नेताओं से लेकर अधिकारी सबका ध्यान चुनाव पर,जनता त्रस्त
खरीदकर पीना पड़ रहा है पानी

बीकानेर। जिले में पेयजल व सिंचाई के पानी का मुद्दा सबसे बड़ा है, लेकिन हालात सुधरने की जगह बिगड़ते जा रहे हैं। खासकर लोकसभा चुनाव के दौर में जलसंकट और गहरा गया है। पूरे जिले में ही हालात खराब हैं। जनप्रतिनिधि वोट मांगने में व्यस्त है और जनता पेयजल का इंतजाम करने में पसीना बहा रही है। अधिकारी भी सब चुनाव में व्यस्त हैं। हालात खराब होते जा रहे हैं, लेकिन पानी के इंतजामों का जायजा लेने अभी तक एक भी अधिकारी फील्ड में नहीं आया है। अधिकारी पेयजल वितरण प्रबंधन पर भी ध्यान दें तो कुछ सुधार हो सकता है। जिलेभर में गर्मी की आहट के साथ ही पानी का संकट खड़ा हो गया है। जिला मुख्यालय पर अब एक दिन छोड़कर एक दिन में एक बार सप्लाई होती है। कई कॉलोनियों में तो पानी पहुंच ही नहीं रहा है। जिले में छोटे से बड़े हर चुनाव में पानी का मुद्दा छाया रहता है। पानी के लिए लोग आमने-सामने हो रहे हैं। भीषण गर्मी में जल संकट गहराता जा रहा है। पानी पाताल में जा रहा है। पानी की मांग बढ़ती जा रही और आपूर्ति घटती जा रही है।
कैम्परों के भरोसे पेयजल
शहर में बिगड़ी पेयजल व्यवस्था का फायदा निजी सप्लायर ले रहे हैं। आसपास के गांवों के लोग अपने कुओं से पानी के टैंकर भर कर शहर में सात सौ से 1200 रुपए प्रति टैंकर बेच रहे हैं। वहीं शहर में ही प्रतिदिन लोग हजारों कैम्पर पानी महंगे दाम में खरीद क र पी रहे हंै। अब तो गांवों में भी पानी के कैम्पर बिक रहे हैं। स्थिति ये है कि टैंकर से पानी सप्लाई करने वाले मुंह मांगे दाम वसूल कर रहे है और विभागीय शिकायतों के बाद भी इन पर कोई कार्यवाही नहीं हो रही है।
नि:शुल्क सप्लाई की निकली हवा
मंजर ये है कि जलदाय विभाग के नि:शुल्क टैंकर की व्यवस्था का दावा भी खोखला साबित हो रहा है। विभाग ने पानी न आने वाले इलाकों में टैंकर से अपने स्तर पर पानी उपलब्ध करवाने की बात कही। लेकिन पूर्व व पश्चिम विधानसभा में महज 25 टैंकर पानी सप्लाई का काम कर रहे है। मजे की बात ये है कि जहां से विभाग के टैंकर पानी लेने पहुंचते है,वहां निजी सप्लायर पहले से ही कतार में रहते है और पूरे दिन भर में सरकार की ओर से लगाएं गये टैंकर पूरी पूर्ति नहीं कर पाते।
लीकेजों से बहता व्यर्थ पानी बना कोढ़ में खाज
पेयजल संकट के बावजूद शहर में कई जगह पाइप लाइन लीकेज से सैकड़ों लीटर पानी व्यर्थ बह जाता है। इससे कोढ़ में खाज वाली कहावत चरितार्थ हो रही है। वहीं दूषित पानी भी सप्लाई हो रहा है।
नहीं हो रही मॉनिटरिंग
एक ओर तो जिला कलक्टर ने नहर बंदी के दौरान पानी की त्राही त्राही न हो इसके लिये पुख्ता इंतजाम के निर्देश जलदाय विभाग के अधिकारियों को दिये थे। साथ ही जिन मोहल्लों,कॉलोनियां व बस्तियों में पानी नहीं आ रहा। वहां नि:शुल्क पानी के टैंकरों से पानी की सप्लाई करवाने के आदेश दिये थे। लेकिन विभाग के अधिकारियों न तो पेयजल व्यवस्था सुचारू है। इस ओर ध्यान दिया और न ही टैंकरों से कहां कितनी सप्लाई हो रही है। इसकी मॉनिटरिंग की। हालात ये रहे कि विभाग के अधीक्षण अभियंता ने तो मोबाइल फोन ही उठाना बंद कर दिया।