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– क्या बगैर विवाद किए समस्या का निस्तारण नहीं हो सकता ?
खुलासा न्यूज़, बीकानेर। नेता और जनप्रतिनिधि में फर्क होता है। नेता किसी कौम या समाज का हो सकता है, लेकिन एक जनप्रतिनिधि के लिए ऐसा संभव नहीं है। वह संवैधानिक रूप से सबके साथ एक जैसा व्यवहार करने के लिए वचनबद्ध होता है और अधिकारियों के साथ समन्वय बैठाकर जनता का कार्य करवाने के लिए भी प्रतिबद्ध होता है। लेकिन बीकानेर जिले का एक विधायक किसी भी तरह से खरे नहीं उतर पाए है। हम बात कर रहे है विधायक सुमित गोदारा की जो अक्सर विवादों में घिरे रहते हैं। विधायक बनने के बाद कई तरह के विवादित आरोप लगे, ऐसे में अधिकारियों के बीच उनकी छवि एक विवादित चेहरे के रूप में बन गई। ताजा मामला सामने आया है कि गुरुवार को लूणकरणसर कस्बे में मनाए गए स्वतंत्रता दिवस समारोह में एसडीएम के साथ नोकझोंक हो गई। नोकझोंक के बाद विधायक गोदारा ने एसडीएम पर आरोप लगाया कि एसडीएम ने कार्यक्रम में उनका संंबोधन नहीं करवाया और ना ही निमत्रण दिया। इस संंबंध में उन्होंने एसडीएम के खिलाफ कार्यवाही की मांग की है ? अब सवाल उठना यह लाजमी हो जाता है कि क्या बगैर विवाद समस्या का निस्तारण नहीं हो सकता है ? या सुर्खियों में रहने के लिए अधिकारियों के साथ विवाद करना ? लूणकरणसर एसडीएम व विधायक सुमित गोदारा का विवाद से बाजार चर्चाओं से गरमाया हुआ है।

पूर्व सीएम राजे ने भी सुमित गोदारा को किया दरकिनार
विधायक सुमित गोदारा की इसी कार्यशैली की शिकायत को लेकर पूर्व सीएम वसुन्धरा राजे ने भी दरकिनार कर दिया। ज्ञात रहे कि पिछले दिनों पूर्व मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे के बीकानेर दौरे के दौरान सीएम राजे ने विधायक सुमित गोदारा को कोई खास तवव्जो नहीं दी। आपकों यह भी बता दें कि कभी सुमित गोदारा राजे के एकदम खासमखास हुआ करते है, आज सुमित गोदारा अपनी कार्यशैली के चलते खुद ने ही अपनी साख पर बट्टा लगा लिया। सीएम राजे द्वारा विधायक गोदारा को दरकिनार करने की ख़बर से राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं से गरमाया हुआ है।