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जयपुर।राजस्थान में तीन सीटों पर उपचुनाव में भाजपा के दो दिन बाद अब कांग्रेस ने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। सुजानगढ़ से मनोज मेघवाल, सहाड़ा से गायत्री त्रिवेदी और राजसमंद से तनसुख बोहरा को कांग्रेस ने मैदान में उतारा है। मनोज मेघवाल दिवंगत पूर्व मंत्री मास्टर भंवरलाल के पुत्र हैं। सहाड़ा से उम्मीदवार बनाई गई गायत्री देवी, दिवंगत विधायक कैलाश त्रिवेदी की पत्नी हैं। वहीं, राजसमंद से तनुसुख बोहरा के रूप में नए चेहरे को मौका दिया है। कांग्रेस ने सुजानगढ़ और सहाड़ा में दिवंगत विधायकों के परिवारों को टिकट देकर सहानुभूति कार्ड खेला है। कांग्रेस ने कल ही लंबे मंथन के बाद सिंगल नामों का पैनल हाईकमान को भेजा था।
तीनों उम्मीदवार पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ेंगे
कांग्रेस के तीनों ही उम्मीदवार पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। गायत्री त्रिवेदी पहले पंचायतीराज का चुनाव लड़ चुकी हैं लेकिन इन दिनों सक्रिय कम रही हैं। तनसुख बोहरा खान कारोबारी हैं, पहले चुनाव नहीं लड़े। मनोज मेघवाल भी पहली बार ही चुनाव मैदान में है। तीनों ही सीटों पर कांग्रेस ने नए चेहरों को मैदान में उतारा हैं यह अलग बात है ​कि सहाड़ा और सुजानगढ में परिवार की सियासत पर ही दांव खेला है।
सुजानगढ़: कांग्रेस के मेघवाल और भाजपा के मेघवाल के बीच मुकाबला
सुजानगढ़ सीट पर मनोज मेघवाल को उम्मीदवार बनाकर कांग्रेस ने सहानुभूति कार्ड खेलने के साथ ही मास्टर भंवरलाल की विरासत को आगे बढ़ाने का स्टेप भी उठाया है। मनोज मेघवाल का मुकाबला यहां भाजपा उम्मीदवार और पूर्व मंत्री खेमाराम मेघवाल से है। मनोज मेघवाल नया चेहरा हैं। अपने पिता के मुकाबले सॉफ्ट माने जाते हैं। लेकिन राजनीति में नए हैं। पहली बार पिता के बिना सियासी मैदान में उतरे हैं। कांग्रेस को यहां भीतरघात का खतरा भी है। भाजपा के खेमाराम के सामने भी भाजपा की खेमेबंदी बड़ी चुनौती है।
सहाड़ा: सहानुभूति के सहारे कांग्रेस की गायत्री देवी
सहाड़ा सीट पर कांग्रेस में त्रिवेदी परिवार से टिकट तय माना जा रहा था। दिवंगत कैलाश त्रिवेदी की पत्नी को टिकट देकर सहानुभूति कार्ड चला है। टिकट दावेदारी को लेकर त्रिवेदी परिवार ही एकजुट नहीं था। कैलाश त्रिवेदी के भाई राजेंद्र त्रिवेदी भी टिकट मांग रहे थे। वहीं, कैलाश त्रिवेदी के बेटे चाचा के नाम पर तैयार नहीं थे और वे अपनी मां को टिकट देने का दबाव बना रहे थे। आखिरकार लंबे मंथन और जद्दोजहद के बाद यह तय हुआ कि भाई की जगह दिवंगत विधायक की पत्नी को टिकट देने से सहानुभूति ज्यादा मिल सकती है। इसलिए गायत्री देवी को टिकट दिया है। सहाड़ा में भाजपा ने पूर्व मंत्री रतनलाल जाट को टिकट दिया है। इस सीट पर कड़ा मुकाबला तय है। भाजपा का यहां मजबूत कैडर है। रतनलाल जाट भी आखिरी चुनाव होने का इमोशनल कार्ड खेल रहे हैं।