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बीकानेर। राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार द्वारा ग्रेड पे कटौती व बकाया डीए को लेकर राज्य कर्मचारियों को रोष है। जिसको लेकर कर्मचारी वर्ग चरणबद्व आन्दोलन की रूपरेखा तैयार कर रहा है। इसकी शुरूआत गुरूवार से बीकानेर से कर्मचारियों के जागरूकता अभियान से की गई है। ये कहना है अखिल राजस्थान राज्य संयुक्त कर्मचारी महासंघ एकीकृत के प्रदेशाध्यक्ष केसर सिंह चंपावत का। सर्किट हाउस में पत्रक ारों से मुखातिब होते हुए चंपावत ने कहा कि पूर्ववर्ती और वर्तमान सरकार के एक आदेश में प्रदेश के डेढ़ से दो लाख कर्मचारियों के वेतनमान में उतार-चढ़ाव हो रहा है।
जुलाई में जो कर्मचारी सेवानिवृत्त हो रहे हैं उनकी पेंशन पर भी संशोधन के कारण रोक सी लग गई है। अब तक कर्मचारी संगठन चुप हैं लेकिन अब महासंघ चुप नहीं बैठेगा और कर्मचारियों के हितों में सरक ार के मांगे नहीं मानने की स्थिति में आन्दोलन की राह अपनाएगा। उन्होनें कहा कि मामला इतना उलझ गया कि कर्मचारियों का वेतनमान तो कम हो ही रहा साथ में रिकवरी भी निकाली जा रही है। पूर्व में वेतन ज्यादा था अब उसे कम किया जा रहा है। चंपावत ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय है कि बढ़ा हुआ वेतन कम नहीं किया जा सकता लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और वर्तमान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कर्मचारियों पर आर्थिक मार देनी शुरू कर दी है। कर्मचारी की रिकवरी न्यूनतम एक लाख से अधिकतम चार लाख रुपए तक हो रही है। प्रभावित होने वाले कर्मचारियों में मंत्रालयिक कर्मचारी, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, कार्य प्रभारी कर्मकार एवं अधीनस्थ सेवाओं के कर्मचारी शामिल हैं। हालांकि, इसके विरोध में पीडि़त कर्मचारी कोर्ट की शरण में चले गए हैं।चंपावत ने कहा कि सांवत कमेटी की रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि जुलाई 2019 से कर्मचारियों को 5 प्रतिशत बकाया डीए तुरंत दिया जाएं। लेकिन एक साल का समय बीत जाने के बाद भी गहलोत सरकार कर्मचारियों को डीए नहीं दे रही है। उन्होंने ओल्ड पेंशन स्कीम को लागू करने तथा संविदा व निविदा पर लगे कार्मिकों को नियमित करने की मांग की।

 

कर्मचारियों को नुकसान
कर्मचारी नेता भंवर पुरोहित ने कहा कि सरकार के आदेश जारी होते ही वित्त विभाग के कर्मचारी वेतनमान में कांट-छांट में जुट गए। इतना ही नहीं, जुलाई में जो कर्मचारी सेवानिवृत्त हो गया और उसने पूर्व में वेतनमान लिया और अब अगर उसका वेतनमान कम होगा तो उसकी पेंशन से रिकवरी के आदेश हुए हैं। इसीलिए तमाम कर्मचारियों की पेंशन भी अटकी हुई है। पुरोहित ने कहा कि हालात ये है कि हाकम बदल गए,पर हुकूम नहीं।
ये है मामला
2013 में वर्तमान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने पिछले कार्यकाल में एक जुलाई 2013 से 1900 ग्रेड पे को 2400, 2000 को 2400, 2100 को 2400, 2400 को 2800 और 2800 ग्रेड पे वाले कर्मचारियों को 2800 ग्रेड पे देने का आदेश जारी किया था। पांच जुलाई 2013 को नौ, 18,27 वर्षीय एसीपी पर 2400 ग्रेड पे वाले कर्मचारियों को नौ वर्ष पर 2800, 18 वर्ष पर 3600 और 27 वर्ष पर 4200 तथा 2800 ग्रेड पे वालों को नौ वर्ष पर 3600, 18 वर्ष पर 4200 और 27 वर्ष पर 4800 रुपए ग्रेड पे देने का निर्ण हुआ। तब कर्मचारियों ने इससे राहत महसूस की लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधराराजे ने अपने पिछले कार्यक ाल में 30 अक्टूबर 2017 को एक जुलाई 2013 वाले नौ, 18,27 वर्ष वाले एसीपी पर ग्रेड पे में संशोधन के आदेश कर दिए। उसमें कर्मचारियों ग्रेड पे कम किया गया। अशोक गहलोत सरकार ने वसुंधराराजे के आदेश को हूबहू लागू करते हुए नौ अगस्त को रिकवरी के आदेश के जारी कर दिए। जो संशोधित ग्रेड पे है उसमें 2400 ग्रेड पे को नौ साल पर 2400, 18 वर्ष पर 2400 और 28 वर्ष पर 2800 तथा 2800 ग्रेड पे पर नौ साल में 2800, 18 वर्ष पर 3600 और 27 वर्ष पर 4200 रुपए का ग्रेड पे देने के आदेश जारी हुए।