राजस्थान में पैदा हुआ बिजली का भीषण संकट, डॉ. बीडी कल्ला ने दिया आश्वासन

राजस्थान में कोयले की सप्लाई कम आने के कारण बिजली की भारी कमी हो गई है। प्रदेश में आज के हालात में रोजाना बिजली की औसत मांग 12 हजार 500 मेेगावाट है,लेकिन प्रदेश में 8500 मेगावट बिजली की उपलब्ध है। ऐसे में 4500 मेगावाट बिजली का टोटा हो गया है। त्योहारी मौसम में बिजली का ये संकट और गहरा सकता है। सरकार ने मान लिया है कि बिजली की कमी के कारण पिछले दो दिनों से राज्यभर में बिजली की कटौती की जा रही है। मुख्यमंत्री ने तो लोगों से बिजली बचाने की अपील जारी कर दी है।

दोपहर 3 से रात 12 बजे तक 2500 मेगावाट से ज्यादा का फर्क

खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बिजली संकट और त्योहारी मौसम को देखते हुए बिजली की मॉनिटरिंग को लेकर मोर्चा सम्भाल लिया है। गहलोत ने सीएम निवास पर बिजली विभाग के आला अधिकारियों के साथ लम्बी बैठक की। जिसमें बिजली के इस संकट का कारण पूछा। तो अधिकारियों ने बताया कि बिजली संकट के कारण ग्रिड में बिजली की कमी है। विंड एनर्जी के प्लांट्स से भी क्षमता से कम बिजली मिल पा रही है। प्रदेश में 4 अक्टूबर के बाद से बिजली का इस्तेमाल बढ़ा है। लेकिन थर्मल पॉवर प्लांट्स के पूरी क्षमता से काम नहीं करने के कारण प्रोडक्शन और उपलब्धता घट रही है। डिमांड और उपलब्धता में रोजाना दोपहर 3 बजे से रात 12 बजे तक 2500 मेगावाट से ज्यादा का फर्क आ गया है। ऐसे में पिछले दो दिन से मजबूरी में रोस्टर से बिजली कटौती की जा रही है। जिन इलाकों में कटौती हो रही है, उसके बारे में लोगों को अखबारों और सोशल मीडिया से जानकारी मुहैया करवाई जाएगी।

राजस्थान को 11 की बजाय 7.50 रैक कोयला मिल रहा

राजस्थान में रोजाना करीब 11 रैक कोयले की जरूरत है। लेकिन अभी 7.50 रैक कोयला ही प्रदेश को मिल रहा है।इसका असर थर्मल पॉवर प्लांट्स की क्षमता पर पड़ा है।सूरतगढ़ थर्मल पॉवर प्लांट में 1250 मेगावाट रोज उत्पादन कम हो रहा है। राजस्थान को 1 अक्टूबर से एनसीएल से 5 रैक प्रतिदिन और एसईसीएल से 2 रैक प्रतिदिन अलॉट की गई है। 1 से 5 अक्टूबर तक एनसीएल ने औसतन 4 रैक प्रतिदिन और एसईसीएल ने प्रतिदिन आधी रैक से भी कम रवाना की हैं।

में भरने से सप्लाई घटी

चेयरमैन डिस्कॉम्स भास्कर ए सावंत ने बताया कि मॉनसूनी बारिश से कोयला खानों में पानी भरने के कारण पूरे उत्तर भारत में पिछले कुछ दिनों से कोयला संकट बना हुआ है। जबकि राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम के सीएमडी आर के शर्मा ने भी बताया कि बारिश देरी से होने के कारण कोयला खदानों में पानी भरना कोयला प्रोडक्शन कम होने की मुख्य वजह है।उन्होंने बताया कि राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम की ओर से एसईसीएल से 3800 मीट्रिक टन यानी 1 रैक कोयला रोज सड़क और रेल के जरिए उठाया जा रहा है।

-बिजली विभाग के अफसे मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने वीसी के जरिए सीएमआर से हुई बैठक में कहा कि बिजली विभाग के अधिकारी छत्तीसगढ़ जाकर वहां स्थित कोल ब्लॉक्स में कोयले की मौजूदा उपलब्धता और प्रदेश की जरूरत के मुताबिक पर्याप्त कोयला उपलब्ध हो सके, इसकी निरन्तर मॉनिटरिंग करें। उन्होंने केन्द्रीय अधिकारियों से कॉर्डिनेशन कर कोयले की रैक की सप्लाई जरूरत के मुताबिक करवाने के निर्देश दिए।

केन्द्रीय कोयला मंत्री और केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री ने दिया आश्वासन

बैठक में ऊर्जा मंत्री डॉ. बीडी कल्ला ने बताया कि केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री से बातचीत के दौरान उनसे प्रदेश को अलॉट कोटे के मुताबिक कोयला रोजाना मुहैया करवाने का आग्रह किया है। डॉ. कल्ला ने बताया कि केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री ने केन्द्रीय कोयला मंत्री और कोयले की उपलब्धता की मॉनिटरिंग के लिए बनाए उप-समूह से चर्चा कर राजस्थान को कोयले की सप्लाई बढ़ाने का आश्वासन दिया है।

error: Content is protected !!
Join Whatsapp