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पीबीएम हार्ट हॉस्पिटल में गबन,सीएम तक पहुंची शिकायत

बीकानेर। हमें तो अपनों ने लूटा गेरों में कहा दम था,कश्ती वहां डूबी जहां पानी का बहाव कम था। कुछ इस तरह की युक्ति संभाग के सबसे बड़े पीबीएम अस्पताल पर चरितार्थ हो रही है। जहां अस्पताल के कार्मिक व आला चिकित्साधिकारियों की मिली भगती से राजस्व का चूना लगाया जा रहा है। इस बार मामला हल्दीराम मूलचंद हार्ट अस्पताल का है। जहां अस्पताल के वरिष्ठ ह्दय रोग चिकित्सक व केशियर की मिलीभगत से बाईपास सर्जरी में गबन किया गया है। जानकारी के अनुसार मरीजों के उपयोग में ली जाने वाली सामग्री को न तो रिकार्ड में लिया जाता है और न ही उपयोग में। जबकि उनका उपयोग कर स्वयं प्रमाणित बिलों से भुगतान उठा रहे है। जिसकी शिकायत मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को की गई है। शिकायत के बाद राज्य सरकार हरकत में आई है और मामले की सच्चाई जानने के लिये गुपचुप तरीके से जांच शुरू कर दी है। शिकायतकर्ता सुदर्शना नगर निवासी मनीष सोनी ने मुख्यमंत्री को भेजी शिकायत में स्पष्ट किया है कि अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ देवेन्द्र अग्रवाल ने अपने पद का दुरपयोग करते हुए लेखापाल मनोज देराश्री के साथ मिलकर मुख्यमंत्री सहायता कोष राशि में ही सैंधमारी कर रहे है। उन्होंने बताया कि डॉ अग्रवाल इसी विभाग के संबंधित फर्मों के बिल स्वयं के हस्ताक्षर करके प्राप्त करते है व स्टोर इन्चार्ज व अन्य कार्य भी इनके द्वारा ही सम्पादित किये जाते है,जो इनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। हालात ये है कि मरीज के इलाज में निशुल्क दवा,मेडिकल रिलिफ सोसायटी व लाईफ सेंविग मेडिकल स्टोर से क्रय की जाने वाली सामग्री में भी भ्रष्टाचार किया जाता है। जो दवा व इलाज में उपयोग में आने वाली सामग्री सरकार की ओर से निशुल्क दी जाती है। उसका भी क्रय लाईफ सेविग मेडिकल स्टोर से कर मरीजों को लूटा जाता है। मजे की बात तो ये है कि मेडिकल रिलीफ सोसायटी व लाईफ सेंविग मेडिकल स्टोर का कै शियर एक ही व्यक्ति है।
बिना कार्यालय आदेश बिलों का भुगतान
अचरज की बात तो ये है कि बिना मांग पत्र,बिना कार्यालय आदेश के समस्त बिलों का भुगतान लेखा शाखा द्वारा कर दिया गया। न तो लेखा शाखा द्वारा प्रति मरीज पैकेज की राशि 55000 के अनुरूप यह बताया कि गया कि कितनी राशि का क्या आईटम लगा है और न ही उनके मूल्य को बताया गया है।
एक ही प्रकार की सर्जरी,आईटम में भिन्नता
गौर करने वाली बात ये है कि 2010 में किये गये बाईपास सर्जरी में विभिन्न श्रेणी के मरीजों में बीपीएल के 14 मरीज,मुख्यमंत्री सहायता कोष के 2 मरीज,व अन्य श्रेणी के 23 मरीजों के बाईपास सर्जरी में उपयोग में ली गई सामग्री/सर्जिकल आईटम व इन्प्लान्टस में काफी भिन्नता है।
बीपीएल श्रेणी के बाईपास सर्जरी में अधिकतम आईटम 94,न्यूनतम 66 का उपयोग किया गया,जिस पर अधिकतम 141564 रूपये तथा न्यूनतम 96,388 रूपये लगे। वहीं मुख्यमंत्री सहायता कोष श्रेणी के बाईपास सर्जरी में अधिकतम आईटम 69 ,न्यूनतम 66 का उपयोग किया गया,जिस पर अधिकतम 54999 रूपये तथा न्यूनतम 59,990 रूपये लगे। उधर अन्य श्रेणी के बाईपास सर्जरी में अधिकतम आईटम 68,न्यूनतम 5 का उपयोग किया गया,जिस पर अधिकतम 55001 रूपये तथा न्यूनतम 54994 रूपये लगे।
ये है नियम
नियमानुसार किसी भी सामग्री की मात्रा,प्रकार,फर्मों के बिलों में अंकित बैच नम्बर,एक्सपायरी दिना ंक अंकित है या नहीं। अगर भंडारपाल द्वारा सहमति प्राप्त करने में अपनी सहमति दी जाती है। तो लाईफ सेविंग मेडिकल स्टोर में उपरोक्त सर्जिकल इन्पलान्ट व अन्य सामग्री जिस फर्म से क्रय की गई है। इस पर भंडारपाल के प्राप्ति के हस्ताक्षर होने चाहिए। परन्तु ऐसा नहीं है। खरीद व प्राप्ति पर अलग अलग अधिकारी या कार्मिक के हस्ताक्षर होने चाहिए। किन्तु ऐसा नहीं किया जा रहा है,इन पर हस्ताक्षर डॉ अग्रवाल ही कर रहे है। जो संदेह दर्शाता है कि सामग्री आई भी है या नहीं।

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