
सीलियक रोगियों के लिए सौ फीसदी परहेज की इलाज




सीलियक रोग क्लिनिक का शुभारंभ
बीकानेर। गेहूं व जौ की एलर्जी के रोगियों के लिये खुश खबर है। अब उन्हें इस रोग के इलाज के लिये बड़े शहरों में नहीं जाना पड़ेगा। बल्कि बीकानेर में ही डॉ श्याम अग्रवाल हॉस्पीटल एंड रिसर्च सेन्टर में इस इलाज की सुविधा मिल सकेगी। जिसका शुभारंभ शनिवार को सन्तोकबा दुर्लभजी अस्पताल जयपुर के सिलियिक रोग व बच्चों में गेस्ट्रो रोग विशेषज्ञ डॉ ललित बरदिया ने किया। इस मौके पर बरदिया ने कहा कि सीलियक बीमारी में छोटी आँत में खराबी और सूजन हो जाती है। इस वजह से पोषक तत्वों का अवशोषण कम हो जाता है। दस्त हो सकते हैं , वजन तेजी से गिर सकता है या वजन बढ़ता ही नहीं है और हमेशा पेट दर्द बना रहता है। कुछ बच्चों को दर्द तो नहीं होता लेकिन उनका वजन नहीं बढ़ता और कमजोरी बनी रहती है। इसकी जाँच चिकित्सक से करा लेनी चाहिये। वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ महेश शर्मा ने कहा कि सीलियक रोगियों के लिए सौ फीसदी परहेज की इलाज है। वल्र्ड में सौ में से एक को गेहूं से एलर्जी है। शर्मा ने बताया कि लोगों को इस रोग के बारे में बहुत कम जानकारी है। स्वास्थ्य विभाग के पास फिलहाल ऐसा कोई डेटा नहीं है जिससे यह पता चले कि जिले में या फिर प्रदेश में सीलियक बीमारी के कितने रोगी हैं। अस्पताल के सीलियक प्रभारी डॉ नरेन्द्र पारीक ने बताया कि ताजा आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर भारत में प्रति 100 में एक व्यक्ति इस बीमारी से जूझ रहा है। आनुवंशिकी इस स्थिति के प्रसार में एक प्रमुख भूमिका निभाती है और इसलिए यह समस्या बच्चों में भी हो सकती है। निदेशक डॉ श्याम अग्रवाल ने बताया कि इस रोग की पुष्टि के बाद गेहूं से बनी हर वह खाद्य वस्तु को खाना पूरी तरह से रोकना होगा। अगर मरीज ऐसा नहीं करता है तो उन्हें इस रोग से होने वाले प्रभावों से जूझना होगा। उन्होंने बाजरे से बने बिस्कुट के बारे में जानकारी दी। इस अवसर पर डॉ हितेष चौहान,डॉ अमित पेडिवाल,अस्पताल के पैरामेडिकल स्टाफ रवि आचार्य,गीतेष अग्रवाल,त्रिलोक पंवार,शांतिलाल भोजक,खालिद,निखिल अग्रवाल,तन्मय सिह आदि भी उपस्थित रहे।



