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भारतीय सेना ने जयपुर में 78वां सेना दिवस उत्साह और गौरव के साथ मनाया

भारतीय सेना ने जयपुर में 78वां सेना दिवस उत्साह और गौरव के साथ मनाया

जयपुर। भारतीय सेना ने आज राजस्थान की राजधानी जयपुर में 78वां सेना दिवस अत्यंत भव्य, प्रेरणादायक और देशभक्ति के वातावरण में मनाया। इस ऐतिहासिक अवसर पर आयोजित सेना दिवस परेड ने भारतीय सेना के शौर्य, अनुशासन, आधुनिक शक्ति और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण को सशक्त रूप से प्रदर्शित किया।

सेना दिवस परेड का शुभारंभ प्रेरणा स्थल पर आयोजित श्रद्धांजलि अर्पण समारोह से हुआ। इस अवसर पर जनरल अनिल चौहान, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, तथा जनरल उपेंद्र द्विवेदी, थल सेनाध्यक्ष ने मातृभूमि की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। भारतीय वायुसेना की ओर से एयर वाइस मार्शल एम. बंदोपाध्याय तथा भारतीय नौसेना की ओर से कमोडोर पी. वर्मा ने भी शहीदों को नमन करते हुए पुष्पचक्र अर्पित किए।

यह चौथा अवसर था जब सेना दिवस परेड का आयोजन दिल्ली से बाहर किया गया। इससे पूर्व यह प्रतिष्ठित परेड बेंगलुरु, लखनऊ और पुणे में आयोजित की जा चुकी है। विशेष महत्व की बात यह रही कि सेना दिवस परेड पहली बार किसी सैन्य छावनी के बाहर, जयपुर शहर के महल रोड पर आयोजित की गई। यह परेड अक्षय पात्र सर्कल से प्रारंभ होकर बॉम्बे हॉस्पिटल तक संपन्न हुई। दक्षिण पश्चिमी कमान ने वर्ष 2023 के बाद पहली बार इस गरिमामय परेड की मेजबानी की।

भव्य और अनुशासित परेड के दौरान थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने रीव्यूइंग ऑफिसर के रूप में सलामी ली। महल रोड पर आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत एक भावपूर्ण और गरिमामय समारोह से हुई, जिसमें थल सेनाध्यक्ष ने राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले पांच वीर सैनिकों के परिजनों को मरणोपरांत सेना पदक (वीरता) प्रदान कर उन्हें सम्मानित किया।

सेना दिवस परेड को एक लाख से अधिक उत्साही दर्शकों ने देखा। नागरिकों की जोशीली भागीदारी ने भारतीय सेना और आम जनता के बीच विश्वास, सम्मान और गर्व के गहरे संबंधों को उजागर किया। भारी जनसमूह की उपस्थिति ने समारोह में नई ऊर्जा का संचार किया और यह संदेश दिया कि पूरा राष्ट्र अपने सैनिकों के साथ मजबूती से खड़ा है।

परेड के दौरान भारतीय सेना की भविष्य के युद्धक्षेत्र के लिए तैयार आधुनिक तकनीकों का प्रभावशाली प्रदर्शन किया गया। इसमें यह स्पष्ट रूप से प्रदर्शित हुआ कि सेना स्वदेशी समाधानों को अपनाते हुए वैश्विक सैन्य प्रवृत्तियों से आगे रहने के लिए सतत प्रयासरत है, ताकि तकनीकी रूप से सशक्त रहते हुए राष्ट्र की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।

परेड में 30 से अधिक टुकड़ियों ने भाग लिया, जिनमें सात विशिष्ट मार्चिंग कंटिंजेंट शामिल थीं। इनमें मद्रास रेजिमेंटल सेंटर, राजपूत रेजिमेंटल सेंटर, आर्टिलरी रेजिमेंट, मिक्स्ड स्काउट्स कंटिंजेंट तथा एनसीसी गर्ल्स कंटिंजेंट प्रमुख रहीं। एक ऐतिहासिक पहल के तहत राजराइफल्स और सिख लाइट इन्फैंट्री की भैरव बटालियन की दो विशेष टुकड़ियों ने परेड में भाग लिया। ये टुकड़ियां भारतीय सेना की आधुनिक, चुस्त और घातक युद्ध रणनीति का प्रतीक हैं, जिन्हें सीमाओं पर त्वरित और प्रभावशाली अभियानों के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है। भैरव बटालियनों ने “फाइट स्मार्टर, स्ट्राइक फास्टर” की भावना को साकार करते हुए आधुनिक युद्धक्षेत्र में भारत के दृढ़ संकल्प को प्रदर्शित किया।

सेना के एलसीएच, एएलएच, डब्ल्यूएसआई और अपाचे हेलीकॉप्टरों की शानदार फ्लाई-पास्ट ने परेड की भव्यता को और भी बढ़ा दिया और दर्शकों को रोमांच से भर दिया।

परेड में नेपाल मिलिट्री बैंड की सहभागिता ने भारत और नेपाल की सेनाओं के बीच गहरे ऐतिहासिक संबंधों, आपसी विश्वास और साझा सैन्य परंपराओं को सशक्त रूप से दर्शाया। यह सहभागिता दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक निकटता, सहयोग और सौहार्द का प्रतीक बनी। इसके अतिरिक्त, परेड के दौरान सात मिलिट्री बैंड्स ने देशभक्ति से ओतप्रोत प्रस्तुतियां दीं। इनमें सिख, डोगरा, मराठा लाइट इन्फैंट्री, बीईजी, आर्टिलरी, ईएमई केंद्र तथा एनसीसी बालक-बालिकाओं का संयुक्त बैंड शामिल था।

78वीं सेना दिवस परेड में वाहन-आधारित टुकड़ियों, आधुनिक उपकरणों और अत्याधुनिक तकनीकों का भव्य प्रदर्शन किया गया। यह आम जनता के लिए एक दुर्लभ अवसर था, जब वे भारतीय सेना की वह आधुनिक सैन्य शक्ति देख सके, जो देश की सुरक्षा की मजबूत ढाल है। परेड में टी-90, अर्जुन टैंक, बीएमपी-2, स्मर्च, के-9 वज्र, ग्रैड बीएम रॉकेट, धनुष, एटैग्स, दिव्यास्त्र और यूएलआरएस जैसी प्रणालियों के साथ-साथ उन्नत वायु रक्षा प्रणालियां जैसे उन्नत शिल्का और शक्तिबाण प्रदर्शित की गईं।

इसके साथ ही ऑल टेरेन वाहन, रोबोटिक म्यूल, वाहन-आधारित इन्फैंट्री मोर्टार सिस्टम, मिलन मिसाइल, आधुनिक मानवरहित प्रणालियां जैसे प्रबल काउंटर-यूएएस, ड्रोन जैमिंग और स्पूफर सिस्टम, तथा स्विच यूएवी, संजय, प्रलय और बाज जैसे सशस्त्र ड्रोन भी प्रदर्शित किए गए। ऑपरेशन सिंदूर में प्रयुक्त ब्रह्मोस, पिनाका, यूएलएच एम777, आकाश मिसाइल प्रणाली, एल-70 गन, विशेष मोबिलिटी वाहन और क्विक रिएक्शन फोर्स वाहन भी परेड का हिस्सा रहे, जिससे इसकी ऑपरेशनल प्रासंगिकता और अधिक सुदृढ़ हुई।

कार्यक्रम के दौरान मोटरसाइकिल डिस्प्ले में सेना के जांबाज जवानों ने अद्भुत संतुलन, अनुशासन और कौशल का प्रदर्शन किया, जिसे दर्शकों ने करतल ध्वनि से सराहा। वहीं आर्मी कैनाइन डिस्प्ले में प्रशिक्षित श्वानों द्वारा किए गए अभ्यासों ने सुरक्षा, खोज और अभियानों में उनकी अहम भूमिका को उजागर किया।

परेड में प्रस्तुत थीम आधारित झांकियों ने भारतीय सेना के तकनीकी आधुनिकीकरण और राष्ट्र निर्माण में योगदान को दर्शाया। इनमें ऑपरेशन सिंदूर, सेना के डिकेड ऑफ़ ट्रांसफॉर्मेशन और नई पीढ़ी के उपकरणों को प्रदर्शित किया गया। दूसरी झांकी, राजस्थान सरकार की ओर से ललित कला अकादमी द्वारा प्रस्तुत की गई, जिसमें राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य को दर्शाया गया।

कार्यक्रम के दौरान कालबेलिया और गैर लोकनृत्य तथा मद्रास रेजिमेंट की चेंडा सांस्कृतिक टीम की प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इन प्रस्तुतियों ने भारत की विविध सांस्कृतिक धरोहर और सेना तथा जनता के बीच गहरे संबंधों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।

सेना दिवस समारोह के दौरान थल सेनाध्यक्ष ने अपने संबोधन में सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के त्याग और बलिदान को नमन किया। उन्होंने भारतीय सेना के भविष्य के लिए तैयार, तकनीक-संचालित और आत्मनिर्भर स्वरूप पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता अब विकल्प नहीं, बल्कि रणनीतिक आवश्यकता है, और ‘मेक इन इंडिया’ के अंतर्गत विकसित हथियार प्रणालियां इसका सशक्त प्रमाण हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले वर्षों में सेना नेटवर्किंग और डेटा सेंट्रिसिटी पर विशेष ध्यान देगी, ताकि निर्णय प्रक्रिया और संचालन क्षमता को और अधिक सशक्त बनाया जा सके। उन्होंने दोहराया कि तकनीक का उद्देश्य सैनिक को सशक्त बनाना है, उसका स्थान लेना नहीं।

दिन के उत्तरार्ध में माननीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने जयपुर मिलिट्री स्टेशन में सैनिकों से संवाद किया। शाम को आयोजित ‘शौर्य संध्या’ने समारोह को और भी गौरवशाली बना दिया। इस कार्यक्रम में माननीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह, राजस्थान के माननीय राज्यपाल श्री हरिभाऊ किसनराव बागड़े, माननीय मुख्यमंत्री श्री भजन लाल शर्मा, थल सेनाध्यक्ष तथा अन्य वरिष्ठ सैन्य एवं सिविल गणमान्य व्यक्तियों ने शिरकत की। बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक इस भव्य आयोजन के साक्षी बने। इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने ‘फर्स्ट डे कवर’का अनावरण किया तथा ‘नमन सेंटर्स’ का वर्चुअल उद्घाटन किया। उन्होंने वीर शहीदों के परिजनों को सम्मानित कर राष्ट्र की कृतज्ञता व्यक्त की।

शौर्य संध्या में ऑपरेशन सिंदूर का जीवंत मंचन, 1,000 ड्रोन का भव्य प्रदर्शन तथा कलारीपयट्टू और मलखंब जैसी पारंपरिक युद्ध कलाओं की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को रोमांच और गर्व से भर दिया।

समूचा आयोजन भारतीय सेना के अदम्य साहस, आधुनिक शक्ति और राष्ट्रभक्ति के अटूट संकल्प का जीवंत प्रमाण बना, जिसने यह संदेश दिया कि भारतीय सेना हर चुनौती के लिए सदैव तैयार है और देश की सुरक्षा में कोई भी कसर नहीं छोड़ेगी।

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