फोगिंग,दवा बेअसर,बेकाबू हो रहा डेंगू - Khulasa Online

फोगिंग,दवा बेअसर,बेकाबू हो रहा डेंगू

खुलासा न्यूज,बीकानेर। जिले में कोरोना संक्रमण कम हुआ, तो अब डेंगू कहर बरपा रहा है। डेंगू के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है। स्थिति ये है कि जिले में डेंगू की मौत के मामले भी धीरे-धीरे बढ़ रहे है। उधर,जिले में सरकारी आंकड़ों में अब तक जिले में कुल 550 से ऊपर मरीज डेंगू पॉजिटिव हुए हैं। जबकि हकीकत में रोजाना जिलेभर में करीब दो हजार लोग डेंगू की निजी और सरकारी हॉस्पिटल में जा करवा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि डेंगू पॉजिटिव के सरकारी आंकड़े भी गुमराह करने वाले हैं। फिलहाल बेकाबू डेंगू को लेकर प्रशासनिक व चिकित्सा महकमे के इंतजाम भी नाकाफी साबित हो रहे है। शहरी व ग्रामीण अंचलों में हर दूसरे घर में बीमारियों के रोगी मिल रहे है। इनमें से अधिकतर डेंगू के रोगी है। डेंगू से निपटने के लिए प्रशासन के पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। नहीं है पर्याप्त मशीनें जिले में डेंगू, मलेरिया सहित वायरल का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है लेकिन मच्छरों की रोकथाम के लिए जिले में संसाधानों का टोटा बना है। स्थिति ये है वर्तमान में पूरा जिला 5 मशीनों के भरोसे चल रहा है, जबकि पूरे जिले के लिए 60 से अधिक फोगिंग मशीनों की आवश्यकता है। फोगिंग मशीनों की कमी से पूरा जिला कवर नहीं हो पा रहा है। करीब 9 मशीनें खराब पड़ी है। ऐसे में शहरी के साथ ग्रामीण अंचलों में भी फोगिंग नहीं हो पा रही है। शुरूआती दौर में बरती लापरवाही बारिश के बाद जिले में चिकित्सा महकमे ने ना तो फोगिंग कराई और न संदिग्ध इलाकों में डेंगू रोकथाम के लिए कोई खास अभियान चलाया गया। इस कारण डेंगू का कहर लगातार बढ़ रहा है। डेंगू के बढ़ते मामलों को देखते हुए अब स्वास्थ्य विभाग नींद से जागा है। ये है डेंगू के लक्षण एवं बचाव -अचानक तेज बुखार, सिर में आगे की और तेज दर्द। -आंखों के पीछे दर्द और आंखों के हिलने से दर्द में और तेजी। -मांसपेशियों, बदन व जोडों में दर्द। -स्वाद का पता न चलना व भूख न लगना। -छाती और ऊपरी अंगों पर खसरे जैसे दाने। -चक्कर आना, जी घबराना व उल्टी आना। -शरीर पर खून के चकत्ते एवं खून की सफेद कोशिकाओं की कमी। डेंगू से बचाव के उपाय -छोटे डिब्बों व जहां पानी भरा हुआ है उसे निकाले। -कूलरों का पानी सप्ताह में एक बार अवश्य बदलें। -घर में कीट नाशक दवा का छिड़काव करें। -बच्चों को ऐसे कपड़े पहनाएं जिससे उनके हाथ पांव पूरी तरह से ढके रहे।

डेंगू बुखार, कहर,डर और डर का कारोबार एक डेंगू मरीज को बीमारी के बारे में जानकारी साझा करने में 10/ 15मिनट का समय दिया जाना चाहिए। सामान्यत अधिकतर मामलों में मरीज घर में सामान्य पैरासिटामोल , अधिक तरल पदार्थ के सेवन व नियमित सुपाच्य आहार से 5/7दिन में ठीक हो जाता है. इस दौरान तेज बुखार ,सिर दर्द व बदन दर्द होना कोई गंभीर लक्षणों में नहीं आता, काउंसलिंग सबसे बड़ी कड़ी है, लोग paracetomol से आराम नही मिलने पर निमेसुलिड वी ibuprofen जैसे नुकसानदायक दवाइयों का प्रयोग करते हैं।तीसरे से पांचवे दिन चक्कर, उल्टी अगर अत्यधिक मात्रा में हो रहा हो तो तुरंत हॉस्पिटल में एडमिट करवाके डॉक्टर के परामर्श के अनुसार drip व दवाई दे, नियमित रूप से जांच व सुधार के हिसाब से आपके डॉक्टर की राय को अपनाएं।एंटीबायोटिक, प्लेटलेट ट्रांसफ्यूजन के लिए डॉक्टर के ऊपर अनावश्यक दबाव नहीं डाले।5प्रतिशत मरीज में ब्लड प्रेशर ज्यादा गिरने लगता है, जिसे डेंगू शॉक सिंड्रोम कहते हैं, अत्यधिक गंभीर अवस्था में बहुत ज्यादा ड्रिप की जरूरत पड़ती है,इनमे से कुछ मरीज को रक्तस्राव होने लगता है, जिसे डेंगू हेमोरेजिक फीवर कहते हैं, खून, फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा या प्लेटलेट ट्रांसफ्यूजन की जरूरत पड़ती है और कई बार फेफड़ों में व पेट में पानी इक्ठा होकर भी मरीज गंभीर अवस्था में पहुंच सकता है। पहले दिन कौनसे मरीज में यह सब होगा या नहीं पता करने की कोई जांच नहीं होती। पलटेलेट में बहुत ज्यादा तवज्जो दे कर डर का माहोल जल्दबाजी में बिना जरूरत डॉक्टर के ऊपर अनावश्यक दबाव कर एडमिट होना सही नहीं होता।जिस से वास्तविक गंभीर मरीज को हॉस्पिटल में बेड व उचित मेडिकल सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाती ओर कालकल्वित हो जाते हैं।कीवी फल, कच्चा बकरी का दूध व अन्य किसी भी प्रकार की दवाई प्लेटलेट बढ़ाने में सहायक नहीं होती, कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है, महज कपोल कल्पित प्रोपेगेंडा है।डर के माहोल में एंटीबायटिक, घर घर अनियंत्रित drip लगवाकर स्तिथि के पूरे आंकलन के बगैर किया जा रहा नासमझी वाला उपचार आर्थिक शोषण के साथ साथ कई बार मरीज को अकल्पनीय रूप से जीवन घाती हो सकता है।इतने संख्या में डेंगू मरीज को पहली बार देखने को मिला है, सरकारी प्रयास के साथ साथ बचाव हेतु सभी आम जन अपने स्तर पर मच्छर से बचने के लिए प्रयास करें और बीमारी से भय को दूर करने और गंभीर अवस्था को पहचानने में एक दूसरे का सहयोग करें ।कोई भी डॉक्टर डेंगू का कौनसा मरीज कैसे वायरस को रिएक्ट करेगा , पता लगाने में सक्षम नहीं हैं, क्योंकि ऐसी कोई जांच उपलब्ध नहीं हैं, केवल डॉक्टर, मरीज और परिजन के सामंजस्य और सजग व नियमित परामर्श ही समय से गंभीर अवस्था को पहचान कर उपचार दिया जा सकता है।अपनी हर बुखार को टायफायड घोषित करने में उत्सुक आम जन और स्व चिकित्सा करने वाले लोगों से अपील है कि वह किसी भी तरह के बुखार को प्रथम दृष्टया डेंगू ही मानकर प्रशिक्षित डॉक्टर के परामर्श से उपचार लेवें।

डा श्याम अग्रवाल

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