
कोरोना रैपिड टेस्ट किट पर उठने लगे सवाल, बना चिंता का विषय





नई दिल्ली। भारत में विदेशी नागरिकों सहित कोरोना वायरस महामारी से संक्रमित होने वालों की संख्या मंगलवार (21 अप्रैल) को बढक़र 18,601 हो गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने संवाददाता सम्मेलन में यह जानकारी दी। मंत्रालय ने मंगलवार को जारी आंकड़ों में कहा कि देश में कोविड-19 संक्रमण के चलते 590 मौतें हुई हैं और वर्तमान में कुल 14,759 व्यक्ति महामारी से संक्रमित हैं। वहीं, पिछले 24 घंटे में कोरोना के 945 नए मामले सामने आए हैं, जबकि 31 लोगों को इस वायरस की वजह से अपनी जान गंवानी पड़ी है। पिछले 24 घंटों में कोरोना से संक्रमित 410 लोगों के स्वस्थ होने के साथ ऐसे लोगों की संख्या 3252 (1 माइग्रेटेड) पर पहुंच गई है।
वहीं, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने राज्यों को निर्देश दिया है कि वे अगले 2 दिन तक कोरोना रैपिड टेस्ट किट का इस्तेमाल न करें।आईसीएमआर के आर. गंगाखेडक़र ने कहा, राज्यों को दो दिनों के लिए रैपिड टेस्टिंग किट का उपयोग नहीं करने की सलाह दी गई है। रिजल्ट में बहुत भिन्नताएं आ रहीं थीं, जिसके चलते ऑन ग्राउंड टीमों द्वारा किट परीक्षण के बाद 2 दिनों में एडवाइजरी जारी की जाएगी। टेस्टिंग किट्स को लेकर ये एक चिंता की बात है क्योंकि राजस्थान ही पहला ऐसा राज्य है जिसने रैपिड टेस्टिंग की शुरुआत की है. जबकि पश्चिम बंगाल सरकार ने दावा किया है कि ने बड़ी संख्या में डिफेक्टिव किट्स भेजी हैं. बंगाल के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने 19 अप्रैल को आरोप लगाया कि खराब किट्स से कोरोना के टेस्ट कराये जा रहे हैं.
हालांकि, के डॉक्टर रमन गंगाखेडकर ने बताया था कि उन्हें बंगाल से टेस्टिंग किट्स के सही ढंग से काम नहीं करने की सूचना मिली है. उन्होंने बताया कि ये किट्स अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (स्नष्ठ्र) से अप्रूव हैं और इनका स्टैंडर्ड काफी अच्छा है. डॉ. रमन ने बताया कि इन किट्स को 20 डिग्री तापमान से नीचे वाली जगह में रखने की जरूरत है, नहीं तो इसके रिजल्ट गलत भी आ सकते हैं।

