सिफारिश पर लगे एसएचओ को कैसे हटाएंगे एसपी ?

- सीएम ने दे दी छूट मगर बीकानेर। आपराधिक वारदातों को कम करने और कानून व्यवस्था बनाए रखने के पक्षधर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजनीति करने वाले और आम जनता की सुनवाई नहीं करने वाले थानाधिकारियों को हटाने की छूट जिला पुलिस अधीक्षकों को दे दी है। गहलोत ने पुलिस विभाग की समीक्षा बैठक में साफ हिदायत दे दी है कि जनता की सुनवाई नहीं करने वाले एसएचओ को थाने से हटा दिया जाए। मुख्यमंत्री की मंशा पर किसी को संदेह नहीं है। यकीनन वह हालात को सुधारना चाहते हैं लेकिन बड़ा सवाल यह है कि पुलिस थानों मेंं जितने भी एसएचओ नियुक्त हैं, सबकी नियुक्तियां मंत्रियों और विधायकों की सिफारिश पर होती है। जिन एसएचओ को राजनेताओं का वरहस्त प्राप्त है, आखिरकार उन्हें एसपी कैसे हटा पाएंगे? मुख्यमंत्री ने जनता की सुनवाई नहीं करने वाले और काम नहीं करने वाले एसएचओ की सूची हर चार माह में भिजवाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि पुलिस महानिदेशक और गृह विभाग के अधिकारी इस रिपोर्ट की समीक्षा करें और जिस एसएचओ की भूमिका सही नहीं पाई जाए, उसे थाने से हटा दिया जाए। मुख्यमंत्री ने हालात को सुधारने और आम आदमी की सुनवाई थानों मेंं सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देश दिए हैं। अगर इन दिशा-निर्देशों की पालना हो जाए तो परिस्थितियां ठीक हो सकती हैं मगर पुलिस विभाग में जिस प्रकार राजनेताओं का दखल है, उसे देखते हुए ऐसा हो पाना संभव नहीं लग रहा है। पुलिस अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग किस प्रकार होते हैं, इससे कोई अनजान नहीं है। जिस विधानसभा क्षेत्र में जो पुलिस थाने आते हैं, उन थानों में पोस्टिंग उन्हीं पुलिस अधिकारियों को मिलती है, जो विधायक की सिफारिश करवाने में सक्षम होते हैं। मलाईदार कहे जाने वाले थानों मेंं नियुक्ति के लिए तो मंत्री तक की सिफारिश की दरकार होती है। जिले में लंबे समय से अनेक पुलिस अधिकारी टिके हुए रहे हैं। हाल मेंं चुनावों के कारण चुनाव आयोग के निर्देशों पर भले ही ऐसे पुलिस अधिकारियों का जिले से बाहर तबादला किया गया हो, अन्यथा उन्हें हटाना संभव नहीं होता। चुनाव के कारण जिन अधिकारियों को जिले से बाहर भेजा गया, वह वापसी के लिए पूरा जोर लगाए हुए हैं। उनकी वापसी राजनेताओं की डिजायर पर ही होगी। स्वाभाविक है जब कोई थानेदार किसी मंत्री या विधायक की डिजायर पर नियुक्ति पाएगा तो एसपी से ज्यादा उनके हुकुम की पालना करेगा। राजनेताओं के खासमखास लोग ही थानों में बिचौलिये की भूमिका निभाते नजर आते हैं। आम आदमी की सुनवाई ऐसे ही लोगों के कारण प्रभावित होती है। मुख्यमंत्री को पुलिस में राजनेताओं का दखल रोकने का बंदोबस्त पहले करना चाहिए। जब तक ऐसा नहीं होगा, तब कोई एसपी किसी एसएचओ को हटाने जैसा कदम नहीं उठा पाएगा। चाहे वह एसएचओ जनता को कितना ही अनदेखा करता रहे।
error: Content is protected !!