
बीकानेर में प्री कन्सेप्शन लिंग चयन का खेल तो नहीं चल रहा ?, होगी पड़ताल




– आईवीएफ फर्टिलिटी केन्द्रों से कहीं बेटे ज्यादा तो नहीं हो रहे ? होगी पड़ताल
पीसीपीएनडीटी एक्ट 1994 का प्रशिक्षण आयोजित
खुलासा न्यूज़, बीकानेर। बेटी बचाओ-बेटी पढाओ योजना के अंतर्गत चिकित्सा विभाग व महिला अधिकारिता विभाग के संयुक्त तत्वावधान में चिकित्सधिकारियों को पीसीपीएनडीटी एक्ट 1994 के प्रमुख प्रावधानों का प्रशिक्षण दिया गया। सीएमएचओ डॉ बी.एल. मीणा ने बताया कि गर्भ में भ्रूण के लिंग जांच या कन्या भ्रूण ह्त्या सम्बन्धी शिकायत या सूचना टोल फ्री न. 108 व 104 तथा व्हाट्सएप के माध्यम से मोबाइल न. 9799997795 पर दी जा सकती है। शिकायत सही पाए जाने पर मुखबिर योजना के तहत ढाई लाख रूपए ईनाम का प्रावधान है। पीसीपीएनडीटी समन्वयक महेंद्र सिंह चारण ने चिकित्सकों को सतर्क रहते हुए उन दम्पतियों की सूचना उपलब्ध करवाने को कहा जिनके पहले से 2 या अधिक बेटियाँ हैं और जो गर्भ में भ्रूण के लिंग जांच सम्बन्धी पड़ताल करते हों। बीसीएमओ लूणकरणसर डॉ हिरमनाथ सिद्ध द्वारा मुद्दा उठाया गया कि आईवीएफ केन्द्रों से होने वाले बच्चों में ज्यादातर लड़के ही नजर आते हैं। कहीं प्री कन्सेप्शन लिंग चयन का खेल तो नहीं चल रहा ? इस पर सीएमएचओ डॉ मीणा ने बीकानेर में इस प्रकार लाभान्वित दम्पत्तियों व प्रमुख आईवीएफ केन्द्रों के डेटा विश्लेषण करने के निर्देश पीसीपीएनडीटी प्रकोष्ठ को दिए।
क्या कहता है जन्म पूर्व लिंग परीक्षण का कानून
1. गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम, 1994 के तहत गर्भाधारण पूर्व या बाद लिंग चयन और जन्म से पहले कन्या भ्रूण हत्या के लिए लिंग परीक्षण करना गुनाह है.
2. भ्रूण परीक्षण के लिए सहयोग देना व विज्ञापन करना कानूनी अपराध है. इसके तहत 3 से 5 साल तक की जेल व 10 हजार से 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है.
3. गर्भवती स्त्री का जबर्दस्ती गर्भपात करवाना अपराध है. ऐसा करने पर आजीवन कारावास की सजा हो सकती है.




