3.4 करोड़ ने इस साल छोड़ी नौकरी,  इस्तीफों का दौर जारी; जॉब के लिए खोजे नहीं मिल रहे लोग

किसी भी देश के लिए बेरोजगारी सबसे बड़ी चुनौती होती है। दुनिया के कई देश इससे ठीक उलट चुनौती से जूझ रहे हैं। वहां रोजगार तो है, लेकिन काम करने वाले लोग नहीं मिल रहे हैं। ये सब हो रहा है 'द ग्रेट रेजिग्नेशन' की वजह से।

अमेरिका में इस साल अब तक 3.4 करोड़ लोग इस्तीफा दे चुके हैं। सिर्फ सितंबर महीने में यहां नौकरी छोड़ने वालों का आंकड़ा 44 लाख है। OECD देशों के 2 करोड़ लोग कोरोना के बाद काम पर नहीं लौटे हैं। दुनिया के 41% कर्मचारी इस साल अपनी नौकरी बदलने की तैयारी कर रहे हैं। UK, जर्मनी और भारत की कंपनियां भी स्किल्ड वर्कर की कमी से जूझ रही हैं।दुनिया द ग्रेट रेजिग्नेशन के बीच खड़ी है और हम इससे जुड़े सभी पहलुओं के बारे में बात कर रहे हैं। नौकरी क्यों छोड़ रहे हैं लोग? नौकरी छोड़कर कहां जा रहे हैं? क्या आपको भी नौकरी छोड़ने के बारे में सोचना चाहिए? इससे कंपनियों के सामने किस तरह की मुसीबतें खड़ी हो गई हैं?

नौकरी से इस्तीफा देने की कई वजहों में बेरोजगारी भत्ते, कम सैलरी, परिवार से दूरी, ट्रांसफर, कोरोना का डर शामिल है, लेकिन ये सिर्फ आधी कहानी है। द ग्रेट रेजिग्नेशन की सबसे बड़ी वजह काम और जिंदगी के बीच संतुलन है।

पिछले काफी वक्त से हमारी जिंदगी काम के इर्द-गिर्द मंडरा रही है। ऑफिस कैलेंडर के हिसाब से हम अपनी लाइफ की प्लानिंग करते हैं। दोस्तों से सिर्फ वीकेंड पर मिल पाते हैं। काम के लिए दोस्तों की शादी छोड़ देते हैं। पेरेंट टीचर मीटिंग की बजाए ऑफिस मीटिंग को तरजीह देते हैं।

महामारी ने सब उलट-पलट दिया और लाखों लोगों ने अपनी जिंदगी को नए सिरे से सोचना शुरू कर दिया है। Limeade के एक सर्वे के मुताबिक 40% लोग बर्नआउट की वजह से नौकरी छोड़ रहे हैं। लोग ऐसी नौकरी चाहते हैं, जो फ्लेक्सिबल, काम के कम घंटे और हफ्ते में कम दिन काम वाली हो। यानी एक ऐसी नौकरी जो उनकी लाइफ स्टाइल के हिसाब से फिट बैठे।

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