प्रस्थान बिंदु की हिदायत नही चेते तो सब कुछ खत्म हो सकता है - Khulasa Online

प्रस्थान बिंदु की हिदायत नही चेते तो सब कुछ खत्म हो सकता है

पत्रकार, साहित्यकार हरीश बी. शर्मा की कृति ‘प्रस्थान बिंदूÓ का लोकार्पण स्थानीय तोलाराम बाफना एकेडमी के भंवरी देवी सभागार में रविवार को हुआ।कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ रंगकर्मी, पत्रकार व साहित्यकार मधु आचार्य ‘आशावादी’ ने की। मुख्य अतिथि प्रख्यात कवि-कथाकार अनिरूद्ध उमट व मुख्य वक्ता के रूप में पत्रकार-आलोचक धीरेन्द्र आचार्य उपस्थित रहे।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रख्यात उपन्यासकार अनिरुद्ध उमट ने कहा कि प्रस्थान बिंदु इस शहर की परंपरा को जीने का दस्तावेज है। यह किताब इस बात की हिदायत है कि अगर हम अभी भी नहीं चेते तो सब कुछ खत्म हो सकता है। बहुत कुछ तो खत्म हो चुका।इस शहर की समृद्ध साहित्य विरासत के स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि आपने इस किताब को नहीं समझा गया तो आपके लिये भी यूक्रेन दूर नहीं है। अनिरूद्ध उमट ने कहा एक ऐसे समय में जहां साहित्य में आलोचना की स्वीकार्यता पर ही प्रश्र चिन्ह लगाये जा रहे हैं, ये पुस्तक वास्तव में एक प्रस्थान बिंदु है। विमर्श और असहमतियां साहित्य के संवद्र्धन में महत्ती भूमिका निभाती है। यह पुस्तक एक रचनाकार का सत्याग्रह है। कार्यक्रम के अध्यक्ष मधु आचार्य ‘आशावादीÓ ने कहा कि ये पुस्तक आलोचना विधा से आम पाठक को जोड़ेगी। समकालीन आलोचकों ने जहां आलोचना की पुस्तकों को इतना जटिल कर दिया कि वे केवल साहित्यकारों के लिए ही बनी रह गई। ऐसे में यह पुस्तक पाठकों के साथ ही नए रचनाकारों के लिए भी नये रास्ते खोलने वाले साबित होगी।आचार्य ने कहा कि जब हम जन तक सृजन अभियान की बात करते हैं तो न सिर्फ श्रेष्ठ साहित्य को आम जन तक पहुंचाना हमारा ध्येय होता है बल्कि गम्भीर पाठक वर्ग भी तैयार करना हमारी जिम्मेदारी होती है। इस किताब के प्रकाशन का यही उद्देश्य है।मुख्य वक्ता पत्रकार धीरेन्द्र आचार्य ने कहा की ये पुस्तक पाठकों और रचनाकारों दोनों के लिए समान रूप से अनिवार्य पुस्तक है। अगर आप पाठक हैं और कुछ लिखना चाहते हैं तो ये पुस्तक आपको बताती है कि कैसे शुरू करना है, और यदि आप लेखक हैं तो ये पुस्तक आपको किस दिशा में, किसी गति से बढऩा है समझाती है। उन्होंने पेंटर धर्मा के बनाये कवर पेज की परिकल्पना पर कहा कि यह कवर पेज भी बहुत कुछ संकेत देता है। कृति के लेखक हरीश बी. शर्मा ने बताया की जन तक सृजन का जो हमारा ध्येय है, ये पुस्तक उसी का परिणाम है। इस पुस्तक में ये बताने का प्रयास किया गया है कि साहित्य रानी बेतिया का महल नहीं है। एलिट क्लास या केवल फैशन के तौर पर किताबे रखने वालों के लिए नहीं, वरन रचने और अपने रचे को जीन वाले से ही साहित्य जीवित है।बाफना स्कूल के सीईओ डॉ. परमजीत सिंह वोहरा ने कहा कि इस तरह की पुस्तकों से निश्चित रूप से बदलाव आएगा। बशर्ते इसे पढा जाए। उन्होंने कहा कि स्कूलों में सिर्फ पढ़ाने से कुछ नहीं होगा, शिक्षक को बहुत कुछ करना होगा और इसी वजह से हमारा स्कूल इस तरह की गतिविधियां आयोजित करता है।कार्यक्रम में स्वागत उद्बबोधन देते हुए कवि-कथाकार सीमा भाटी ने कहा कि ये किताब पाठकों के साथ ही नये रचनाकारों के लिए भी एक नायाब दस्तावेज जैसी रहेगी। कवयित्री-कथाकार मनीषाआर्य सोनी ने लेखक परिचय देेते हुए बताया की पत्रकारिता और साहित्य में समान रूप से सक्रिय हरीश बी. शर्मा ने केवल अपनी पत्रकारिता से अपितु साहित्य से भी समाज में बड़े बदलाव के लिए प्रयासरत हैं। ऐसे में उनकी यह आलोचना की कृति साहित्य की शुचिता को अक्षुण्ण रखने में नए पाठकों और रचनाकारों को उनकी भूमिका तय करने में सहायता करेगी।कार्यक्रम में लोकार्पण में नवाचार करते हुए फूल वाले गमलों में किताबें अतिथियों को भेट की गई। कार्यक्रम का संचालन कवयित्री-कथाकार ऋतु शर्मा ने किया। आभार वरिष्ठ कथाकार राजेन्द्र जोशी ने जताया।’प्रस्थान बिंदु’ कृति पत्रकार अनुराग हर्ष को समर्पित है। लोकार्पण के बाद पहली कृति लेखक हरीश बी.शर्मा ने अनुराग हर्ष को अर्पित की।इस अवसर पर बाफना स्कूल सभागार में शहर के साहित्य, कला, व्यवसाय, राजनीति व पत्रकारिता जगत से जुड़े अनेक गणमान्य लोग मौजूद थे।
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