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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक मेें हुए कई बड़े फैसले, पढ़े पूरी खबर …

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक मेें हुए कई बड़े फैसले, पढ़े पूरी खबर …

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में आज मंत्रिमंडल की बैठक आयोजित की गई, जिसमें अशांत क्षेत्रों में किराएदारों के अधिकारों के संरक्षण के लिए विधेयक लाने, एयरोस्पेस एवं रक्षा विनिर्माण तथा सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में नई नीतियों के अनुमोदन सहित कई महत्वपूर्ण फैसले किए गए।

बैठक के बाद मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ और मंत्री जोगाराम पटेल ने संयुक्त रूप से प्रेस को जानकारी दी और सरकार की नई औद्योगिक व तकनीकी योजनाओं का खाका पेश किया। मंत्रियों ने बताया कि प्रदेश में जल्द ही राजस्थान एयरोस्पेस और डिफेंस पॉलिसी लागू की जाएगी।

अशांत क्षेत्रों में स्थायी निवासियों की संपत्तियों एवं किरायेदारों के अधिकारों के संरक्षण के लिए विधेयक
दि राजस्थान प्रोहिबिशन ऑफ ट्रांसफर ऑफ इम्मूवेबल प्रॉपर्टी एंड प्रोविजन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ टेनेंट्स फ्रॉम एविक्शन फ्रॉम प्रिमाइसेज इन डिस्टर्ब्ड एरियाज बिल, 2026′ के प्रारूप को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी दी गई। देखा जा रहा है कि राज्य के कई क्षेत्रों में जनसंख्या असंतुलन की स्थिति बनने से सार्वजनिक व्यवस्था, सद्भाव एवं मेलजोल से रहने के सामुदायिक चरित्र पर प्रभाव पड़ रहा है, जिससे उस क्षेत्र में अशांति की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। ऐसी परिस्थिति में उस क्षेत्र के स्थायी निवासियों को अपनी स्थायी संपत्तियां कम दामों पर बेचने को मजबूर होना पड़ता है।

इस विधेयक के पारित होने के बाद राज्य में अशांत क्षेत्रों में स्थायी निवासियों की संपत्तियों एवं उक्त संपत्तियों पर किरायेदारों के अधिकारों को संरक्षण प्रदान किया जा सकेगा एवं राज्य में सामुदायिक सद्भावना एवं सामाजिक संरचना कायम रखी जा सकेगी। इस विधेयक को अब विधानसभा के आगामी सत्र में रखा जाएगा।

राजस्थान एयरोस्पेस एंड डिफेंस पॉलिसी-2025
राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में आज राजस्थान एयरोस्पेस एंड डिफेंस पॉलिसी-2025 का अनुमोदन किया गया।
यह नीति प्रदेश में रक्षा तथा अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी को प्रोत्साहन देने के साथ ही राजस्थान को एयरोस्पेस और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग का महत्वपूर्ण हब बनाने की दिशा में सहायक होगी।

इस क्षेत्र में बड़े निवेश को आकर्षित करने के साथ-साथ एमएसएमई, स्टार्टअप्स और नवाचार-आधारित इकोसिस्टम के विकास पर केंद्रित यह नीति आर्थिक विकास और रोजगार सृजन को भी बढ़ावा देगी।

इस नीति के अंतर्गत प्रदेश में एयरोस्पेस एंड डिफेंस क्षेत्र के विनिर्माण उद्यमों, उपकरण एवं घटक निर्माताओं, आपूर्तिकर्ताओं, प्रिसीजन इंजीनियरिंग इकाइयों और मेंटेनेंस, रिपेयर एवं ओवरहॉलिंग से जुड़ी इकाइयों की स्थापना को बढ़ावा दिया जाएगा।

इस नीति के अंतर्गत विनिर्माण परियोजनाओं के लिए न्यूनतम 50 करोड़ रुपए से 300 करोड़ रुपए तक अचल पूंजी निवेश को लार्ज, 300 करोड़ से 1 हजार करोड़ को मेगा और 1 हजार करोड़ रुपए से अधिक को अल्ट्रा मेगा परियोजनाओं की श्रेणी में रखा जाएगा।

सर्विस सेक्टर के लिए 25 करोड़ से 100 करोड़ रुपए तक अचल पूंजी निवेश वाली परियोजनाएं लार्ज, 100 करोड़ से 250 करोड़ रुपए तक मेगा और 250 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं को अल्ट्रा मेगा की श्रेणी में रखा जाएगा।

नीति के तहत इन ए एंड डी पार्कों में लगने वाले पात्र एयरोस्पेस एवं डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और सेवा उद्यमों को एसेट क्रिएशन इंसेंटिव के रूप में 7 वर्षों तक राज्य कर के 75 प्रतिशत पुनर्भरण के निवेश अनुदान, विनिर्माण उद्यमों के लिए 20 से 28 प्रतिशत और सर्विस सेक्टर के 14 से 20 प्रतिशत तक 10 वर्षों में वितरित पूंजीगत अनुदान अथवा 10 वर्षों तक वार्षिक किश्तों में देय 1.2 प्रतिशत से 2 प्रतिशत तक टर्नओवर लिंक्ड प्रोत्साहन में से किसी एक विकल्प का चयन करने की सुविधा दी जाएगी।

इसके अतिरिक्त इन प्रोत्साहनों पर टॉप-अप के रूप में 10 से 15 प्रतिशत एम्प्लॉयमेंट बूस्टर, पहली तीन मेगा अथवा अल्ट्रा मेगा इकाइयों के लिए 25 प्रतिशत सनराइज बूस्टर, 10 प्रतिशत एंकर बूस्टर, 20 प्रतिशत थ्रस्ट बूस्टर जैसे लाभ भी प्रदान किए जाएंगे।

रीको से भूमि लेने वाले मेगा, अल्ट्रा मेगा विनिर्माण उद्यमों को 10 वर्षों तक फ्लेक्सिबल लैंड पेमेंट और 5 वर्षों के लिए 25 प्रतिशत ऑफिस स्पेस हेतु लीज रेंटल सब्सिडी का लाभ भी देय होगा।

पॉलिसी में विशेष इंसेंटिव्स का भी प्रावधान किया गया है, जिनमें बैंकिंग, व्हीलिंग और ट्रांसमिशन चार्जेज में छूट, फ्लेक्सिबल लैंड पेमेंट मॉडल, ऑफिस-स्पेस लीज रेंटल सब्सिडी जैसे प्रावधान तथा कैप्टिव पावर प्लांट में किए गए निवेश का 51 प्रतिशत पात्र स्थायी पूंजीगत निवेश में शामिल करना शामिल है।

इसके साथ ही उद्योगों को दीर्घकालिक राहत देने के लिए 7 वर्षों तक विद्युत शुल्क से शत-प्रतिशत छूट, 7 वर्षों तक मंडी शुल्क अथवा बाजार शुल्क का शत-प्रतिशत पुनर्भरण, स्टांप शुल्क, रूपांतरण शुल्क में 75 प्रतिशत छूट तथा 25 प्रतिशत पुनर्भरण की व्यवस्था भी की गई है।

ग्रीन इंसेंटिव, स्किल एवं ट्रेनिंग इंसेंटिव तथा इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी क्रिएशन इंसेंटिव जैसे प्रावधान इस नीति को और अधिक आकर्षक बनाते हैं।

उम्मीद है कि राजस्थान एयरोस्पेस एंड डिफेंस पॉलिसी-2025 से राज्य में एयरोस्पेस एवं डिफेंस सेक्टर में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित होगा, उच्च तकनीक-आधारित उद्योग स्थापित होंगे और युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

राजस्थान सेमीकंडक्टर पॉलिसी-2025
प्रदेश की पहली राजस्थान सेमीकंडक्टर पॉलिसी-2025 को आज कैबिनेट द्वारा मंजूरी दी गई। यह नीति राज्य को सेमीकंडक्टर विनिर्माण, डिजाइन, पैकेजिंग तथा संबद्ध इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में देश का प्रमुख गंतव्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस नीति का प्रमुख उद्देश्य सेमीकंडक्टर और सेंसर्स के क्षेत्रों में एंकर निवेश को आकर्षित करना, विश्व-स्तरीय सेमीकंडक्टर पार्कों का विकास करना तथा फैबलेस डिजाइन पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाना है।

इसके साथ ही सेमीकंडक्टर क्षेत्र में प्रौद्योगिकी एवं कौशल संवर्धन, रिसर्च एवं डेवलपमेंट तथा टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को भी इस नीति के माध्यम से बढ़ावा दिया जाएगा।

नीति के अंतर्गत सेमीकंडक्टर पार्कों में अक्षय ऊर्जा, जल दक्षता, पुनर्चक्रण और सर्कुलर पहलों के माध्यम से ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्साहित करने पर विशेष जोर दिया जाएगा, ताकि औद्योगिक विकास पर्यावरण के अनुकूल हो सके।

इस नीति के अंतर्गत लगने वाली पात्र इकाइयों का सिंगल विंडो प्रणाली के माध्यम से समयबद्ध अनुमोदन सुनिश्चित किया जाएगा।

नीति के अंतर्गत इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत अनुमोदित परियोजनाओं को आकर्षक प्रोत्साहन प्रदान किए जाएंगे। इनमें सात वर्षों तक विद्युत शुल्क से शत-प्रतिशत छूट, स्टांप शुल्क, भू-रूपांतरण शुल्क में 75 प्रतिशत छूट तथा 25 प्रतिशत पुनर्भरण शामिल है।

इसके अतिरिक्त भारत सरकार द्वारा इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन योजना के अंतर्गत स्वीकृत पूंजी सब्सिडी के 60 प्रतिशत के समतुल्य पूंजी अनुदान राज्य सरकार द्वारा प्रोत्साहन स्वरूप दिए जाने का प्रावधान किया गया है।

बैंकों अथवा वित्तीय संस्थानों से लिए गए टर्म लोन पर 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान भी उपलब्ध होगा, जिससे पूंजीगत निवेश को बढ़ावा मिलेगा।

पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास को प्रोत्साहित करने के लिए पर्यावरणीय परियोजनाओं की लागत का 50 प्रतिशत तक प्रतिपूर्ति, कैप्टिव पावर प्लांट हेतु सात वर्षों तक विद्युत शुल्क से शत-प्रतिशत छूट तथा राजस्थान ग्रीन रेटिंग सिस्टम के अंतर्गत प्रमाणित इकाइयों को सहमति शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट प्रदान की जा सकेगी।

इसके साथ ही रोजगार सृजन प्रोत्साहन, स्किल एवं ट्रेनिंग इंसेंटिव, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी क्रिएशन इंसेंटिव और क्वालिटी सर्टिफिकेशन इंसेंटिव जैसे अन्य लाभ भी नीति में देय होंगे।

राजस्थान सेमीकंडक्टर पॉलिसी-2025 राज्य में एक प्रतिस्पर्धी और मजबूत सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र का विकास करने में सहायक होगी। यह नीति निवेशकों को आकर्षित कर सेमीकंडक्टर क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देगी और उच्च तकनीक-आधारित रोजगार के नए अवसर सृजित करेगी।

ऊर्जा परियोजनाओं को भूमि आवंटन की स्वीकृति
प्रदेश में अक्षय ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में सौर ऊर्जा परियोजनाओं को बीकानेर जिले की बीकानेर तहसील के ग्राम लाखूसर में 72.06 हेक्टेयर भूमि एवं जैसलमेर जिले की उपनिवेशन तहसील रामगढ़ नं. 2 के ग्राम रामगढ़ उत्तर में 745.41 हेक्टेयर भूमि सशर्त कीमतन आवंटित करने की स्वीकृति मंत्रिमंडल द्वारा प्रदान की गई।

इन निर्णयों से राज्य की सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी और आमजन को सुगम विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

आर.पी.एस.सी. (राजपत्रित स्टाफ) सेवा नियम एवं विनियम, 1991 में संशोधन
राजस्थान लोक सेवा आयोग में उप सचिव (परीक्षा), उप सचिव एवं परीक्षा नियंत्रक के पदनाम को परिवर्तित कर उप सचिव किया जाने का निर्णय लिया गया है। आर.पी.एस.सी. कार्यालय में मुख्य परीक्षा नियंत्रक (आई.ए.एस.) के पद सृजन के पश्चात परीक्षा नियंत्रण से संबंधित कार्यों का दायित्व मुख्य परीक्षा नियंत्रक द्वारा किया जा रहा है।

इन तीनों पदों के पदनाम परिवर्तन के बाद अब आयोग में उप सचिव स्तर के अधिकारियों का कार्य-विभाजन पदनाम के बजाय आयोग की आवश्यकता के अनुसार किया जा सकेगा।

आर.पी.एस.सी. में सहायक सचिव एवं निजी सचिव संवर्ग से उप सचिव के पद पर पदोन्नति अब क्रमशः 10:1 के अनुपात में की जाएगी। यह निर्णय इन संवर्गों की वर्तमान कैडर स्ट्रेंथ को देखते हुए लिया गया है।

आर.पी.एस.सी. में सचिव अथवा ऐसे कोई भी अधिकारी जो राजस्थान लोक सेवा आयोग सेवा का सदस्य नहीं है, उसका अनुशासनिक अधिकारी अब उसकी संबंधित सेवा का ही प्राधिकारी होगा।

वहीं, आयोग के वरिष्ठ उप सचिव, उप सचिव, सहायक सचिव, निजी सचिव एवं अनुभाग अधिकारी के संबंध में आयोग के अध्यक्ष अथवा उनके द्वारा नामित सदस्य अनुशासनिक प्राधिकारी होंगे तथा राज्यपाल पुनरीक्षण प्राधिकारी होंगे।

सेवा से हटाने अथवा बर्खास्तगी का दंड राज्यपाल की स्वीकृति से ही दिया जाएगा, जबकि सहायक सचिव, निजी सचिव एवं अनुभाग अधिकारी के पदों पर माइनर पेनल्टी सचिव द्वारा लगाई जा सकेगी।

इन सभी प्रावधानों के लिए राजस्थान लोक सेवा आयोग (राजपत्रित स्टाफ) सेवा नियम एवं विनियम, 1991 में संशोधन को आज मंत्रिमंडल द्वारा मंजूरी प्रदान की गई।

राजस्थान सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1971 में संशोधन
राजस्थान सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1971 में किसी भी प्रकार से बाल विवाह में भाग लेने, उसकी संविदा करने अथवा स्वयं बाल विवाह करने वाले सरकारी कर्मचारी को अनुशासनिक कार्रवाई के लिए उत्तरदायी ठहराया गया है।

उक्त नियम में बाल विवाह का अर्थ अब बाल विवाह निरोधक अधिनियम, 2006 के अनुरूप माना जाएगा। इस अधिनियम में बालक की परिभाषा 21 वर्ष से कम आयु के पुरुष तथा 18 वर्ष से कम आयु की महिला के रूप में निर्धारित की गई है।

इसके लिए राजस्थान सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1971 में आवश्यक संशोधन के प्रस्ताव का कैबिनेट द्वारा अनुमोदन किया गया।

23 जनवरी से आयोजित होंगे ग्राम उत्थान शिविर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गरीब, युवा, अन्नदाता एवं नारीशक्ति GYAN के कल्याण के मूल मंत्र को आत्मसात करते हुए राज्य सरकार जल्द ही ‘ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट, GRAM 2026’ का आयोजन करने जा रही है। इसके बारे में भी आज मंत्रिपरिषद में चर्चा की गई।

ग्राम के इस महत्वपूर्ण आयोजन में किसानों और पशुपालकों की सहभागिता सुनिश्चित कर उन्हें विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ देने के क्रम में प्रदेश के प्रत्येक गिरदावर सर्किल पर 23 जनवरी से ग्राम उत्थान शिविरों का आयोजन किया जाएगा।

ये शिविर दो चरणों में आयोजित किए जाएंगे। बसंत पंचमी के शुभ अवसर 23 जनवरी को प्रथम चरण की शुरुआत होगी, जिसमें 24, 25 व 31 जनवरी को शिविर आयोजित किए जाएंगे।

वहीं, दूसरे चरण में 1 फरवरी एवं 5 से 9 फरवरी तक इनका आयोजन होगा। इस प्रकार 10 दिनों तक प्रदेशभर में 2 हजार 839 शिविर प्रातः 10 बजे से सायं 5 बजे तक आयोजित किए जाएंगे।

इन शिविरों से पहले 22 जनवरी को ग्राम सभाओं के माध्यम से ग्रामीणों को ग्राम उत्थान शिविरों में होने वाली गतिविधियों के बारे में विस्तृत जानकारी भी दी जाएगी।

शिविरों में तारबंदी, पाइप लाइन, फार्म पॉन्ड, बैलों से खेती योजना के अंतर्गत प्रोत्साहन राशि की स्वीकृतियां, सॉइल हेल्थ कार्ड वितरण, बीज मिनिकिट वितरण का सत्यापन करने के साथ ही फव्वारा एवं ड्रिप, प्लास्टिक मल्च, सौर पंप संयंत्र इत्यादि की स्वीकृतियां और मुख्यमंत्री कृषक साथी सहायता योजना के आवेदनों सहित अन्य महत्वपूर्ण कार्य किए जाएंगे।

इसी प्रकार स्वामित्व कार्डों का वितरण, नहरों एवं खालों की मरम्मत की आवश्यकताओं का चिन्हीकरण, प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत पंजीकरण एवं युवा स्वरोजगार योजना सहित अन्य कार्य किए जाएंगे।

इन शिविरों में कृषि, उद्यानिकी, कृषि विपणन, डेयरी, पशुपालन, मत्स्य पालन, सहकारिता, जल संसाधन, ऊर्जा, उद्योग, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज सहित 12 विभाग भाग लेंगे।

प्रभारी सचिवगण इन शिविरों का नियमित निरीक्षण कर सतत पर्यवेक्षण करेंगे।

बसंत पंचमी को प्रदेशभर में होगा मेगा पीटीएम का आयोजन
23 जनवरी को बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर राजस्थान शिक्षा के क्षेत्र में एक नया अध्याय लिखने जा रहा है।
इस दिन प्रदेश के सभी राजकीय विद्यालयों में एक साथ मेगा पीटीएम का आयोजन किया जाएगा। इसके बारे में भी आज मंत्रिपरिषद में चर्चा की गई।

यह कार्यक्रम न केवल राज्य का अब तक का सबसे बड़ा शैक्षिक सहभागिता आयोजन होगा, बल्कि अभिभावकों की सहभागिता के मामले में एक नया कीर्तिमान स्थापित करने की दिशा में भी एक निर्णायक कदम होगा।

इस ऐतिहासिक आयोजन में 65 लाख अभिभावकों की सहभागिता होगी, जो 31 अक्टूबर को आयोजित पिछले मेगा पीटीएम में निर्धारित 41 लाख के लक्ष्य से कहीं अधिक है।

बसंत पंचमी के दिन ही मेगा पीटीएम होने से राज्य के सभी राजकीय विद्यालयों में सरस्वती वंदना की जाएगी और कृष्ण भोग का आयोजन किया जाएगा। यह पहल विद्यार्थियों को सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने के साथ-साथ विद्यालयों में सामूहिक सहभागिता एवं सकारात्मक वातावरण को भी सुदृढ़ करेगी।

प्रदेश के सभी पीईईओ एवं यूसीईईओ विद्यालयों में निपुण मेले का आयोजन किया जाएगा।

साथ ही, कक्षा 1 से 5 के लिए निपुण राजस्थान कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसमें निपुण भारत मिशन के अंतर्गत बच्चों की पठन,

लेखन एवं गणना क्षमता को गतिविधियों और प्रदर्शनों के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा।

इससे अभिभावक अपने बच्चों की सीखने की प्रगति को प्रत्यक्ष रूप से समझ सकेंगे।

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