>


बीकानेर। जिले में तेजी से बढ़ते कोरोना के चलते एक बारगी पैनिक बढ़ गया था. नए कलक्टर के समक्ष कोरोना कंट्रोल के साथ-साथ व्यवस्थागत सुधार भी एक चुनौती था. क्वारेंटाइन सेंटर की बात हो या हॉस्पिटल्स की शिकायतें. जिला कलेक्टर नमित मेहता दरअसल जॉइनिंग के बाद ही ये समझ गए थे कि बीकानेर के परकोटे में कोरोना के कम्युनिटी स्प्रेड को रोकने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है. इसके लिए जांचे बढ़ाई गई ताकि चैन को तोड़ा जा सके. कलक्टर इस बात से वाकिफ थे कि अचानक जांच बढ़ाने पर एकबारगी कोरोना पेशेंट बढ़ेंगे. हुआ भी ठीक ऐसा ही बीकानेर में कोरोना की जांच अब 2300 के आसपास होने लगी तो एकबारगी अचानक से मरीज बढ़े. ओल्ड सिटी में कर्फ्यू भी लगाया गया लेकिन अब धीरे-धीरे चीजें पटरी पर आ रही. हालांकि ये सच है कि कोरोना के साथ जीने की आदत अब डालनी होगी.
बीकानेर में कोरोना कंट्रोल के साथ शहर से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर कलक्टर नमित मेहता ने फस्र्ट इंडिया से तफ्सील से बात की

फस्र्ट इंडिया- बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच आपने पदभार संभाला था ? 17 दिनों में जो कुछ कर पाए कितना संतुष्ट है आप और जनता के लिए क्या संदेश?
कलक्टर नमित मेहता- देखिए ये बात सही है कि जब मैंने पदभार संभाला तो कोरोना स्प्रेड बढ़ रहा था. हमने इसकी चेन को तोडऩे के लिए स्प्रेड को ध्यान में रखते हुए जांचे बढ़ा दी ताकि कम्युनिटी स्प्रेड ना होने पाए. एकबारगी स्वाभाविक था कि मरीज बढ़े. इसी वक्त हमने कफऱ््यू का सहारा भी लिया ताकि एकबारगी स्प्रेड ओल्ड सिटी से ज्यादा बाहर ना जाए. हम बहुत हद तक सफल रहे हैं. डाक्टर्स, ष्टरू॥ह्र और पुलिस प्रशासन यानि टीम वर्क से आज मैं मानता हूं कि स्थिति कन्ट्रोल में. आप देखेंगे हमने केवल जांच पर ही फोकस किया हो ऐसा नहीं है. मैंने खुद भीतर जाकर कोविड सेंटर्स की ग्राउंड रियल्टीज चेक की जो शिकायतें आ रही थी या मीडिया के जरिए फीडबैक मिला उन शिकायतों के निस्तारण पर काम किया गया. मनोरंजन के लिए टीवी की व्यवस्था, सफाई या खाने पीने को लेकर शिकायतें हो बहुत हद तक काम किया जिसका परिणाम भी सामने है. मैं 100 प्रतिशत का दावा नहीं करता पर 17 दिनों में बढ़ते कोरोना की चुनौती के बीच टीम वर्क से जनता को कम से कम परेशानी के साथ राहत मिले ये हमारा फोकस रहा. 20 जुलाई तक 50 हजार से अधिक जांच के बाद 1434 पॉजिटिव केसेज में से एक्टिव केस 724 है. 679 मरीज रिकवरी के बाद डिस्चार्ज कर दिए गए है. जिन 31 मौते हुई है ये दु:खद है हालांकि उनमें से अधिकतर बुजुर्ग थे या दूसरी बीमारियों से भी ग्रसित थे.

फस्र्ट इंडिया- क्या कफऱ््यू ही कोरोना का समाधान है? क्योंकि रोजी रोटी का संकट पैदा होता है?

कलक्टर – कफऱ््यू से रोजी का संकट निश्चततौर पर बढता है,परेशानियां होती है. लेकिन ये सही है कि जब एक साथ बहुत मामलें आ रहे हो तो इस मॉडल को अपनाया जाना जरूरी होता है क्योंकि अभी कोरोना को वैक्सीन नहीं है. ऐसे में दूसरा व्यक्ति संक्रमण में ना आए. जब मैंने पदभार संभाला तो हर दूसरे ज्ञापन के लॉक डॉउन की मांग आ रही थी हालांकि हमने कफऱ््यू ओल्ड सिटी के स्प्रेड को नहीं फैलने के लिए लगाया था अब उसमें ढील भी दे दी है. कोरोना से बचाव के लिए व्यक्ति मास्क लगाए, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करे और तमाम एडवाइजरी को फॉलो करें ये तो कोरोना से निपटना आसान है. मैं मानता हूं कि स्वानुशासन ही सॉल्यूशन है कफऱ््यू की ज्यादा जरूरत तभी पड़ती है जब व्यक्ति खुद से लापरवाह हो जाता है.

फस्र्ट इंडिया- कफऱ््यू से गरीब को रोजी रोटी की मार पड़ती है, बाजार बंद है ? क्या उम्मीद करें ?

कलक्टर- अब 12 दिन के करीब हो गए है हमने ढील दी है और जल्द ही राहत दी जाएगी. सरकार और मुख्यमंत्री जी की भी मंशा गरीब और आमजन को परेशानी ना हो कोई भूखा ना सोए.

फस्र्ट इंडिया इंडिया- ग्रामीण क्षेत्र में कोरोना को लेकर क्या स्थिति है? ग्रामीण इलाकों मे क्या मनरेगा लक्ष्य को हासिल कर रहा है या करप्शन हावी है?

कलक्टर नमित मेहता- ग्रामीण क्षेत्रो में कोरोना को लेकर ब्लॉक सीएमएचओ से लगातार विभाग कोर्डिनेशन रख रहा है. वहां भी जांचे पहले से ज्यादा हो रही है. जहां तक मनरेगा का प्रश्न है जिला बेहतर स्थिति में है. करीब 1 लाख 60 हजार श्रमिक काम पर है. चार महिनों में जीकेआरवाई में 24 अक्टूबर तक 43 लाख मानव दिवस का जो लक्ष्य है अभी तक 20 लाख का लक्ष्य अर्जित भी किया जा चुका है. जहां तक किसी तरह के घपले की बात है मौके पर ऑडिट के लिए एक ही दिन जिले भर के अधिकारी एक साथ पंचायत वार निरीक्षण करेंगे जो औचक होगा उसमें काफी कुछ सामने आ जाता है. लेकिन यकीनन अभी तक नरेगा में हमारा जिला बेहतर कर पाया है.

फस्र्ट इंडिया- दरअसल बीकानेर में जो अब तक के कलक्टर्स के कार्यकाल में कुछ एक कलक्टर्स के कार्यो को याद किया जाता है. निश्चित तौर पर हर कलक्टर अपनी तरफ से बेहतर देने का प्रयास करता है? आपकी प्राथिमकता क्या है?

कलक्टर नमित मेहता- इस वक्त कोरोना कि चुनौती के साथ किसानों की फसल को टिड्डी से बचाना बड़ी जिम्मेदारी है. वैसे सरकार की योजना हर कलक्टर की प्राथिमकता होती है. वो मेरी भी रहेंगी. वहीं मैं मानता हूं रोजमर्रा के कामों में जनता को दिक्कत ना हो. स्वास्थ्य, बिजली, पानी, सीवरेज ये सबके लिए अहम है. जहां तक मैं सोचता हूँ कि शहर में एकरूपता से विकास जरूरी है. कई इलाके चमकदार तक कई में सफाई ही सही नहीं है ये छोटी-छोटी लगने वाली चीजें बड़ा फर्क डाल देती है. सड़कों पर अतिक्रमण हटाना जरूरी है. साथ ही पर्यटन की दृष्टि से शहर का सौंदर्यीकरण भी मायने रखता है.
फस्र्ट इंडिया- बीकानेर में प्रशासनिक अधिकारी के तौर पर आपकी दूसरी पारी है ….

कलक्टर नमित मेहता- हर शहर की अपनी खासियत होती है. यहां के लोग वाकई जिंदादिल है कम डिमांडिंग है लेकिन यहां का हैप्पीनेस इंडेक्स शहर की शीरत बताता हैं. बालिका गृह का जो मॉडल यहां है वो भी बेमिसाल है. हम उन बच्चियों के लिए और बेहतर कर पाए ये प्रयास रहेगा.