गहलोत के दिल्ली दौरे से फिर छिड़ी सियासी नियुक्तियों को लेकर चर्चा, कई दिग्गज नेता अभी भी सियासी नियुक्तियों से हैं वंचित - Khulasa Online

गहलोत के दिल्ली दौरे से फिर छिड़ी सियासी नियुक्तियों को लेकर चर्चा, कई दिग्गज नेता अभी भी सियासी नियुक्तियों से हैं वंचित

जयपुर: सीएम अशोक गहलोत के दिल्ली दौरे ने सियासी नियुक्तियों को लेकर फिर चर्चा छेड़ दी है . कुछ प्रमुख बोर्ड,निगम, ADA aur UIT में नियुक्तियां शेष है . संभावना है कि इस माह में 1 दर्जन से अधिक नामों की तीसरी सूची सामने आ सकती . अभी भी कई दिग्गज नेता सियासी नियुक्तियों से वंचित है. हालांकि सीएम गहलोत का मौजूदा दिल्ली दौरा राज्यसभा चुनाव और चिंतन शिविर के मद्देनजर बताया जा रहा. सीएम अशोक गहलोत के दिल्ली दौरे ने सियासी नियुक्तियों की चर्चा को गर्म कर दिया है. तीसरी सूची इंतजार कर रहे नेताओं को उम्मीद है कि दिल्ली दौरे में नामों पर मुहर लगेगी. बहरहाल सीएम गहलोत के दिल्ली दौरे मकसद बताया जा राज्यसभा चुनाव की रणनीति और राजस्थान में आगामी दिनों में होने वाला पार्टी का राष्ट्रीय चिंतन शिविर.राष्ट्रीय चिंतन शिविर में आगामी लोकसभा चुनावों की रणनीति पर बात होगी . राज्यसभा चुनावों के तहत इस साल राजस्थान से चार सीटें खाली हो रही जून में चुनाव कराए जा सकते है , कांग्रेस में चर्चा है कि एक उम्मीदवार दिल्ली की पसंद का होगा और दो राजस्थान से,हालांकि अंतिम फैसला आलाकमान को लेना है . इन सब के बीच चर्चा है सियासी नियुक्तियों को लेकर तीसरी सूची की.साल के लंबे इंतजार के बाद राजनीतिक नियुक्तियों का पिटारा खोला गया था और 50 से ज्यादा बड़े नेताओं को और कार्यकर्ताओं को बोर्ड-निगम और आयोगों में अध्यक्ष-उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है. बड़ी बात यह कि पहली बार 15 विधायकों को भी बोर्ड निगमों और आयोगों में एडजस्ट किया गया है. इसके बावजूद प्रदेश कांग्रेस में दो दर्जन से ज्यादा दिग्गज नेता ऐसे हैं जिन्हें राजनीतिक नियुक्तियों से दूर रखा गया है, इनमें कई नेता तो ऐसे हैं जो काफी प्रभावशाली और जनाधार वाले माने जाते हैं और पार्टी में मंत्री विधायक और सांसद तक रह चुके हैं. बड़े चेहरों की राजनीतिक नियुक्तियों में अनदेखी को लेकर सियासी गलियारों में भी चर्चाएं खूब हुई. I इनमें प्रमुख है गिरिजा व्यास, बीना का, दुर्रू मियां, अश्क अली टांक, राजेंद्र चौधरी , रतन देवासी , सुभाष महरिया , सुरेंद्र गोयल,राजुकुमार रिणवा, विजयलक्ष्मी विश्नोई, कृष्ण मुरारी गंगावत, शिवचरण माली, अजीत सिंह शेखावत, के. के. हरितवाल, राजकुमार जयपाल, रामचंद्र सराधना, सुरेश चौधरी, सत्येंद्र भारद्वाज, नसीम अख्तर इंसाफ, श्रीगोपाल बाहेती,रूपेश कांत व्यास,संजय बापना जैसे नाम शुमार है. गिरिजा व्यास जहां प्रदेश कांग्रेस की अध्यक्ष और केंद्र में दो बार केंद्रीय मंत्री रह चुकी हैं तो वहीं बीना काक भी कई बार विधायक और मंत्री रह चुकी हैं.दुर्रू मियां और अश्क अली टांक राज्यसभा सांसद और प्रदेश में मंत्री रह चुके हैं. सुभाष महरिया भी सांसद और केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं. ज्योति खंडेलवाल,राजेश चौधरी सरीखे कुछ नाम ऐसे भी जिन्हे सियासी पद मिला लेकिन वे संतुष्ट नहीं . इतना नहीं कुछ प्रमुख विधायक अभी संसदीय सचिव की सूची आने की बाट जोह रहे.
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