
कोर्ट मैरिज के चार महीने के बाद ही पति व सौतेली सास ने की मारपीट, दोष साबित नहीं होने पर सास आरोपों से बरी, पति फरार




कोर्ट मैरिज के चार महीने के बाद ही पति व सौतेली सास ने की मारपीट, दोष साबित नहीं होने पर सास आरोपों से बरी, पति फरार
बीकानेर। सेशन कोर्ट ने घरेलू हिंसा और जानलेवा हमले के गंभीर मामले में सौतेली सास को साक्ष्य के अभाव में सभी धाराओं से बरी कर दिया। कोर्ट ने अभियुक्ता विमला को संदेह का लाभ देते हुए धारा 308 (हत्या का प्रयास), 342 (गैरकानूनी तरीके से बंदी बनाना), 323 (मारपीट) और 34 भारतीय दंड सहिंता से दोषमुक्त करार दिया।
यह है पूरा प्रकरण
मामला अक्टूबर 2018 का है। सुभाषपूरा गली नंबर तीन की रहने वाली नवविवाहिता सिमरन पत्नी भोजराज पवार ने सदर थाना में शिकायत दर्ज कराई थी कि कोर्ट मैरिज के चार महीने बाद ही पति भोजराज और सौतेली सास विमला पत्नी बाबूलाल ने उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। शिकायत में आरोप था कि दोनों ने मिलकर उसे कमरे में बंद किया, गला दबाया और नाक की हड्डी तोड़ दी। गंभीर हालत में उसे ट्रॉमा सेंटर ले जाना पड़ा था।
सास को किया बरी, पति अभी भी फरार
पुलिस ने भोजराज और विमला के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। बाद में चार्जशीट सेशन कोर्ट पहुंची। सुनवाई के दौरान मुख्य आरोपी भोजराज लंबे समय तक फरार रहा। 12 सितंबर 2025 को उसे आधिकारिक तौर पर मफरूर (भागा हुआ) घोषित कर दिया गया। केवल सौतेली सास विमला के खिलाफ ही विचारण चल सका।
सेशन जज अतुल कुमार सक्सेना की अदालत ने 28 नवंबर 2025 को फैसला सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष विमला की संलिप्तता साबित करने में पूरी तरह असफल रहा। इसलिए उसे सभी आरोपों से बरी किया जाता है। कोर्ट ने मुख्य आरोपी भोजराज के फरार होने के कारण पूरी फाइल सुरक्षित रखने के आदेश दिए हैं।
आरोपी के पकड़े जाने के बाद दोबारा खुलेगा केस
अदालत ने स्पष्ट किया कि भोजराज के पकड़े जाने पर मुकदमा दोबारा खुलेगा। फिलहाल सात साल बाद भी पीडि़ता को इंसाफ का इंतजार है, जबकि सौतेली सास कानूनी रूप से बेकसूर घोषित हो चुकी है। अभियुक्ता की और से पैरवी अधिवक्ता हनुमानसिंह राजपुरोहित ने की।




