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सोना-चांदी ने बनाया नया रिकॉर्ड: चांदी तीन दिन में ₹34 हजार बढ़ी, देखे आज के भाव

सोना-चांदी ने बनाया नया रिकॉर्ड: चांदी तीन दिन में ₹34 हजार बढ़ी, देखे आज के भाव

बीकानेर सोने-चांदी की कीमतों में तेजी का सिलसिला लगातार तीसरे दिन भी जारी है। आज 14 जनवरी को दोनों कीमती धातुएं अपने ऑल टाइम हाई स्तर पर पहुंच गई हैं। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, एक किलो चांदी की कीमत 14,145 रुपए बढ़कर 2,77,175 रुपए हो गई है। इससे पहले कल चांदी ने 2,63,032 रुपए प्रति किलो का रिकॉर्ड स्तर छुआ था। बीते तीन दिनों में ही चांदी 34 हजार रुपए से ज्यादा महंगी हो चुकी है। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना आज 1,868 रुपए की बढ़त के साथ 1,42,152 रुपए के ऑल टाइम हाई पर खुला। कल इसका भाव 1,40,482 रुपए प्रति 10 ग्राम था। अलग-अलग शहरों में सोने-चांदी के रेट अलग क्यों होते हैं? IBJA द्वारा जारी सोने की कीमतों में 3% GST, मेकिंग चार्ज और ज्वेलर्स मार्जिन शामिल नहीं होते। इसी वजह से अलग-अलग शहरों में रेट्स अलग दिखाई देते हैं। इन दरों का उपयोग RBI सोवरेन गोल्ड बॉन्ड के भाव तय करने और कई बैंक गोल्ड लोन की दरें निर्धारित करने में करते हैं।

2025 में रिकॉर्ड तेजी: सोना 75% और चांदी 167% महंगी
सोना: 2025 में सोने की कीमत में 57,033 रुपए (करीब 75%) की बढ़ोतरी हुई।
31 दिसंबर 2024 को 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 76,162 रुपए था, जो 31 दिसंबर 2025 तक बढ़कर 1,33,195 रुपए हो गया।
चांदी: इसी अवधि में चांदी 1,44,403 रुपए (167%) महंगी हुई। 31 दिसंबर 2024 को एक किलो चांदी 86,017 रुपए थी, जो 2025 के अंत में 2,30,420 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई।

सोने में तेजी के 3 बड़े कारण

  1. डॉलर कमजोर होना –
    अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती से डॉलर कमजोर हुआ, जिससे सोने की होल्डिंग कॉस्ट घटी और निवेश बढ़ा।
  2. जियोपॉलिटिकल तनाव –
    रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक तनाव के कारण निवेशक सोने को सुरक्षित निवेश मानकर खरीदारी कर रहे हैं।
  3. रिजर्व बैंक की खरीद –
    चीन सहित कई देश अपने रिजर्व में सोना जोड़ रहे हैं। सालभर में 900 टन से ज्यादा खरीदारी से दाम ऊपर गए। चांदी में तेजी के 3 प्रमुख कारण
  4. इंडस्ट्रियल डिमांड –
    सोलर, इलेक्ट्रॉनिक्स और EV सेक्टर में भारी उपयोग के कारण चांदी अब सिर्फ ज्वेलरी नहीं, बल्कि जरूरी कच्चा माल बन गई है।
  5. टैरिफ का डर –
    अमेरिकी टैरिफ आशंकाओं के चलते कंपनियां चांदी का बड़ा स्टॉक जमा कर रही हैं, जिससे ग्लोबल सप्लाई पर दबाव बढ़ा।
  6. मैन्युफैक्चरर्स की होड़ –
    प्रोडक्शन रुकने की आशंका से पहले ही खरीदारी बढ़ रही है, जिससे आने वाले महीनों में भी तेजी बने रहने की संभावना है।
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