[t4b-ticker]

बीकानेर: हजारों लोगों को नहीं मिलेगा मुफ्त राशन, ये है वजह आई सामने

बीकानेर: हजारों लोगों को नहीं मिलेगा मुफ्त राशन, ये है वजह आई सामने

बीकानेर। राजस्थान में खाद्य सुरक्षा सूची को पारदर्शी बनाने के लिए चलाए जा रहे गिव-अप अभियान का बड़ा असर अब सामने आ गया है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने पात्र व अपात्र लाभार्थियों की व्यापक पड़ताल करवाई, जिसमें बीकानेर​ जिले में 76,300 लोगों को केवल ई-केवाईसी नहीं करवाने के कारण सूची से बाहर कर दिया गया, जबकि 1,90,199 संपन्न लोगों ने स्वयं अपना नाम गिव-अप किया। कुल मिलाकर 2,66,499 नाम हटे और 1,52,000 नए गरीब परिवार खाद्य सुरक्षा से लाभान्वित हुए।

खाद्य मंत्री सुमित गोदारा के अनुसार पिछले एक वर्ष में प्रदेशभर से 48 लाख लोगों ने अपनी सब्सिडी स्वेच्छा से छोड़ी है, जिसके कारण 70.25 लाख वंचित परिवारों को मुफ्त अनाज की सुविधा मिल पाई। मंत्री ने साफ कहा कि 31 दिसंबर तक गिव-अप अभियान की अवधि समाप्त होते ही अपात्र लाभार्थियों पर वसूली और कार्रवाई शुरू हो जाएगी। डीएसओ नरेश शर्मा ने बताया कि गिव-अप अभियान में बीकानेर पूरे राजस्थान में अग्रणी रहा। खाजूवाला (26.9%), बज्जू (23.4%) और पूगल (20.9%) में सर्वाधिक लोगों ने स्वेच्छा से सब्सिडी छोड़ी। वहीं 76,300 लोगों ने ई-केवाईसी नहीं करवाई, जिससे स्वतः उनका नाम हट गया। विभाग का स्पष्ट संदेश है। ई-केवाईसी न करवाने पर अब मुफ्त का राशन नहीं मिलेगा। राजस्थान में मुफ्त राशन योजना की बढ़ती लागत और वास्तविक लाभार्थियों तक अनाज पहुंचाने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए सरकार ने सख्त कार्रवाई की ओर रुख किया है।

विभाग के मुताबिक, पिछले वर्षों में बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी सूची में बने रहे जो आयकरदाता थे, कार रखते थे या जिनकी आर्थिक स्थिति मजबूत थी, लेकिन वे भी मुफ्त राशन लेते रहे। साल 2024-25 में जब ई-केवाईसी अनिवार्य की गई, तब सामने आया कि हजारों लाभार्थी वर्षों से बिना पहचान सत्यापन के राशन ले रहे थे। यही कारण है कि इस साल ई-केवाईसी, बिजली बिल, एमएसपी बिक्री और एसी उपयोग जैसे मापदंडों की आधारित डेटा-विश्लेषण से व्यापक सफाई अभियान चलाया गया। इसकी सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि 70 लाख से अधिक वंचित और वास्तविक गरीब अब सूची में शामिल हो गए हैं, जो पहले अपात्रों की वजह से बाहर रह जाते थे।

Join Whatsapp