
बीकानेर कोर्ट ने 18 साल पुराने सामूहिक दुष्कर्म के मामले में डॉक्टर व कम्पाउंडर को किया बरी




बीकानेर कोर्ट ने 18 साल पुराने सामूहिक दुष्कर्म के मामले में डॉक्टर व कम्पाउंडर को किया बरी
- मेडिकल में शरीर पर एक भी खरोंच नहीं, जननांगों पर कोई चोट के निशान नहीं
- घटना के वक्त डॉ. मनोहर ऑपरेशन थिएटर में ड्यूटी पर थे, सीनियर डॉक्टर ने दी गवाही
- तीन अलग-अलग जांच पुलिस अधिकारियों ने केस को पहले ही बताया था झूठा
- पीडि़ता ने कई डॉक्टरों, पुलिस अधिकारियों और बड़े लोगों को फंसाकर पैसे वसूले थे
खुलासा न्यूज़, बीकानेर। अपर सेशन न्यायाधीश रैना शर्मा की अदालत ने शुक्रवार को वर्ष 2007 के कथित सामूहिक बलात्कार मामले में बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने डॉ. मनोहर और कम्पाउंडर गोवर्धन को सभी आरोपों से बरी कर दिया। 41 पेज के विस्तृत फैसले में कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि अभियोजन संदेह से परे एक भी तथ्य साबित नहीं कर पाया और पूरा मामला झूठा पाया गया। ऐसे में दोनों अभियुक्तों को बरी किया जाता है।
घटना का आरोप और शुरुआती कार्रवाई
परिवादिया ने 25 जून 2007 को पुलिस को दी टाइप की गई शिकायत में आरोप लगाया था कि 11 जून 2007 को दोपहर करीब तीन बजे डॉ. मनोहर उसे फ्री दवा का लालच देकर मोटरसाइकिल पर घर से ले गया। गोवर्धन के पटेल नगर स्थित घर में दोनों ने बारी-बारी से उसके साथ जबरदस्ती की और धमकी दी कि किसी को बताएगी तो जान से मार देंगे।
तीन पुलिस अधिकारियों की जांच में केस निकला झूठा
- घटना की शाम को ही परिवादिया थाने पहुंची थी, लेकिन कोई लिखित शिकायत नहीं दी।
- अगले दिन 12 जून को दी गई हस्तलिखित शिकायत में भी तथ्य बदल दिए गए।
- तत्कालीन थानाधिकारी वीरेन्द्रपाल, एसआई प्रवेश कुमार और बाद में सीआईडी-सीबी के जांच अधिकारी शिशुपाल सिंह, तीनों ने अलग-अलग जांच में केस को पूरी तरह झूठा पाया।
Detail Middle
- प्रारम्भिक जांच के बाद पुलिस ने ‘अदम वकू झूठ’ में अंतिम रिपोर्ट लगा दी थी।
मेडिकल रिपोर्ट ने तोड़े अभियोजन के सभी दावे
26 जून 2007 को पीबीएम अस्पताल के मेडिकल बोर्ड ने पीडि़ता का परीक्षण किया। महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. मोनिका स्वामी ने कोर्ट में गवाही दी कि परिवादिया के शरीर पर कहीं भी कोई चोट, खरोंच या निशान नहीं थे। जननांगों पर भी किसी प्रकार की चोट के कोई निशान नहीं। कोई चिह्न नहीं था जिससे लगे कि विरोध किया गया हो।
डॉ. मनोहर की लोकेशन हुई साबित
डॉ. सुरेन्द्र प्रकाश चौहान (तत्कालीन सीनियर डॉक्टर) ने कोर्ट को बताया कि 11 जून 2007 को दोपहर तीन बजे से लेकर एक घंटे से ज्यादा समय तक डॉ. मनोहर मेरे साथ ऑपरेशन थिएटर में थे। वे कहीं बाहर नहीं गए।
चौंकाने वाला निकला परिवादिया का रिकॉर्ड
कोर्ट में पेश दस्तावेजों से सामने आया कि परिवादिया ने बीकानेर व श्रीगंगानगर में कई डॉक्टरों, बस कंडक्टर, पुलिस अधिकारियों व प्रतिष्ठित लोगों के खिलाफ बलात्कार व छेड़छाड़ के झूठे केस दर्ज करवाए थे। अधिकांश केस पुलिस ने जांच में झूठे पाए और एफआर लगा दी। राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के सीकर दौरे पर मिलने नहीं देने पर पूरे थाने के खिलाफ बलात्कार का मुकदमा दर्ज करवाया था। परिवादिया को लोक सेवक को धमकी देने व झूठे केस में फंसाने के आरोप में 2018 में दोषी ठहराया जा चुका था।
मौत से पहले बैंक खातों में करीब एक करोड़ रुपए
परिवादिया कोई नौकरी या व्यवसाय नहीं करती थी। जबकि माता-पिता की गवाही में स्वीकार किया गया कि मृत्यु के समय उसके खातों में 89 लाख से एक करोड़ रुपए थे।
माता-पिता की गवाही में भारी विरोधाभास
परिवादिया के माता-पिता की गवाही आपस में और पुलिस रिकॉर्ड से पूरी तरह मेल नहीं खाई। दोनों ने कई बार अपने बयान बदले। ऐसे में कोर्ट ने इसे अविश्वसनीय माना।
कोर्ट ने दोनों अभियुक्तों को किया बरी
न्यायाधीश रैना शर्मा ने लिखा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में पूरी तरह असफल रहा। साक्ष्य की श्रृंखला कई जगह टूटती है। परिवादिया झूठे मुकदमों की आदि थी। इसलिए दोनों अभियुक्तों को बरी किया जाता है। बता दें कि डॉ मनोहर और गोवर्धन की और से पैरवी अधिवक्ता कुलदीप शर्मा और भंवरलाल जनागल ने की।




