
बीकानेर में सरकारी मूंगफली खरीद सुस्त, किसान संकट में, 43 में से केवल 14 केंद्रों पर ही तुलाई शुरू




बीकानेर। सरकारी समर्थन मूल्य पर मूंगफली की खरीद प्रक्रिया जिले में बेहद सुस्त चल रही है। बीकानेर जिले में स्वीकृत 43 खरीद केंद्रों में से केवल 14 केंद्रों पर ही तुलाई शुरू हो पाई है, जबकि खरीद को शुरू हुए पांच दिन बीत चुके हैं। इस देरी के कारण किसानों को अपनी उपज 5,000 से 6,500 रुपए प्रति क्विंटल के भाव पर बेचना पड़ रहा है, जबकि सरकार ने समर्थन मूल्य 7,263 रुपए प्रति क्विंटल तय किया हुआ है।
बीकानेर की दोनों प्रमुख मंडियों — गंगानगर रोड और पूगल रोड — में प्रतिदिन करीब ढाई लाख बोरी मूंगफली की आवक हो रही है। लेकिन सरकारी खरीद की सुस्ती के चलते किसानों को प्रति बोरी 450 से 600 रुपए तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
मंडियों में भीड़ और अव्यवस्था
ढाई लाख बोरी की रोजाना आवक से मंडियों में अफरा-तफरी मची हुई है। तुलाई और उठाव कार्य बुरी तरह प्रभावित हैं। किसान मंडी के बाहर घंटों कतारों में फंसे रहते हैं। कई जगह मूंगफली का उठाव तक नहीं हो पा रहा। मंदी और खरीद में देरी से किसान और व्यापारी दोनों परेशान हैं।
29 केंद्रों पर नहीं शुरू हुई तुलाई
बज्जू, कोलायत, नोखा, लूणकरणसर, पूगल, दंतौर और खाजूवाला जैसे 14 केंद्रों पर तुलाई शुरू हो चुकी है, लेकिन 43 में से 29 केंद्र अभी भी बंद पड़े हैं। तुलाई मशीनें और स्टाफ समय पर नहीं लगाए जाने से किसान भारी संकट में हैं। प्रशासन का कहना है कि 1 दिसंबर तक सभी केंद्रों पर खरीद शुरू कर दी जाएगी।
किसानों की पीड़ा
“हमने तो सुना था सरकार समर्थन मूल्य पर खरीदेगी। पांच दिन से घूम रहे हैं, कहीं कांटा नहीं लगा, कहीं स्टाफ नहीं बैठा। मजबूरी में 5500 में बेचनी पड़ी।”
— रामलाल विश्नोई, किसान, बीकानेर
“हमारी मूंगफली में 12% नमी बताकर लौटा दी। खेतों में ओस पड़ रही है, कहां सुखाएं? सरकार जल्द खरीद शुरू करे, नहीं तो सालभर की मेहनत बर्बाद हो जाएगी।”
— महेंद्र नायक, किसान, पूगल रोड बीकानेर
राजफेड अधिकारी का बयान
“बीकानेर जिले के सभी 43 खरीद केंद्रों पर 1 दिसंबर तक खरीद प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। अभी कुछ जगह नमी अधिक (12–15%) आ रही है, जबकि अनुमत नमी 8% है। किसानों से अनुरोध है कि मूंगफली अच्छी तरह सुखाकर लाएं। व्यवस्थाओं को तेजी से पूरा किया जा रहा है ताकि किसी किसान को असुविधा न हो।”
— शिशु पाल सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, राजफेड बीकानेर
अधूरे शेड और स्टाफ की कमी बनी बाधा
कई केंद्रों पर अभी तक सरकारी कांटा (तुलाई मशीन) नहीं लगा है, शेड अधूरे हैं और तुलाई का स्टाफ भी नहीं पहुंचा। देरी के कारण कई किसान अब मजबूरी में निजी मंडियों की ओर रुख कर रहे हैं, जहां उन्हें समर्थन मूल्य से कहीं कम दाम मिल रहे हैं।




