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राजस्थान में हजारों नेताओं के चुनाव लडऩे पर बैन का खतरा, पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकेंगे जानें- क्या है कारण

राजस्थान में हजारों नेताओं के चुनाव लडऩे पर बैन का खतरा, पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकेंगे जानें- क्या है कारण

जयपुर। पिछले पंचायत चुनाव में खर्चे का ब्योरा नहीं देने वाले पंच-सरपंचों के दोबारा चुनाव लड़ने पर रोक लग सकती है। राज्य चुनाव आयोग ऐसे प्रत्याशियों की सूची मंगाने के लिए जल्द ही जिला कलेक्टरों के दिशा-निर्देश जारी कर सकता है। आयोग के नियमों के अनुसार, चुनाव लड़ने वाले सभी प्रत्याशियों को खर्च का विवरण देना अनिवार्य है। ऐसा नहीं करने पर 3 साल तक चुनाव लड़ने पर रोक लगाई जा सकती है। प्रदेश में मार्च-अप्रैल में पंचायती राज चुनाव प्रस्तावित हैं। हाल ही में आयोग ने चुनावी खर्च सीमा बढ़ाई भी थी।

जिला कलेक्टर्स को जारी हो सकते हैं निर्देश
साल 2020 में 21 जिलों की 636 जिला परिषद सदस्यों व 4371 पंचायत समिति सदस्यों के लिए चुनाव कराए गए थे। पंचायत समिति सदस्य के लिए 12,663 व जिला परिषद सदस्य के लिए 1778 प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा था। राज्य चुनाव आयोग के सूत्र बताते हैं कि उस चुनाव में जिन प्रत्याशियों ने रिजल्ट आने के बाद खर्च का ब्योरा नहीं दिया है, उनकी लिस्ट तैयार की जाएगी।

नियमानुसार जिला परिषद, पंचायत समिति सदस्य, मुखिया, सरपंच, पंच और वार्ड सदस्य पद के लिए चुनाव लड़ने वाले हर प्रत्याशियों को रिजल्ट जारी होने के 15 दिनों के भीतर अपने खर्च का विवरण आयोग को देना होता है। अनुमान है कि हजारों प्रत्याशियों ने यह ब्योरा नहीं दिया था।

अब आयोग जिला निर्वाचन अधिकारियों को जल्द ही ऐसे प्रत्याशियों की लिस्ट तैयार करने के लिए आदेश जारी कर सकता है। जिला निर्वाचन अधिकारी यह लिस्ट आयोग को भेजेंगे। इसके बाद चुनाव आयोग ही यह तय करेगा कि चुनावी खर्च नहीं बताने वालों पर क्या कार्रवाई की जाए। नियमानुसार आयोग 3 साल तक चुनाव लड़ने की पाबंदी लगा सकता है।

राज्य चुनाव आयुक्त बोले- 3 साल की पाबंदी लगाने का है नियम
राज्य चुनाव आयुक्त राजेश्वर सिंह का कहना है कि खर्च का ब्योरा नहीं देने पर 3 साल के लिए चुनाव लड़ने पर रोक लगाने का प्रावधान है। आयोग इस संबंध में जल्द ही आदेश जारी करेगा। जिला कलेक्टर्स से विवरण लिया जाएगा।

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