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बीकानेर। कोरोना वायरल को लेकर पूरे देश में दहशत का माहौल पैदा हो गया है। इसका प्रभाव देश व राज्य में न हो इसके लिये सरकार की ओर से एतिहात बरती जा रही है। केन्द्र व राज्य सरकार ने कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिये शिक्षा मंदिरों में छुट्टियों का एलान कर दिया है। वहीं जिम व सिनेमाघरों में भी पाबंदी लगा दी है। किन्तु भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में इसके प्रभाव को रोकने के लिये पर्याप्त कदम नहीं उठाएं गये है। मंजर ये है कि राजनेताओं के कार्यक्रमों पर तो कोई पाबंदी नहीं है। परन्तु खत्म हो रहे शिक्षा सत्र को प्रभावित करने के लिये सरकार ने एडवाईजरी जारी कर दी है। इसका प्रभाव निश्चित रूप में शिक्षा जगत में देखने और भोगने को मिलेगा।
क्या यहां नहीं फेल सकता कोरोना
मजे की बात तो यह है कि कोरोना को लेकर चिकित्सा विभाग व सरकार कई प्रकार के दिशा निर्देश दिए जा रहे है। किन्तु इनकी अनुपालना को लेकर क्या तैयारी है,इस बारे में कोई चिंतन नहीं किया जा रहा है। सरकार ने स्कूलों में छुट्टियां कर दी। किन्तु अध्यापकों व कार्मिकों को स्कूल में बुलाया जा रहा है। जबकि अध्यापकों में भी कोरोना की चपेट के समाचार प्रकाशित हो चुके है। यहीं नहीं मंडियों,सब्जी म ंडी,भीड़भाड़ के इलाके,विवि,कॉलेज परिसर,रेलवे व रोडवेज तथा धार्मिक व सामाजिक आयोजन को लेकर सरकार की एडवाईजरी धरी की धरी रह जाती है।
राजनेताओं को नहीं है कोरोना का भय
कोरोना वायरस को लेकर जहां पूरे देश हाहाकार मचा हुआ है। वहीं राजनेताओं को इसका भय नजर नहीं आ रहा है। जिसकी बानगी इस बात में देखने को मिल रही है कि राजनेताओं के एक भी कार्यक्रम निरस्त नहीं किये जा रहे है। बल्कि जोश खरोश से राजनेता व पार्टी के कार्यकर्ता कार्यक्रम आयोजित कर रहे है। जिले में भी शनिवार को ऐसे दो दिन आयोजन देखने को मिले। विगत दिनों में भी राजनेताओं ने जनसुनवाई की। वहीं कही भूमिपूजन तो कही शिलापट्ट के उद्घाटन के आयोजन देखने को मिले।
मजाक बना मुख्यमंत्री का प्रेस नोट
कोरोना वायरस को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने देर रात अपने निवास पर उच्च स्तरीय बैठक लेकर पूरे प्रदेश में स्कूल,कॉलेज,कोचिंग व सिनेमाघरों को 30 मार्च तक बंद करने के निर्देश दे दिए थे। सी एम की बैठक के उपरान्त सोशल मीडिया पर जारी खबरों को शिक्षा अधिकारियों ने ज्यादा तरजीह नहीं दी और शिक्षा विभाग ने निदेशक ने सुबह एक आदेश निकालकर तीस मार्च स्कूलों को बंद करने के निर्देश दिए। मजे की बात ये है कि इस आदेश की भाषा वहीं थी,जो देर रात को सीएम की बैठक के बाद मीडिया को जारी किये गये प्रेस नोट की रही। इस प्रेस नोट के बाद ही समाचार पत्रों व सोशल साईटस पर खबरों का प्रकाशन हुआ। लेकिन इन खबरों में प्रकाशित दिशा निर्देशों को शिक्षा विभाग के मुखिया व शिक्षा अधिकारियों ने ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया। जिसके चलते अभिभावकों व बच्चों को परेशान होना पड़ा। यहीं नहीं शिक्षा अधिकारी भी स्कूल संचालकों को अलग अलग जारी देते हुए पाएं गये।
फर्जी मैसेज वालों पर कार्यवाही की बात
गौर करने वाला विषय तो यह है कि कोरोना वायरस के संदर्भ में फर्जी मैसेज करने पर मनाही है। किन्तु सोशल मीडिया पर शिक्षा निदेशक सौरभ स्वामी के नाम से ही फर्जी मैसेज वायरल हो रहा था। जिसको लेकर उहापोह की स्थिति पूरे प्रदेश में बन गई। हालांकि इस मैसेज के बाद उन्हें सफाई देनी पड़ी। परन्तु सोचने वाला विषय तो यह है कि आखिर उनके नाम का यह मैसेज किसके द्वारा वायरल किया गया। विभाग के एक अन्य अधिकारी का भी मैसेज वायरल हुआ। अब देखने वाली बात यह है कि इस प्रकार के फर्जी मैसेज को लेकर विभाग कितना गंभीर होता है कि एक जिम्मेदार अधिकारी के नाम से फर्जी मैसेज वायरल हो जाते है। जिससे कन्फ्यूजन के हालात पैदा हो गये।
आदेशों से शिक्षा सत्र होगा प्रभावित
इधर तीस मार्च तक स्कूलों के संचालन पर रोक के आदेशों से आगामी शिक्षा सत्र प्रभावित होने की पूरी संभावना है।