
दो दिन बाद ऊंट उत्सव: गंदगी, सडक़ पर फैला नालों का पानी, बदबू मारती नालियां, टूटी सडक़ें यह है हमारी तैयारी




दो दिन बाद ऊंट उत्सव: गंदगी, सडक़ पर फैला नालों का पानी, बदबू मारती नालियां, टूटी सडक़ें यह है हमारी तैयारी
बीकानेर। बीकानेर शहर में पिछले लंबे समय से अंतराष्ट्रीय ऊंट उत्सव हो रहा है। नाम तो अंतराष्ट्रीय ऊंट उत्सव है लेकिन इसके पीछे की हकीकत कुछ ओर बया करती है। इस ऊंट उत्सव को देखने देश विदेशी से सैलानी आते है इस कार्यक्रम का लुफ्त उठाते है। लेकिन पिछले कुछ सालों से इस ऊंट उत्सव का स्वरुप पूरी तरह बदल दिया है। शहर की टूटी सडक़े, सडक़ों पर फैला गंदा पानी ये सब देखकर शर्म आती है कि जिस कार्यक्रम को देखने देश विदेश से सैलानी आते है और हमारी स्थिति यह है कि हम दस दिन शहर को साफ नहीं रख सकते है। क्योकि सैलानियों के द्वारा खींची गई फोटो जब बाहर देशों में जाते है तो हमें नीचा देखना पड़ता है। बीकानेर की पहचान और गौरव का प्रतीक जूनागढ़ किला आज प्रशासनिक लापरवाही का सबसे बड़ा उदाहरण बनता जा रहा है। पिछले एक सप्ताह से जूनागढ़ के पास नालों और सीवरेज का गंदा पानी सडक़ों पर फैल रहा है। नगर निगम कार्यालय के सामने, पेट्रोल पंप के पास और मुख्य मार्ग पर हालात ऐसे हैं कि राहगीरों को बदबू, फिसलन और गड्ढों से जूझना पड़ रहा है।
यह वही रास्ता है, जहां से रोजाना आमजन, अधिकारी, जनप्रतिनिधि और जल्द ही देशी-विदेशी पर्यटक गुजरने वाले हैं, लेकिन जिम्मेदारों को न गंदगी दिख रही है और न ही सडक़ की बदहाली। नगर निगम से जूनागढ़ तक सीसी सडक़ बनाई गई है, लेकिन उसके आगे निकलते ही हालात बद से बदतर हो जाते हैं। सडक़ पर दो-दो फीट गहरे गड्ढे, उबड़-खाबड़ सतह और बीच सडक़ पर बहता सीवरेज पानी दुपहिया ही नहीं, फोर व्हीलर चालकों के लिए भी खतरा बन चुका है।
खुले नालों से निकलता गंदा पानी सडक़ पर फैल रहा है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा हर वक्त बना हुआ है। हैरानी की बात यह है कि यह कोई सुनसान गली नहीं, बल्कि शहर का सबसे महत्वपूर्ण और वीआईपी मार्ग है। इसके बावजूद प्रशासन की नाकामी यहां साफ दिखाई दे रही है। कलेक्टर, बीडीए आयुक्त, नगर निगम आयुक्त और पीडब्ल्यूडी के बड़े अधिकारी लंबे समय से फील्ड में नजर नहीं आए। अधिकारी अगर दफ्तरों से बाहर निकलें, तो उन्हें जमीनी हकीकत खुद-ब-खुद दिख जाए। और भी चिंताजनक तथ्य यह है कि 9 से 11 जनवरी तक जिले में अंतरराष्ट्रीय ऊंट उत्सव प्रस्तावित है।
इसी मार्ग से देशी-विदेशी पर्यटक गुजरेंगे, लेकिन अफसरशाही फाइलों में दिशा-निर्देश जारी करने तक सीमित है। उन्हें इस बात की सुध तक नहीं कि शहर के प्रवेश द्वार जैसे इलाके की हालत क्या है। शहर में दो-दो मंत्री और भाजपा विधायक होने के बावजूद यह दुर्गति प्रशासनिक असंवेदनशीलता को उजागर करती है। जनप्रतिनिधि भी बैठकों में अफसरों से सख्ती से सवाल नहीं कर रहे, जिससे जवाबदेही पूरी तरह गायब हो चुकी है।




