बीकानेर में डेंगू से एक और महिला की मौत!, अब तक 10, भयावहता के बावजूद सिस्टम गंभीर नहीं - Khulasa Online

बीकानेर में डेंगू से एक और महिला की मौत!, अब तक 10, भयावहता के बावजूद सिस्टम गंभीर नहीं

    - कुशालसिंह मेड़तिया की विशेष रिपोर्ट

खुलासा न्यूज, बीकानेर। चिकित्सा विभाग और प्रशासन को आंकड़ा छुपाने की आदत सी बन गई है। सरकारी रिकॉर्ड में अब तक जिले में एक मौत बताई गई है। जबकि हकीकत में डेंगू से मरने वालों की संख्या अब 10 हो चुकी है। आर्मी जवान के बाद अब गंगाशहर की रहने वाली उर्मिला पत्नी प्रेम कुमार पाणेचा उम्र 32 की मौत हुई है। भारतीय किसान संघ के युवा जिला प्रमुख रविन्द्र जाजड़ा बेलासर ने बताया कि उसकी बहिन उर्मिला को आठ दिन पहले तेज बुखार आने पर डेंगू की जांच करवाई। रिपोर्ट में डेंगू पॉजीटिव आया। इसके बाद चिकित्सक परामर्श के अनुसार दवाई लेनी भी शुरू कर दी। दो दिन पहले तबीयत बिगडऩे पर पीबीएम हॉस्पीटल लेकर गए, जहां सीबीसी की जांच भी करवाई। डॉक्टर्स ने उर्मिला को भर्ती नहीं किया और घर भेज दिया। गंगाशहर अपने घर पहुंचते ही उसकी हालत गंभीर हो गई। पीबीएम पहुंचने से पहले रानीबाजार ओवरब्रिज के पास ही उर्मिला ने दम तोड़ दिया। लगातार बढ़ रहे मौत के ग्राफ के बावजूद भी सिस्टम गंभीर नहीं है। बेशर्मी तो यह है कि रिकॉर्ड में इस मौत को भी दर्ज तक नहीं किया है। पोस्ट कोविड की तरह डेंगू रोगियों में भी दिख रहे हैं अन्य बीमारियों के लक्षण जिले में पोस्ट कोविड की तरह ही डेंगू रोगियों में भी बीमारी के बाद जानलेवा लक्षण मिल रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की माने तो इस साल न सिर्फ डेंगू के रोगी तेजी से बढ़े हैं बल्कि कई तरह की कॉम्पलिकेशन भी सामने आ रही हैं। डेंगू से उबर रहे मरीजों में किडनी फेल होने व अन्य तरह के लक्षण सामने आते हैं। हालांकि पहले भी इस तरह के लक्षण कुछ मरीजों में देखने को मिलते थे, लेकिन उनकी संख्या काफी कम होती थी। इस बार ऐसे रोगियों की संख्या बढ़ी है। यहीं वजह है कि डेंगू जानलेवा भी साबित हो रहा है।

एलाइजा टेस्ट का भी संकट, बीमार को भर्ती तो करते हैं लेकिन जांच ठीक होने के बाद स्वास्थ्य विभाग एलाइजा टेस्ट के आधार पर डेंगू रोगी की पुष्टि करता है। इसके आधार पर अब तक जिले में रोगियों की संख्या 547 हो गई हे। इस टेस्ट की सुविधा जिला अस्पताल और सैटेलाइट हॉस्पीटल में ही है। ऐसे में कस्बों में कार्ड रिपोर्ट में डेंगू पॉजिटिव होने पर भी विभाग रोगी को कंफर्म केस नहीं मानता है। पड़ताल में यह भी सामने आया कि सरकारी सिस्टम आंकड़ों पर पर्दा डालने के लिए मरीज को हॉस्पीटल में भर्ती तो कर रहा है, लेकिन उसकी जांच ठीक होने के बाद करवाई जा रही है। यह इसलिए ताकि मौत का आंकड़ा छुपा सके।

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