बीकानेर : विधायक बिश्नोई ने सदन में उठाया मुद्दा, कहा- एक माह में तीन महिला नियमितीकरण की आस में छोड़ दी दुनिया

- लोक जुम्बिश परियोजना के बंद होने से नियमितीकरण से वंचित कार्मिकों को जल्द से जल्द नियमित करे : बिश्नोई नोखा । राज्य विधानसभा में राजस्थान विधानसभा के प्रक्रिया तथा कार्य-संचालन संबंधी नियम 295 के तहत विशेष उल्लेख में नोखा विधायक बिहारीलाल बिश्नोई ने प्रदेश में लोक जुम्बिश परियोजना के बंद होने से नियमितीकरण से वंचित कार्मिको को नियमित करने का मुद्दा उठाया । श्री बिश्नोई ने कहा कि राजस्थान में प्रारंभिक शिक्षा के प्रसार व गुणात्मक सुधार के लिए जून 1992 में लोक जुम्बिश परियोजना की शुरुआत की गई, जो जून 2004 तक चली । उन्होंने कहा कि परियोजना के क्रियान्वित हेतु कर्मचारियों की आवश्यकताओ के मध्यनजर राज्य सरकार के कार्मिक एवं वित्त विभाग से अनुमोदित "लोक जुम्बिश कार्मिक सेवा नियम 1993 में राज्य सरकार में स्वीकृत सांकेतिक वेतनमान एवं वेतन श्रंखला तथा शैक्षणिक प्रशेक्षणिक योग्यताओ के आधार पर समय-समय पर विभिन्न पदों पर कार्मिको की संविदा आधारित भर्ती की गई तथा नियमानुसार भर्ती किये गये कार्मिको (अधिकांश महिला कार्मिक) को उक्त सेवा विनियमों के तहत राज्यकर्मियों की भांति सभी तरह के सेवा-परिलाभ यथा आकस्मिक, उपार्जित, परिवर्तित एवं प्रसूति अवकाश, वार्षिक वेतन वृद्धि, बोनस, पांचवे व छठे वेतन आयोग की सिफारिशों का लाभ नियमानुसार दिया जा रहा था । विधायक ने बताया कि इन 948 संविदा कार्मिको को लोक जुम्बिश परियोजना समाप्ति पर जो पहले से ही वर्ष 2003 से सर्व शिक्षा अभियान का कार्य कर रहे थे को राजस्थान प्रारम्भिक षिक्षा परिषद जयपुर के अधीन 1 जुलाई 2004 से समाहित कर दिया गया, लेकिन कार्मिक सेवा नियम 1993 के तहत दी जा रही सेवा-सुविधाएं बंद कर दी गई । बिशनोई ने आज सदन में कहा कि लोक जुम्बिश अनुबंध कार्मिक अभी तक के निर्णयों से वंचित रहने पर सरकार से वजह पूछी । उन्होंने जानना चाहा कि राज्य सरकार के कार्मिक एंव वित विभाग से अनुमोदित होने के बावजूद लोक जुम्बिश कार्मिक अभी तक सेवा नियम 1993 से वंचित क्यों है । बिश्नोई ने सदन के माध्यम से सरकार से मांग की कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के कर्नाटक सरकार बनाम उमा देवी व अन्य प्रकरण में जारी रूलींग दिनांक 10.04.2006 ''10 वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके अनुबंध कार्मिकों को सीधे नियमित किया जाए । उन्होंने लोक जुम्बिश कर्मचारियों के साथ सरकार द्वारा वर्षों तक किए गए भारी भेदभाव के चलते अब उन्हें अविलंब नियमित किया जाए । उनका कहना था कि प्रबोधक अधिनियम 2008 में नियमित होने से शेष रहे लोक जुम्बिश अनुबंध कार्मिको को स्वायतशाषी निकायों में लगाए जाने के माननीय मुख्यमंत्री महोदया द्वारा दिए गए निर्णयों की पालना भी नही की गई । वर्तमान सरकार चाहे तो इन्हें अनुदानित शिक्षाकार्मियों को ''राजस्थान स्वैच्छया ग्रामीण शिक्षा सेवा अधिनियम 2010'' के तहत भी नियमित कर सकती हैं । बिश्नोई ने अफसोस जताया कि पिछले 1 माह में तीन महिला कार्मिकों ने नियमितीकरण की आस में बिमारी की अवस्था में दुनिया छोड़ दी । श्री बिश्नोई ने सरकार से आग्रह किया कि लोक जुम्बिश परियोजना के बंद होने से नियमितीकरण से वंचित कार्मिकों को जल्द से जल्द नियमित करे ।

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