया है। इसको लेकर जहां कांग्रेसी पार्षदों ने अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी दी है तो होर्डिंग ठेकेदार ने तोड़े गये वैध होर्डिंस का हर्जाना मांगा है। अंदरखाने की बात तो यह है कि कुछ पार्षद अपने एरिया में हार्डिंस ठेकेदार से निशुल्क हार्डिंस लगाने को लेकर निगम आयुक्त पर दबाब बना रहे है और शिकायतें कर अवैध होर्डिंग्स हटाने को कह रहे है। जिसके बाद निगम आयुक्त ने आनन फानन में यह कार्यवाही कर दी। जब हार्डिग्स ठेेकेदार ने निगम की ओर से दी गई अनुमति और डीएलबी के आदेशों का हवाला दिया तो अधिकारियों ने भी माना भी उनसे गलती हुई है। जिसके बाद एक बारगी कार्यवाही रोक दी गई। मजे की बात तो यह है कि होर्डिंग जोन संख्या तीन ठेका बिना नवीनीकरण में कुल 44 साइटस ठेकेदार द्वारा चलाई जा रही है। जो पिछले कई महीनों से विज्ञापन प्रदर्शन कर रहा है। जिसका नगर निगम ना कोई टेण्डर कर रहा है। यहीं नहीं पोल कियोस्क के ठेके का भी नवीनीकरण नहीं हो रखा है। जिसकी पिछले वर्ष की लाखों की बकाया राशि होने पर भी और अवधि समाप्त होने के एक साल बाद भी निगम उस पर कोई कार्यवाही नहीं कर रहा है। इतना ही नहीं सैकड़ों अवैध प्राइवेट साइटस बेडक संचालित हो रही है। जिसका निगम की ओर ध्यान ही नहीं है। बिना अनुमति के चल रहे ई रिक्शा मंजर यह है कि नगर निगम क्षेत्र में विज्ञापन प्रदर्शन के लिये सिर्फ एक ही ई रिक्शा ने अनुमति ले रखी है। लेकिन सैकड़ों ई रिक्शा बिना किसी रोक टोक के शहर के प्रमुख चौराहों पर खड़ी रहती है। जिस पर पिछले कई सालों में एक भी कार्यवाही निगम की ओर से नहीं की गई है। दीवारों व सरकारी पोलों पर भी हार्डिंस व अवैध विज्ञापन प्रदर्शन का गौरखधंधा परवान पर है। जिन पर कार्यवाही करना निगम के बूते से बाहर प्रतीत हो रहा है। कलक्टर के आदेश महज कागजी हालात यह है कि एक ओर तो जिला कलक्टर चौराहों व प्रमुख मार्गों पर अवैध हार्डिंस हटाने के आदेश दे रखे है। किन्तु निगम के पास इसका कोई लेखा जोखा नहीं है। जिसके चलते इन पर कार्यवाही नहीं हो पा रही है।

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