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युवक की हत्या कर नहर में फेंकने के मामले में कोर्ट ने आरोपी को नहीं दी कोई राहत

युवक की हत्या कर नहर में फेंकने के मामले में कोर्ट ने आरोपी को नहीं दी कोई राहत
बीकानेर । मजदूरी के पैसे मांगने पर युवक की हत्या कर शव नहर में फेंकने के मामले में कोर्ट ने आरोपी को कोई राहत नहीं दी है। न्यायाधीश रेणु सिंगला ने आरोपी दीपकराम की तीसरी जमानत याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि मामला
गंभीर है और अभी कई अहम गवाहों के बयान बाकी हैं, इसलिए इस स्तर पर जमानत देना उचित नहीं है।परिवादी गुरूदयाल सिंह निवासी जयमलसर ने पुलिस थाना नाल में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी कि उसका बेटा ओमप्रकाश हरबंस सिंह बावरी के खेत में मजदूरी
करता था। तीन दिसंबर 2024 को हरबंस सिंह का पुत्र दीपक उसे मूंगफली निकलवाने के बहाने मोटरसाइकिल पर अपने साथ ले गया, लेकिन वह वापस नहीं लौटा। लगातार पूछताछ के बाद भी जब कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो 10 दिसंबर 2024 को
गुमशुदगी दर्ज करवाई गई। बाद में बज्जू गांव के सीएचसी में रखी एक अज्ञात बॉडी की पहचान ओमप्रकाश के रूप में हुई। पुलिस जांच में सामने आया कि मजदूरी के पैसे मांगने पर ओमप्रकाश के साथ मारपीट कर हत्या की गई। आरोप है कि दीपकराम, हरबंस
सिंह, बाबूलाल व लक्ष्मणराम ने मिलकर उसे बिजली के खंभे पर चढऩे के लिए उकसाया, जहां खंभा टूटने से वह नीचे दब गया और उसकी पसलियों में गंभीर फ्रैक्चर हो गया। मौत के बाद सबूत मिटाने के इरादे से शव को इंदिरा गांधी नहर की 731
आरडी पुलिया में फेंक दिया गया। मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड से सभी आरोपियों की घटनास्थल से नहर तक एक साथ मौजूदगी साबित हुई घटना में प्रयुक्त वाहन जत किया गया और वाहन से मृतक के बाल बरामद किये गए। कोर्ट ने माना
कि अभी डॉटर, अनुसंधान अधिकारी व परिवादी सहित कई अहम गवाहों की गवाही शेष है, जिन्हें प्रभावित किए जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। साथ ही अभियुक्त दीपकराम के खिलाफ पूर्व में भी पुलिस थाना नाल में गौवंश संरक्षण व
पशु क्रूरता अधिनियम सहित अन्य धाराओं में पूर्व में आपराधिक रिकॉर्ड पाया गया।

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