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बीकानेर। राज्य का एक जिम्मेदार विभाग में किस तरह काम होता है। इसका प्रमाण विभाग की लापरवाहियों से ही लगाया जा सकता है। जहां पचास रूपये में फिटनेस प्रमाण पत्र और सौ रूपये में प्रदूषण जांच प्रमाण पत्र मिलते है। जी हां आपको ये चौकाना वाली बात लगेगी। परन्तु हकीकत यह है। खुलासा पोर्टल को दो अलग अलग विडियो मिले है। जिसमें परिवहन विभाग और उनके अधीनस्थ काम कर रहे प्रदूषण जांच केन्द्रों की घोर लापरवाही सामने आई है। एक विडियों में वाहन चालक की फिटनेस बिना चिकित्सक की पचास रूपये में प्रमाणित की जा रही है। वहीं दूसरे विडियो में कबाड़ पड़े ट्रक का प्रदूषण जांच प्रमाण पत्र सौ रूपये में जारी कर दिया गया है। आरजे 13जीबी 2353 नंबरों के इस ट्रक की टेस्टिंग सियाग पोल्यूसन टेस्टिंग सेन्टर पर 16 दिसम्बर को करना बताया गया है और प्रदूषण जांच के बाद 15 मई 2020 तक इसकी वैधता का प्रमाण पत्र जारी किया गया है। वाकायदा इसको जारी प्रमाण पत्र को राजस्थान परिवहन विभाग की बेवसाईट पर भी ऑनलाईन किया गया है।

ऐसे ही बनते है लाईसेंस
जानकारी मिली है कि वाहन चालकों के लाईसेंस भी फिटनेस और प्रदूषण प्रमाण पत्रों की तर्ज पर तैयार होते है। बस कुछ रूपये तो ओर तैयार है लाईसेंस। अगर टेस्ट ड्राईविंग में पास नहीं तो भी मिल जाता है वाहन चलाने का लाईसेंस।
ऐसे पहले मामले नहीं
हालात ये है कि इस तरह से फिटनेस प्रमाण पत्र या प्रदूषण प्रमाण पत्र जारी करने के ये पहले मामले नहीं है। पहले भी परिवहन विभाग की इस तरह की शिकायतें आती रही है। किन्तु न तो जिला स्तर पर प्रशासन और न ही राज्य सरकार ऐसे प्रकरणों को गंभीरता से लेती है। जब कोई हादसे होते है तो महज खानापूर्ति कर इतिश्री कर ली जाती है। परन्तु सोचने वाला प्रश्न ये है कि आखिर विभाग की इस लापरवाही पर कार्यवाही न करना प्रशासन और सरकार की क्या मजबूरी है।