निकाय चुनाव: वरिष्ठ नेताओं की प्रतिष्ठा पर लगेगा बट्टा या बचेगी साख - Khulasa Online

निकाय चुनाव: वरिष्ठ नेताओं की प्रतिष्ठा पर लगेगा बट्टा या बचेगी साख

बीकानेर। निगम चुनाव के मतदान की तिथि नजदीक आने के साथ ही प्रत्येक वार्डों में प्रत्याशी अपनी जीत के लिये तरह तरह के जतन कर रहे है। कोई रिश्तेदारी का हवाला देकर वोट बटोरने में लगे है तो कोई वरिष्ठ नेताओं को अपने वार्ड की परिक्रमा करवा कर वोट मांगने का काम कर रहे है। ऐसे में जिन वार्डों में वरिष्ठ नेता जनसंपर्क कर रहे है वहां उनकी प्रतिष्ठा भी अब दावं पर लग गई है। मेघवाल,कल्ला व भाटी की साख का सवाल ये चुनाव कई नेताओं का भविष्य भी तय करेगा। विधानसभा चुनाव से ही एक दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोल चुके केन्द्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल और पूर्व मंत्री देवीसिंह भाटी के लिये निकाय चुनाव प्रतिष्ठा का प्रश्न बना हुआ है। जिसके कारण दोनों ही नेता वार्डो में घूमकर अपने प्रतियाशियों को जीताने का हरसंभव प्रयास कर रहे है। जहां देवीसिंह भाटी ने सनम के प्रत्याशी उतार कर भाजपा के लिये परेशानी खड़ी कर दी है। बताया जा रहा है अपने चेहतों को टिकट देने का दंश झेल रहे केन्द्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल भी अपनी साख बचाने के लिये प्रत्याशियों के पक्ष में प्रचार कर रहे है। तो यही हालत काबिना मंत्री डॉ बी डी कल्ला के भी है। राजनीतिक जानकार कहते है जिस तरह टिकटों के बंटवारा हुआ है,उससे कही न कही दोनों ही दलों में रोष है। खासकर अर्जुनराम मेघवाल के खिलाफ जमकर आक्रोश के हालात है। तो डॅा कल्ला के लिये कुछ वार्ड प्रतिष्ठा के बन गये है। अगर इन दोनों ही नेताओं के बांटे गये टिकटों के वार्डों में उथल पुथल होती है तो पार्टी के लिये यह घातक सिद्व होगा। भाटी के भविष्य का चुनाव राजनीतिक जानकारों की माने तो ये चुनाव देवीसिंह भाटी की राजनीति दशा व दिशा तय करेगा। विधानसभा चुनावों से ही अर्जुनराम मेघवाल के विरोध पर उतरे भाटी अब निगम चुनावों में अपनी ताकत दिखाने के लिये वार्डवार घूम रहे है। भाटी सोमवार को वार्ड 13 में अपनी पार्टी के लिये प्रचार करते दिखे। यहीं नहीं कई वार्ड ऐसे है जहां वे अपने समर्थकों को फोन कर सनम प्रत्याशियों को जीताने के लिये कह रहे है। खुद के बोये बीज दे रहे पीड़ा आपको बता दे कि जिन चेहतो को आगे लाने में मेघवाल व डॉ कल्ला ने अपने वरिष्ठ नेताओं से जंग लड़ी आज वे ही नेता उनको पीडा पहुंचा रहे है। ऐसा माना जा रहा है कि जिन वार्डों में अधिकृत प्रत्याशियों के सामने पार्टी का ही पदाधिकारी व पूर्व पार्षद खड़ा है तो उनके पीछे अपनी ही पार्टी के जिम्मेदार नेताओं का हाथ है। जिससे वार्डों के गणित गड़बडा गये है।
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