
इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स पर सेमिनार आयोजित





बीकानेर। इंटरनेट ऑफ थिंग्स पर जैन कन्या महाविद्यालय में एक सेमिनार का आयोजन किया गया जिसमें चंडीगढ़ से प्रोफेसर गौरव कुमार ने कॉेलेजी छात्राओं को जानकारी देते हुए कहा कि इंटरनेट पर रिमोट मॉनीटरिंग की अनुमति देता है इसके द्वारा स्मार्ट मीटर का उपयोग जल उपचार प्रणाली का विश्लेषण करने और किसी भी समय एवं कहीं से भी इसे नियंत्रित करने के लिये किया जा सकता है। फसलों हेतु पानी, नल के पानी की गुणवत्ता, नदी में फैंके जाने वाले अपशिष्ट की मात्रा या रिसाव का पता लगाने और यहाँ तक कि जलाशयों में जल स्तर की विविधता आदि की निगरानी के लिये भी किया जा सकता है।इंटरनेट ऑफ थिंग्स एक वैसी नेटवर्किंग है जिसमें आपके उपयोग की सभी चीजें टेलीविजन से लेकर मोबाइल तक इंटरनेट से जुड़ी होती है. उदाहरण के लिए, अगर आप इंटरनेट ऑफ थिंग्स के दायरे में हैं तो आपका डिवाइस आपके घर और किचन में रखे अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को कमांड देता है.इस तकनिकी से हम अपने दैनिक जीवन में इस्तेमाल कर रहे सभी पदार्थों को डिवाइस विशिष्ट ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ इंटरनेट से जोड़कर स्मार्ट बनाकर उनसे मनोवांछित कार्य करा सकते हैं। इन उपकरणों में सेंसर द्वारा एकत्र डेटा की बड़ी मात्रा क्लाउड पर इंटरनेट के माध्यम से दूरस्थ सर्वर पर रखे जाते हैं . इस डेटा को विभिन्न संगठनों, व्यापार,सूचना के प्रचार और प्रसार के लिए उपयोग में लाया जाएगा।अगर उसे पता चल गया कि वह चक्रवात वाले एरिया की तरफ बढ़ रहा है तो उसे चेतावनी देकर उसे उधर जाने से मना कर सकता है.। इंटरनेट ऑफ थिंग्स तकनीक तीन चरणों में कार्य करती है इसके अलावा, एक स्मार्ट शहर के लिये आईओटी ऊर्जा आधारित स्मार्ट पानी और ऊर्जा मीटर कुछ ऐसे उदाहरण हैं, जिससे वे लाभान्वित हो सकते हैं। भारत के आईओटी बाज़ार का दूरसंचार, स्वास्थ्य, वाहन, घरों, शहरों और कंप्यूटर जैसे क्षेत्रों अगले पाँच वर्षों में 100 स्मार्ट शहरों के विकास के लिये $ 1 बिलियन का सरकारी निवेश भी उद्योगों को आईओटी अपनाने हेतु प्रोत्साहित करेगा। इस मौके पर गोरव कुमार को नरेन्द्र कोचर, विजय कोचर व रेखा बोथरा ने प्रतिक चिन्ह भेंट किया।इस मौके पर पंज दाधीच व संध्या सक्सेना ने पुष्पगुच्छा देकर स्वागत किया वहीं मंच का संचालन अरुण सक्सना, पदमा जोशी ने किया।

