अर्जुन पर भारी पड़े गोविन्द!, हजारों की भीड़ जुटाई, बड़ा मंच सजाकर दिखाई अपनी सियासी ताकत, देखें वीडियो - Khulasa Online

अर्जुन पर भारी पड़े गोविन्द!, हजारों की भीड़ जुटाई, बड़ा मंच सजाकर दिखाई अपनी सियासी ताकत, देखें वीडियो

खुलासा न्यूज, बीकानेर। इस बार अंबेडकर जयंती पर बीकानेर में राजनीति हो रही है। एक दिन पहले केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने रेलवे ग्राऊंड में एक समारोह किया। जिसमें ग्रामीण क्षेत्र से अर्जुनराम समर्थक पहुंचे और अपना शक्ति प्रदर्शन किया। आज अम्बेडकर जयंती पर सामाजिक एकता रैली में केबिनेट मंत्री गोविन्दराम मेघवाल ने हजारों की भीड़ जुटाकर दम दिखाया और दलित जाट और मुस्लिम एकता दिखाने की कोशिश की। मंच पर गोविन्दराम मेघवाल केन्द्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल और भाजपा पर दहाड़े और कहा कि केन्द्र सरकार के खिलाफ जनता में आक्रोश है। गहलोत साहब के बजट से जनता का विश्वास बढ़ा है। उन्होंने एलान किया कि ये लोकसभा चुनाव के लिए संदेश है। साथ ही बड़ा मंच सजाकर गोविन्दराम मेघवाल ने अपनी सियासी ताकत दिखाई। बीकानेर के दोनों दलित नेताओं ने अम्बेडकर जयंती पर अपना शक्ति प्रदर्शन किया और एएसी के 23 फीसदी वोट बैंक को साधने की कोशिश की। जानकारों का कहना है कि जिले के दोनो मंत्रियों ने दलितों को जोडऩे की कोशिश की । 13 अप्रैल और 14 अप्रैल को हुए कार्यक्रम की बात की जाए तो गोविन्दराम मेघवाल जो कि अर्जुनराम मेघवाल पर भारी पड़ते नजर आए। गोविन्दराम ने हजारों की भीड़ जुटाकर और बड़ा मंच सजाकर अपनी सियासी ताकत दिखाई और लुकसभा चुनाव का संदेश भी दे दिया।

बड़ा मंच सजाकर दिखाई ताकत विधायक नरेन्द्र बुडानिया, कृष्णा पूनिया, रफीक खान, पूर्व मंत्री वीरेन्द्र बेनीवाल, नोखा नगर पालिका चेयरमैन नारयण झंवर, पूर्व विधायक मंगलाराम गोदारा, पूगल प्रधान गौरव चौहान, जिला परिषद सदस्य सरिता चौहान, दलित नेता राजेन्द्र बापेऊ, मगनाराम कड़ेली भी मौजूद रहे।

किसकी होगी चुनावी नैया पार  अर्जुनराम मेघवाल : लगातार तीन बार से सांसद हैं। माेदी की लहर के कारण उनकी जीत का अंतर भी बढ़ा है। दूसरी वजह कांग्रेस लगातार अपना उम्मीदवार बदलती रही। अब उनके पुत्र रविशेखर भी सक्रिय हो गए हैं। नजर विधानसभा चुनाव पर है। अगले साल के अंत में विधानसभा चुनाव है।

गाेविंद राम मेघवाल : जब अर्जुनराम 2009 में भाजपा में आए, उससे एक साल पहले गाेविंदराम भाजपा छाेड़ चुके थे। तब वे नाेखा से विधायक थे लेकिन परिसीमन के बाद वे खाजूवाला विधानसभा से चुनाव लड़ने लगे। 2018 में जीते ताे अब मंत्री हैं। वे अपनी बेटी को लोकसभा चुनाव लड़ाना चाहते हैं।

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